मथुरा परिष्करणी

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मथुरा परिष्करणी (मथुरा रिफाइनरी), उत्तर प्रदेश के मथुरा में स्थित है और इंडियनऑयल के स्वामित्व में है। इसमें बॉम्बे हाई से आने वाला कम गन्धक का कच्चा तेल, नाइजेरिया से आयातित कम गन्धक का कच्चा तेल, मध्य पूर्व से आयातित उच्च गन्धक वाला कच्चा तेल परिष्कृत किया जाता है। इसकी स्थापना १९८२ में 1982 में राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र सहित देश के उत्तर पश्चिमी क्षेत्र में पेट्रोलियम उत्पादों की मांग को पूरा करने के लिए 6.0 मि मी टन प्रति वर्ष की क्षमता के साथ शुरू किया गया था। यह परिष्करणी दिल्ली-आगरा राष्ट्रीय राजमार्ग के लगे हुए दिल्ली से लगभग 154 किलोमीटर दूरी पर स्थित है।

लगाए गए प्रमुख सेकेंडरी प्रोसेसिंग यूनिट, फ्लुडाइज़्ड केटेलिटिक क्रैकिंग यूनिट (एफसीसीयू), विस-ब्रेकर यूनिट (वीबीयू) और बिटुमन ब्लोइंग यूनिट (बीबीयू) थे। इन यूनिटों के लिए मूल तकनीक तत्कालीन यूएसएसआर, यूओपी आदि से प्राप्त की गई थी। ईआईएल की सोकर ड्रम प्रौद्योगिकी वर्ष 1993 में वीबीयू में लगाई गई थी। अनलेडेड गैसोलीन के उत्पादन के लिए, कंटीनुअस केटेलिटिक रिफार्मिंग यूनिटसुधार इकाई (सीसीआरयू) को 1998 में एक्सन्स,फ़्रांस की प्रौद्योगिकी से शुरू किया गया था। एक्सन्स, फ्रांस से लाइसेंस प्राप्त एक डीज़ल हाइड्रो डेसल्फ़राइज़ेशन यूनिट (डीएचडीएस) को 1999 में एचएसडी के उत्पादन के लिए 0.25% भार (अधिकतम) की कम सल्फर मात्रा के साथ कमीशन किया गया था। जुलाई 2000 में वन्स-थ्रू हाइड्रोक्रैकर यूनिट (शेवरॉन, यूएसए से लाइसेंस प्राप्त) की कमीशनिंग के साथ, मथुरा रिफाइनरी की क्षमता 8.0 मि मी टन प्रति वर्ष तक बढ़ी थी।

डीज़ल हाइड्रो-ट्रीटिंग यूनिट (डीएचडीटी) और एमएस गुणवत्ता उन्नयन यूनिट (एमएससीयू) को 2005 में यूरो-III ग्रेड एचएसडी और एमएस के उत्पादन के लिए क्रमशः एक्सिस और यूओपी की विश्व स्तरीय प्रौद्योगिकी के साथ स्थापित किया गया था। भारत सरकार की ऑटो ईंधन नीति के अनुसार 1 अप्रैल 2005 से एफसीसी गैसोलीन डिसल्फ़राइज़ेशन (एफसीसीजीडीएस) और सिलेक्टिव हाइड्रोजनीकरण यूनिट (एसएचयू) के लिए परियोजना, एक्सन्स, फ्रांस की प्राइम-जी तकनीक को फरवरी 2010 में शुरू किया गया था और यूरो-IV ग्रेड एमएस और एचएसडी की आपूर्ति फरवरी 2010 से निरंतर आधार पर शुरू हुई थी।

मथुरा रिफाइनरी का अपना कैप्टिव पावर प्लांट है, जिसे पर्यावरण का ध्यान रखने के लिए ईंधन के रूप में प्राकृतिक गैस (एनजी) का उपयोग करके 1997 से 2005 तक तीन गैस टर्बाइन (जीटी) और हीट रिकवरी स्टीम जेनरेटर (एचआरएसजी) को चरणों में कमीशन करके बढ़ाया गया था। ।

पर्यावरण मानकों को अपग्रेड करने के लिए, वर्ष 1999 में 99.9% रिकवरी के साथ पुराने सल्फर रिकवरी यूनिटों के स्थान पर नए सल्फ़र रिकवरी यूनिट(एसआरयू) लगाए गए थे। एक हॉट स्टैंडबाय के रूप में अतिरिक्त सल्फर रिकवरी यूनिट कार्यान्वित किया जा रहा है। पर्यावरण और पुरातात्विक स्थलों के प्रति अपनी सरोकार के इरादे से 1982 में रिफ़ाइनरी को चालू करने से पहले कार्यक्षेत्र से काफी दूर मथुरा रिफ़ाइनरी ने भी चार परिवेशी वायु निगरानी स्टेशनों की स्थापना की थी। आलीशान आश्चर्य ताजमहल के करीब स्थित होने के कारण स्वच्छ वातावरण को बनाए रखने की दिशा में इसकी ज़िम्मेदारी बढ़ जाती है।

मथुरा रिफ़ाइनरी ने रिफ़ाइनरी और टाउनशिप सहित आस-पास के क्षेत्रों में 1,67,000 पेड़ लगाए हैं और ताजमहल के आस-पास आगरा क्षेत्र में 1,15,000 पेड़ लगाए हैं। पारिस्थितिकीय पार्क जो 4.45 एकड़ में फैला हुआ है, विशाल रिफ़ाइनरी के मध्य एक हरा-भरा रमणीय स्थल है।

मथुरा रिफाइनरी में, उत्पाद गुणवत्ता उन्नयन, ऊर्जा संरक्षण और पर्यावरण संरक्षण के निरंतर प्रयास के साथ प्रौद्योगिकी गुणवत्ता और पारिस्थितिकी साथ-साथ चलते हैं। मथुरा रिफ़ाइनरी 1996 में पर्यावरण प्रबंधन प्रणाली के लिए प्रतिष्ठित आईएसओ -14001 प्रमाणन प्राप्त करने वाली एशिया में पहली और दुनिया में तीसरी है। यह 1998 में सुरक्षा प्रबंधन के लिए ओएचएसएमएस प्रमाणन प्राप्त करने वाली भी विश्व में पहली है।