मलिहाबाद

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मलिहाबाद
Malihabad
मलीहाबाद
कस्बा
उपनाम: Mango city
मलिहाबाद की उत्तर प्रदेश के मानचित्र पर अवस्थिति
मलिहाबाद
मलिहाबाद
Location in Uttar Pradesh, India
मलिहाबाद की भारत के मानचित्र पर अवस्थिति
मलिहाबाद
मलिहाबाद
मलिहाबाद (भारत)
मलिहाबाद की एशिया के मानचित्र पर अवस्थिति
मलिहाबाद
मलिहाबाद
मलिहाबाद (एशिया)
निर्देशांक: 26°56′N 80°43′E / 26.94°N 80.72°E / 26.94; 80.72निर्देशांक: 26°56′N 80°43′E / 26.94°N 80.72°E / 26.94; 80.72
देशFlag of India.svg भारत
राज्यउत्तर प्रदेश
जिलालखनऊ
शासन
 • प्रणालीलोकतांत्रिक
 • सभानगर पंचायत
ऊँचाई128 मी (420 फीट)
जनसंख्या (2011)
 • कुल17,818
भाषा
 • अधिकारिकहिंदी
 • अतिरिक्त अधिकारिकउर्दू
समय मण्डलआईएसटी (यूटीसी+5:30)
वाहन पंजीकरणयूपी -32
वेबसाइट[1]
दशहरी आम मलिहाबाद के निकटवर्ती क्षेत्रों में उगाया जाता है,यह यहां की परंपरागत उपज में से एक है। दशहरी आम मलिहाबाद की शान है

मलिहाबाद लखनऊ जिले की एक तहसील और उसका ब्लॉक है। मलिहाबाद दशहरी आम के लिए आज पूरी दुनिया में प्रसिद्ध है।

फलों का राजा कहा जाने वाला आम इस मलिहाबाद की विरासत में, नवाबों का शहर लखनऊ की नवाबी मलिहाबाद में साफ देखी जा सकती है। यहां के आम देश विदेश तक मशहूर हैं। दशहरी आम यहां की शान हैं। आमों की तमाम किस्म यहां के किसानों ने बरकरार कर रखी है। लखनऊ के इतिहास मे मलिहाबाद से पहले ३ ग्राम बसे थे जो निन्म है- गढ़ी संजर खान',बख्तियार नगर।,लखनऊ गजेटियर 1904 के पृष्ठ 237 , 238 अवध राज्य गजेटियर वाल्यूम 2 1877के पृष्ठ 427के अनुसार मलिहाबाद का इतिहास निम्नांकित है

इतिहास[संपादित करें]

