मलयजी

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कवि मलय (१९ नवंबर १९२९), हिंदी के कवि हैं। कवि मलयजी का जन्म १९२९ में , सहसन, जिला. जबलपुर (म.प्र.) नाम के एक छोटे से गांव के एक किसान परिवार में हुआ। उनकी पहली कविताओं की किताब, 'हथेलियों का समुद्र' १९६२ में प्रकाशित हुई और बहुचर्चित रही हैं। मलयजीने प्रमुखतः पत्रकारिता की हैं । इसकेबाद अनेक नौकरियों को करते हुए , बादमे फ़ेलोशिप लेकर उन्होने पी. एच. डी. की और दिग्विजय महाविद्यालय, राजनांदगांव(छ. ग. ) में अध्यापक । जिसके बाद शासकीय आदर्श विज्ञान महाविद्यालय, जबलपुर में पढ़ाया , और शासकीय महाकौशल कला एंव वाणिज्य महाविद्यालय, जबलपुर से प्राध्यापक पद से सेवानिवृत्त हुए।

लेखन सन्दर्भ[संपादित करें]

प्रगतिशील लेखक संघ मध्यप्रदेश में सन १९८६ तक लगातार एवं सामान्यतः २००० तक पूरे मध्यप्रदेश में कविता, कहानी शिविरों का निर्देशन तथा संचालन एंव उभरती रचनात्मकता के ताजा अनुभवों से साक्षात्कार, सन १९८५ से १९९० तक 'वसुधा' के सम्पधक मंडल के सदस्य, वर्त्तमान में प्रान्तीय अध्यक्ष मंडल के सदस्य। सन १९६० में पहली बार ' कविताएँ ' ( मासिक पत्रिका) में कविताएँ प्रकाशित। आलोचनात्मक निबंध समीक्षाए और टिपणियाँ अनेक पत्रिकाओं में प्रकाशित तथा बंग्ला में कविताओं का अनुवाद।

सम्पादित कृतियाँ[संपादित करें]

  1. आंखन देखी (संपादन सहयोग)
  2. साँझ सकारे (बुंदेली लोकगीतों का संकलन),
  3. परसाई रचनावली (छह - खंड) पॉँच सम्पादकों में से एक

प्रकाशित कृतियाँ[संपादित करें]

hatheliyon ka samudra
हथेलियों का समुद्र
  • हथेलियों का समुद्र [1]
  • फैलती दरार में [2]
  • शामिल होतो हूँ [3]
  • अँधेरे दिन का सूर्य [4]
  • निर्मुक्त अधूरा आख्यान[5]
  • लिखने का नक्षत्र [6]
  • काल घूरता हैं [7]
  • देखते न देखते [8]
  • इच्छा की दूब [9]
  • असंभव की आंच[10]
  • कवि ने कहा [11]
  • खेत में
  • समय के रंग
  • व्यंग का सौन्दर्य-शास्त्र
  • सदी का व्यंग्य विमर्श (आलोचना)
  • जीता हूँ सूरज की तरह[12]

पुरस्कार सम्मान[संपादित करें]

अखिल भारतीय भवानी मिश्र कृति पुरस्कार (2000), मध्य प्रदेश साहित्य परिषद् भोपाल

सप्तऋषि सम्मान : पवई जबलपुर (१९९७)

भवभूति-अलंकरण, मध्यप्रदेश साहित्य सम्मेलन भोपाल (२००२)

चंद्रावती शुक्ल पुरस्कार: आचार्य रामचंद्र शुक्ल शोध संस्थान, वाराणसी (यु. पी.)(2003)

हरीशंकर परसाई सम्मान, जमानी, होशंगाबाद, (म.पी.)

प्रमुख कविता रचनाएँ[संपादित करें]

गरजता आता हूँ, कुछ, कोसो दूर रहकर भी, इंतज़ार में अकेला?, मौत पैदा हुई, देखते न देखते, निकलते हैं दिन, सुना जा सकता हैं , दूर नहीं, खुले मैदान में, सवाल ही सवाल, धड़कन की धुन में , उठता हूँ, जीवन, धुआँ, कलापो में , पानी की पारदर्शिता में, नागरिकता फुग्गेसी, क्रोधित तारों सी, त्रासदी, रात में दूना, अभीतक डटे हैं, पसीना बहता हैं, और क्या करेंगे, असंख्य तारे, जलती हैं अखंड, हौसला लिए-लिए,नदी होकर रहेगी और अनेक|

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References[संपादित करें]

  1. Malay (1962). हथेलियों का समुद्र. Jabalpur: लोक चेतना प्रकाशन. पृ॰ 01.
  2. Malay (1976). फैलती दरार में. New Delhi: सरल प्रकाशन. पृ॰ 1.
  3. Malay (1992). शामिल होतो हूँ. Jabalpur: पहला प्रकाशन. पपृ॰ 4, 9–136.
  4. Kavi Malay (1995). अँधेरे दिन का सूर्य. Jabalpur: पहला प्रकाशन. पृ॰ 4.
  5. Malayji (1995). निर्मुक्त अधूरा अखियन. Jabalpur: राजेश जोशी & हरी भटनागर. पपृ॰ 1, 2, 37.
  6. Malay (2002). लिखने का नक्षत्र. Delhi, India: Radhakrishna Prakashan Pvt. Ltd. पपृ॰ 6, 7, 8. आई॰ऍस॰बी॰ऍन॰ 81-7119-799-X.
  7. Malay (2005). काल घूरता हैं. Delhi. पृ॰ 4.
  8. Malay (2007). देखते न देखते. Lucknow: Parikalpan Prakashan. पपृ॰ 1, 3, 4. आई॰ऍस॰बी॰ऍन॰ 81-89760-01-7.
  9. Malay (2011). इच्छा की दुब. Lucknow, UP, India: Parikalpana Prakashan. पपृ॰ 3, 4. आई॰ऍस॰बी॰ऍन॰ 978-81-89760-50-2.
  10. Malay (2014). असंभव की आंच. Lucknow, UP, India: Parikalpana Prakashan. पपृ॰ 3, 4. आई॰ऍस॰बी॰ऍन॰ 978-81-89760-62-5.
  11. मलय (2014). कवि ने कहा. New Delhi: Kitabghar Prakashan. पपृ॰ 7–8. आई॰ऍस॰बी॰ऍन॰ 978-93-83233-33-5.
  12. मलय (2017). जीता हूँ सूरज की तरह. New Delhi: Shilpayan Books. पपृ॰ 4, 23, 26, 150. आई॰ऍस॰बी॰ऍन॰ 978-93-84115-68-5.