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मध्य प्रदेश साहित्य परिषद

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मध्य प्रदेश साहित्य परिषद् (साहित्य अकादमी मध्य प्रदेश) की स्थापना सन् 1954 में हुई थी। यह मध्य प्रदेश राज्य में हिंदी साहित्य के प्रोत्साहन, नई रचनात्मक लेखन, आलोचनात्मकता एवं साहित्य संरक्षण हेतु स्थापित किया गया था। आरंभ में इसका मुख्यालय नागपुर में था, परंतु मध्य प्रदेश राज्य की स्थापना के बाद, सन् 1956 में यह मुख्यालय भोपाल स्थानांतरित हो गया। इस परिषद् को 'साहित्य अकादमी मध्य प्रदेश' के नाम से भी जाना जाता है।[1]

यह परिषद् अब मध्य प्रदेश सरकार की संस्कृति संचनालय के अंतर्गत कार्य करती है।[2]

कार्यक्रम

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यह परिषद् प्रारंभ से ही मध्य प्रदेश प्रांत के प्रसिद्ध साहित्यकारों की जन्म जयंती मनाता रहा है। इसके साथ ही परिषद्, साहित्य के विस्तार के लिए कई अन्य कार्य करती है। काव्य गोष्ठी एवं काव्य पाठ, साहित्य के मुद्दों पर परिचर्चा, शैक्षणिक संस्थानों में सेमिनार, सृजनात्मक कार्यशालाएं, पत्रिका का प्रकाशन, नए युवा रचनाकारों के प्रोत्साहन के लिए अनुदान, और विशिष्ट कार्यों के लिए पुरस्कार देने का कार्य, परिषद् के मुख्य कार्य हैं। [2]

प्रकाशन

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परिषद् अपने प्रकाशन विभाग से चर्चित कालजयी रचनाकारों के रचनाओं का प्रकाशन, युवा रचनाकारों की रचनाओं का प्रकाशन, एवं अप्रकाशित रचनाकारों की रचनाओं का प्रकाशन करती है। परिषद् अपनी एक पत्रिका भी निकालती है जिसका नाम 'साक्षात्कार' है। यह एक प्रतिमाह प्रकाशित होने वाली पत्रिका है। इसमें वैचारिक आलेख, सामाजिक एवं साहित्यिक मुद्दों पर साहित्यकारों के साक्षात्कार, पुस्तकों की समीक्षा एवं अन्य साहित्यिक रचना प्रकाशित होती है। अभी इस पत्रिका का संपादन कार्य, परिषद् के निदेशक डॉ विकास दवे करते हैं।[2]

पुरस्कार एवं प्रोत्साहन

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मध्य प्रदेश साहित्य परिषद् अपनी पुरस्कार योजना के तहत दो प्रकार के पुरस्कार का नियोजन करता है। प्रथम पुरस्कार प्रदेश कि ऐसे साहित्य एवं साहित्यकारों को अलंकृत किया जाता है जो राज्य की छह बोलियों बुंदेली, बघेली, मालवी, निमाड़ी, भीली और गोंडी में साहित्य रचते हैं। इस पुरस्कार की राशि 51000 होती है। दूसरा पुरस्कार हिंदी साहित्य एवं उनके साहित्यकारों को सम्मानित करने के लिए दिया जाता है। इसकी दो तरह की राशि होती है। पहला 'अखिल भारतीय पुरस्कार' जो की एक लाख रुपए का होता है। दूसरा प्रादेशिक पुरस्कार जिसमें रुपए 51000 की राशि होती है।[2]

हिंदी साहित्य में उत्कृष्ट कार्य हेतु , परिषद् 'सुभद्रा कुमारी चौहान सम्मान' रचनाकारों को प्रदान करता है।[3]

सन्दर्भ

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  1. "संस्कृति संचालनालय, भोपाल (म.प्र.)". culturemp.in. अभिगमन तिथि: 2026-05-05.
  2. 1 2 3 4 "About Us". Madhya Pradesh Sahitya Academy (अमेरिकी अंग्रेज़ी भाषा में). अभिगमन तिथि: 2026-05-05.
  3. "साहित्यकार ज्ञानरंजन का निधन, 90 साल की उम्र में ली आखिरी सांस". Jansatta. 2026-01-08. अभिगमन तिथि: 2026-05-06.