मदनलाल मधु

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मदन लाल मधु (२२ मई, १९२५ - ७ जुलाई, २०१४) को हिंदी और रूसी साहित्‍य के आधुनिक सेतु निर्माताओं में से एक हैं। ऐसा उनके सघन अनुवादों और शब्दकोश विषयक कार्यों के कारण कहा जाता है। मास्‍को के प्रमुख प्रकाशन-गृह प्रगति एवं रादुगा प्रकाशन में लगभग चार दशकों तक संपादक-अनुवादक के पद पर रहते हुए उन्‍होंने सौ से अधिक कालजयी रूसी पुस्‍तकों, जिनमें पुश्किन, मयाकोस्‍की, तोल्‍स्‍तोय, गोर्की, चेखव, तुर्गनेव आदि का साहित्‍य सम्मिलित है, का हिंदी अनुवाद सुलभ कराया। प्रचुर मात्रा में रूसी लोक साहित्‍य तथा बाल साहित्‍य के लेखन-संकलन के साथ-साथ उन्होंने हिंदी-रूसी-शब्‍दकोश का निर्माण कर हिंदी छात्रों के लिए रूसी-सीखने का मार्ग प्रशस्‍त किया। हिंदी के रूसी अध्‍यापकों की अनेक प्रकार से सहायता करते हुए उन्‍होंने रूसी पत्रिका के हिंदी संस्‍करण का लंबे समय तक संपादन किया। इसके अतिरिक्त वे मास्‍को रेडियो से भी जुड़े रहे।

सम्मान एवं पुरस्कार[संपादित करें]

हिंदी और रूसी भाषाओं में विशिष्‍ट रचनात्‍मक योगदान और अनुवाद कार्य के लिए मदनलाल मधु को पुश्किन स्‍वर्ण पदक, मैत्री पदक, स्‍वर्णाक्षर पुरस्‍कार और भारत के राष्ट्रपति द्वारा पद्मश्री से विभूषित किया गया है। प्रो. मदनलाल मधु को केंद्रीय हिंदी संस्थान द्वारा वर्ष २०१० के पद्मभूषण डॉ. मो‍टूरि सत्‍यनारायण पुरस्‍कार से सम्‍मानित किया गया है।