परंपरा के अनुसार, शहर की स्थापना मालिया, एक पासी के द्वारा की गई थी[2] लेकिन अकबर [3] के शासनकाल तक, पठानों द्वारा बसाए जाने तक इसके इतिहास के बारे में कुछ भी ज्ञात नहीं है। कहा जाता है कि इस स्थान की स्थापना एक मालिया, पासी द्वारा की गई थी, लेकिन इस व्यक्ति के बारे में कुछ भी ज्ञात नहीं है, हालांकि ऐसा प्रतीत होता है कि पासियों और अराखों ने इस पर बोलबाला किया और आसपास के गाँव जल्द से जल्द बन गए। यह भी कहा जाता है कि पासियों की यहाँ टकसाल है और उनके सिक्के कभी-कभी मिले हैं, जहाँ से इस शहर ने खोंटा शहर या खराब पैसों के शहर का नाम हासिल किया। हालाँकि, कुछ भी निश्चित नहीं है, लेकिन यह अकबर के समय तक उस स्थान के रूप में जाना जाता है, जब इसे पठानों द्वारा उपनिवेशित किया गया था। मुसलमानों के कब्जे में अनिश्चितता की तारीख, लेकिन यह सुझाव दिया गया है कि मुहम्मद बख्तियार खिलजी के समय के रूप में हुआ है, जिसने 1202 में अवध पर आक्रमण किया था। शुजा-उद-दौला के समय से पहले ऐसा लगता है कि प्रमुख स्थल थे बख्तियारनगर और गढ़ी संजर खान। अपने शासनकाल के दौरान, पठान प्रोपराइटरों ने मलिहाबाद के हिस्से के रूप में, जिसे केनवाल-हर के नाम से जाना जाता है, को रोहिलखंड के अफरीदी पठान के रूप में फकीर मुहम्मद खान के रूप में जाना गया, जो कसमंडी खुर्द और सहलामऊ के दो पठान परिवारों के संस्थापक थे। मजारगंज का निर्माण मिर्जा हसन बेग ने अवध सरकार के अधिकारी के रूप में कराया था। रेलवे स्टेशन से परे अमानीगंज की दूसरी बज़ार का नाम आसिफ़-उद-दौला है, जिन्होंने रोहिल्लाओं से लड़ने के लिए अपने रास्ते का निर्माण किया था। (3)ऐसा कहा जाता है कि यह अरखों अथवा पासियों की प्रमुख सीट थी और मालिया पासी द्वारा स्थापित किया गया था, जिसके भाई सलिया ने हरदोई में संडीला की स्थापना की। इस जनजाति के शासन के तहत भी यह काफी महत्व का स्थान रहा होगा। पासी के पास यहां एक टकसाल होने की शक्ति और स्वतंत्रता थी, और आज तक उसके समय के सिक्के को कभी-कभार खोदा गया है, जिससे यह कहा जाता है कि खोंटा शाहर की मूल परंपराओं में नाम है, "बुरे पैसे का शहर।" (4)

मलीहाबाद अवध के कवि और दरबारी नवाब फकीर मोहम्मद खान 'गोया' पर गर्व करता है; "शायर-ए-इंकलाब" पद्म भूषण जोश मलीहाबादी (शब्बीर हसन खान के रूप में जन्म),जो बाद में पाकिस्तान चले गये उसके बाद अब्दुर रज्जाक मलीहाबादी, अबरार हसन खान असर मलिहाबादी, अहमद सईद मलीहाबादी अस्तित्व में आये; इसी क्रम में भास्कर मलिहाबादी जैसे महान साहित्यिक कवि जिसके पास हिंदी की गंभीर रचनात्मक शैली देखने को मिलती है। जिन्होंने महारानी दुर्गावती पर खंड काव्य लिखा है और आर्थिक कारणों वश अपना निवास ग्राम गढ़ी संजर खां से मध्यप्रदेश चले गये फिर आगे चल कर हिंदी साहित्य में नवीन युवा कवि अरुण मलिहाबादी की नवीन रचनाये आस्तित्व में है इसने मोहसिन खान जैसे कुछ महान लेखकों का भी निर्माण किया है, जिनके पास एक उल्लेखनीय लेखन शैली है। उनके उर्दू नाटक ख्वाब की ताबीर को उन्नीस भारतीय भाषाओं के प्रतिभागियों को एक रेडियो-नाटक प्रतियोगिता में प्रथम पुरस्कार से सम्मानित किया गया था।

लखनऊ जिले की तहसीलें -

  • मलिहाबाद
  • मोहनलालगंज
  • बक्शी का तालाब
  • सदर
  • सरोजनीनगर

सन्दर्भ[संपादित करें]

  1. https://www.facebook.com/mldmorcha/
  2. Sharma IAS, Vinod Chandra (1959). Uttar Pradesh District Gazetteers Vol 37 Lucknow. Lucknow: Government of Uttar Pardesh Revenue Department. पपृ॰ 28 and412. |title= में 34 स्थान पर line feed character (मदद); |publisher= में 28 स्थान पर line feed character (मदद)
  3. https://navbharattimes.indiatimes.com/metro/lucknow/other-news/historical-buildings-of-the-ruins-of-mallihabad/articleshow/60123821.cms

2 Imperial gazetter of India volume17 1908page 90

3. Lucknow gazetteer 1904 page 237&238

4. Oudh province gazetteer volume 2 1877 page427