मधुर कपिला

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मधुर कपिला

मधुर कपिला (जन्म 15 अप्रैल, 1942) एक उपन्यासकार[1], पत्रकार, और हिन्दी साहित्य एवं कला की समीक्षक हैं।

प्रारंभिक जीवन[संपादित करें]

मधुर कपिला जालंधर, पंजाब में पैदा हूयी थी। वह आजकल चंडीगड़ में रहती हैं।

कैरियर[संपादित करें]

मधुर कपिला 1977 से एक स्वतंत्र पत्रकार और कला समीक्षक हैं। दैनिक ट्रिब्यून, दिनमान, पंजाब केसरी, जनसत्ता, हिंदी हिन्दुस्तान समाचार और विभिन्न साहित्यिक पत्रिकाओं जैसे हंस, वर्तमान साहित्य, वागर्थ, नया ग्यनोदए (भारतीय ज्ञानपीठ), दस्तक, इरावती, हरीगंधा, जागृति और कई और। इनमें इनकी लघु कथाएँ प्रकाशित हुईं।[2] दैनिक ट्रिब्यून में साहित्यिक कॉलम "कला क्षेत्रेया" – एक साप्ताहिक कला और साहित्य कॉलम। दैनिक ट्रिब्यून में उपन्यास सातवाँ स्वर धारावाहिक के रूप में प्रकाशित। [3]

वह तीन दशकों से चंडीगढ़ संगीत नाटक अकादमी की सदस्य हैं। उनकी कहानियाँ पंजाब विश्वविद्यालय चंडीगढ़ और कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय में कई पीएचडी और एमफिल शोध का विषय रही हैं।

मधुर कपिला की पहली कहानी 1960 में वीर प्रताप (जालंधर की अखबार) में प्रकाशित की गयी थी। उस समय से उनके तीन उपन्यास प्रकाशित हुए – भटके राही, सातवाँ स्वर और सामने का आसमान; [4][5] और तीन लघु कहानी संग्रह – बीचों बीच, तब शायद[6] और एक मुक़दमा और[7]

पुरस्कार[संपादित करें]

2011 में मधुर कपिला को हिन्दी साहित्य में उत्कृष्ट योगदान के लिए चंडीगढ़ साहित्य अकादमी पुरस्कार प्रस्तुत किया गया।[8][9]

ग्रंथ सूची[संपादित करें]

उपन्यास[संपादित करें]

  • भटके राही.
  • सातवाँ स्वर. कृति प्रकाशन. 2002. आई॰ऍस॰बी॰ऍन॰ 81-8060-066-1.
  • सामने का आसमान. भारतीय ज्ञानपीठ. 2010. आई॰ऍस॰बी॰ऍन॰ 978-81-263-2002-8.

कथा संग्रेह[संपादित करें]

इन्हें भी देखें[संपादित करें]

भारतीय साहित्य

हिंदी साहित्य

साहित्य अकादमी पुरस्कार

बाहरी कड़ियाँ[संपादित करें]

सन्दर्भ[संपादित करें]