मदनलाल ‘मधु’

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मदनलाल ‘मधु’

मदनलाल 'मधु' (२२ मई, १९२५ - ७ जुलाई, २०१४) रूस में रूसी भाषा से हिन्दी में अनुवादक के रूप में सर्वाधिक प्रसिद्ध रहे हैं। उन्होंने वहाँ 57 साल काम किया। वे कवि और लेखक भी थे।

जीवन-परिचय[संपादित करें]

पद्म श्री डॉ॰ मदनलाल मधु एक लेखक और कवि भी थे। उन्होंने एलेक्ज़ैन्डर पुश्किन से लेकर लियो टॉल्स्टॉय की कृतियों का हिन्दी में अनुवाद किया था तथा कई भारतीय कार्यों का रूसी भाषा में अनुवाद किया था। डॉ॰ मदनलाल 'मधु' को हिन्दी साहित्य और रूसी साहित्‍य के आधुनिक सेतु निर्माताओं में से एक माना जाता है। ऐसा उनके सघन अनुवादों और शब्दकोश विषयक कार्यों के कारण कहा जाता है। वे सबसे पह्रूले रूस में 1957 में आए थे। तब से वे यहीं काम करते रहे थे। मास्‍को के प्रमुख प्रकाशन-गृह प्रगति एवं रादुगा प्रकाशन में लगभग चार दशकों तक संपादक-अनुवादक के पद पर रहते हुए उन्‍होंने सौ से अधिक कालजयी रूसी पुस्‍तकों, जिनमें पुश्किन, मयाकोस्‍की, तोल्‍स्‍तोय, गोर्की, चेखव, तुर्गनेव आदि का साहित्‍य सम्मिलित है, का हिंदी अनुवाद सुलभ कराया। प्रचुर मात्रा में रूसी लोक साहित्‍य तथा बाल साहित्‍य के लेखन-संकलन के साथ-साथ उन्होंने हिंदी-रूसी-शब्‍दकोश का निर्माण कर हिंदी छात्रों के लिए रूसी-सीखने का मार्ग प्रशस्‍त किया। हिंदी के रूसी अध्‍यापकों की अनेक प्रकार से सहायता करते हुए उन्‍होंने रूसी पत्रिका के हिंदी संस्‍करण का लंबे समय तक संपादन किया। इसके अतिरिक्त वे मास्‍को रेडियो से भी जुड़े रहे।

रूस में बसे भारतियों को एकजुट करने और रूस और भारत के सांस्कृतिक सम्बंध सुधारने के लिए मधु ने हिन्दुस्तानी समाज की नीव रखी और अधिकांशतः वे ही इस समाज के अध्यक्ष रहे।

डॉ॰ मदनलाल 'मधु' का देहान्त 7 जुलाई 2015 को हुआ।[1]

प्रमुख प्रकाशित कृतियाँ[संपादित करें]

प्रमुख अनूदित कृतियाँ-
  1. युद्ध और शान्ति (चार खण्डों में) -१९८७-१९८९ (मूल लेखक- लेव तोलस्तोय, रादुगा प्रकाशन, मॉस्को से प्रकाशित एवं पीपुल्स पब्लिशिंग हाउस प्रा॰ लिमिटेड, नयी दिल्ली तथा राजस्थान पीपुल्स पब्लिशिंग हाउस प्रा॰ लि॰, जयपुर द्वारा वितरित।)
  2. आन्ना कारेनिना (मूल लेखक- लेव तोल्स्तोय; राजकमल प्रकाशन प्रा॰ लि॰, नयी दिल्ली से प्रकाशित)
  3. इंसान का नसीबा (मूल लेखक- मिखाइल शोलोख़ोव, साहित्य अकादेमी, नयी दिल्ली से प्रकाशित बीसवीं शताब्दी का साहित्य-३ में संकलित)
  4. मेरे विश्वविद्यालय (मूल लेखक- मैक्सिम गोर्की, पीपुल्स पब्लिशिंग हाउस प्रा॰ लिमिटेड, नयी दिल्ली)
  5. मेरा दग़िस्तान (मूल लेखक- रसूल हमज़ातोव, वाणी प्रकाशन, नयी दिल्ली से प्रकाशित)
मौलिक कृतियाँ-
  1. एक दो तीन
  2. ऐसे लड़के भी होते हैं
  3. अमर हैं दयालु देवता
  4. गोर्की और प्रेमचन्द : दो अमर प्रतिभाएँ (रादुगा प्रकाशन, मॉस्को से प्रकाशित एवं पीपुल्स पब्लिशिंग हाउस प्रा॰ लिमिटेड, नयी दिल्ली से वितरित)
  5. जादुई घोड़ा
  6. यादों के धुँधले-उजले चेहरे

सम्मान[संपादित करें]

हिंदी और रूसी भाषाओं में विशिष्‍ट रचनात्‍मक योगदान और अनुवाद कार्य के लिए मदनलाल मधु को पुश्किन स्‍वर्ण पदक, मैत्री पदक, स्‍वर्णाक्षर पुरस्‍कार और भारत के राष्ट्रपति द्वारा पद्मश्री से विभूषित किया गया है। प्रो. मदनलाल मधु को केंद्रीय हिंदी संस्थान द्वारा वर्ष २०१० के पद्मभूषण डॉ. मो‍टूरि सत्‍यनारायण पुरस्‍कार से सम्‍मानित किया गया है।

इन्हें भी देखें[संपादित करें]

सन्दर्भ[संपादित करें]

बाहरी कड़ियाँ[संपादित करें]