मणिपुर वेद विद्यापीठ चारहजारे

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वेदों का पुनरुत्थान, संरक्षण और नई पीढ़ी में संक्रमण करने हेतु गोविन्ददेव गिरिजी महाराज ने सन् 1990 में " महर्षि वेदव्यास प्रतिष्ठान " का निर्माण किया। उनकी सत्प्रेरणा व आशीर्वाद से इस प्रतिष्ठान द्वारा अब तक 26 वेद विद्यालयों की स्थापना देश के विभिन्न प्रांतों में संभव हुई। भारत गत अनेक वर्षों से सीमावर्ती प्रदेश में परकीय आक्रमण के संकट से जूझ रहा है। चाहे वह जम्मू-कश्मीर हो , जहाँ पाकिस्तान आक्रमण कर रहा है , या पूर्वांचल के प्रान्त हों , जहाँ पग पग पर चीन के आक्रमण का संकट प्रतिक्षण मंडरा रहा है। एक ओर पाश्चात्य संस्कृति का बढता हुआ प्रभाव , तो दूसरी ओर सीमावर्ती भूमि की उपेक्षा के कारण उसका भारत से टूटने का भय। ऐसी स्थिति में परमपवित्र वेदमंत्रों की तरंगों से वहाँ का वायुमंडल अभिमंत्रित हुआ तो सनातन हिन्दू धर्म की आस्था वहाँ के जनमानस में पुनः प्रस्थापित होगी , सीमाएं सुरक्षित होंगी और हमारा राष्ट्र अक्षुण्ण रहेगा - इस दूरदृष्टि से स्वामी जी ने जम्मू में सन् 2008 में वेद विद्यालय का आरंभ किया। इसी की अगली कड़ी में भारत के पूर्वांचल के मणिपुर राज्य में सन् 2012 में मणिपुर वेद विद्यापीठ का गठन हुआ।

मणिपुर - पूर्वांचल का एक राज्य जो उत्तर दिशा से नागालैंड , दक्षिण से मिजोरम , पश्चिम से असम और पूर्व से ब्रम्हदेश (म्यानमार) से जुड़ा हुआ है। कुदरत की हरियाली से भरपूर मणिपुर की भूमि, एक ओर हिमालय की चोटियाँ तो दूसरी ओर हरी-भरी घुमावदार घाटियों से मंडित है। यहाँ का जनमानस चैतन्य महाप्रभु द्वारा प्रसारित कृष्ण भक्ति से भरा हुआ है। मणिपुर राज्य की राजधानी इम्फाल के निकट , प्रस्तावित एशियाई महामार्ग पर स्थित , चारहजारे गाँव में गठित वेद विद्यालय में 22 ऋषिकुमार पूर्णत: वैदिक परम्परा व वातावरण में निःशुल्क वेदाध्ययन कर रहे हैं

इस विद्यालय में दो आचार्य द्वारा वेदाध्ययन कराया जा रहा है। आचार्य श्री हेमंत अधिकारी एवं आचार्य श्री हेमलाल नेपाल। आचार्य हेमंत अधिकारी यहाँ के प्रधान अध्यपक के रूप में कार्य कर रहे हैं , और इन के सहयोगी के रूप में आचार्य हेमलाल जी अध्यपन कर रहे है।

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