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महापरिनिर्वाण दिवस

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महापरिनिर्वाण दिवस डॉ. भीमराव रामजी आंबेडकर की पुण्यतिथि के रूप में प्रतिवर्ष 6 दिसंबर को मनाया जाता है। डॉ. आंबेडकर का महापरिनिर्वाण (निधन) 6 दिसंबर 1956 को दिल्ली में हुआ था। इसके अगले दिन, 7 दिसंबर को मुंबई स्थित चैत्यभूमि में उनका अंतिम संस्कार बौद्ध रीति-रिवाजों के अनुसार संपन्न हुआ। डॉ. आंबेडकर ने अपने जीवन के अंतिम चरण में, 14 अक्टूबर 1956 को नागपुर में लाखों अनुयायियों के साथ बौद्ध धर्म स्वीकार किया था। बौद्ध समुदाय उन्हें बोधिसत्त्व के रूप में सम्मानित करता है, तथा वे बौद्ध धर्मगुरु माने जाते हैं। इसी कारण, उनकी पुण्यतिथि को 'महापरिनिर्वाण दिवस' कहा जाता है, जो बौद्ध धर्म की एक महत्वपूर्ण अवधारणा है।[1][2]

हर वर्ष 1 दिसंबर से ही देशभर से लाखों अनुयायी मुंबई स्थित चैत्यभूमि, उनके समाधिस्थल, पर एकत्र होते हैं। 6 दिसंबर को, अनुमानतः 25 लाख से अधिक भीम अनुयायी चैत्यभूमि पहुंचते हैं, जहाँ वे डॉ. आंबेडकर की अस्थिकलश और प्रतिमा को श्रद्धांजलि अर्पित करते हैं तथा उनके दर्शन करते हैं। इसी दिन भारत सहित विश्वभर में आंबेडकरवादी लोग डॉ. आंबेडकर की प्रतिमा अथवा चित्र के समक्ष उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित करते हैं। स्थानीय बौद्ध विहारों, घरों, सार्वजनिक स्थलों, स्कूलों, कॉलेजों, तथा शासकीय कार्यालयों में भी उन्हें श्रद्धांजलि दी जाती है। राजनेता एवं अन्य प्रमुख व्यक्ति डॉ. आंबेडकर के स्मारकों पर जाकर उन्हें नमन करते हैं।[3][4]

सन्दर्भ

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  1. "Mahaparinirvan Diwas 2024: महापरिनिर्वाण दिवस क्या है? महापरिनिर्वाण दिवस कब और क्यों मनाया जाता है? जानें इससे जुड़े जरूर सवाल जवाब". Times Now Navbharat. 2024-12-05. अभिगमन तिथि: 2025-08-09.
  2. "डा. आंबेडकर का महापरिनिर्वाण दिवस आज, जानें काम की बातें". Navbharat Times. अभिगमन तिथि: 2025-08-09.
  3. "Mahaparinirvan Diwas 2024: महापरिनिर्वाण दिवस क्या है? महापरिनिर्वाण दिवस कब और क्यों मनाया जाता है? जानें इससे जुड़े जरूर सवाल जवाब". Times Now Navbharat. 2024-12-05. अभिगमन तिथि: 2025-08-09.
  4. "डा. आंबेडकर का महापरिनिर्वाण दिवस आज, जानें काम की बातें". Navbharat Times. अभिगमन तिथि: 2025-08-09.