महर्षि

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प्राचीन भारतीय आर्य संस्कृति में ज्ञान और तप की उच्चतम सीमा पर पहुँच चुके व्यक्ति महर्षि कहलाते थे। इससे ऊपर ऋषियों की एकमात्र कोटि ब्रह्मर्षि की मानी जाती थी।

हम सभी मनुष्यो में तीन प्रकार के चक्षु होते है वह है ज्ञान चक्षु, दिव्य चक्षु और परम चक्षु । जिसका ज्ञान ज्ञान जाग्रत होता है उसे ऋषि कहते है, जिसका दिव्य चक्षु जाग्रत होता है उसे महर्षि कहते है एवं जिसका परम चक्षु भी जाग्रत हो जाता है उसे ब्रह्मर्षि कहते है ।ज्ञान चक्षु आंखो की पलकों के ऊपर दिखता है दिव्य चक्षु दोनों भौहों के मध्य होता है एवं परम चक्षु हमारी ललाट पर स्थित होता है ।