मट्ठा प्रोटीन

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एक स्वास्थ्य-आहार की दुकान पर बेचे जा रहे मट्ठा प्रोटीन के डिब्बे.

मट्ठा प्रोटीन, मट्ठा से पृथक गोलाकार प्रोटीन का एक मिश्रण, पनीर उत्पादन के उपोत्पादन के रूप में तैयार तरल पदार्थ है। कृन्तकों के कुछ पूर्व-नैदानिक अध्ययनों ने सुझाया है कि मट्ठा प्रोटीन, ग्लूटाथिऑन के उत्पादन को प्रभावित कर सकते हैं और यह शोथरोधी या कैंसररोधी गुणों से युक्त हो सकते हैं; लेकिन, मानव आंकडे उपलब्ध नहीं है।[1][2] मानव स्वास्थ्य पर मट्ठा प्रोटीन का प्रभाव काफ़ी दिलचस्प हैं और रोगों के जोखिम को घटाने, या कई रोगों के पूरक उपचार के तौर पर, इस प्रोटीन मिश्रण की जांच की जा रही है।[3] मट्ठा प्रोटीन का सामान्यतः आहार अनुपूरक के रूप में विपणन और अंतर्ग्रहण किया जाता है और वैकल्पिक चिकित्सा समुदाय में इसको विभिन्न स्वास्थ्य दावों का श्रेय दिया जाता है।[4] हालांकि कुछ दुग्ध एलर्जी के लिए मट्ठा प्रोटीन जिम्मेदार है, पर दूध में प्रमुख प्रत्यूर्जक कैसीन रहे हैं।[5][6]

उत्पादन[संपादित करें]

जब दूध जम जाता है, तो मट्ठा अवशिष्ट रहता है और दूध से घुलनशील सभी तत्व इसमें शामिल होते हैं। यह कुछ खनिजों और दुग्धान्नसार के साथ पानी में दुग्धशर्करा का 5 प्रतिशत घोल है।[7][8] पनीर संसाधित करने के बाद इसे हटा दिया जाता है। वसा को हटा देते हैं और फिर मानव खाद्य-पदार्थों के लिए संसाधित किया जाता है।[8] प्रसंस्करण केवल सुखा कर किया जा सकता है, या वसाभ और अन्य ग़ैर प्रोटीन पदार्थों को हटा कर प्रोटीन की मात्रा बढ़ाई जा सकती है।[9] उदाहरण के लिए, झिल्ली को छानने के बाद स्प्रे शुष्कन, मट्ठे से प्रोटीन को अलग करती है।[10]

मट्ठे को ताप द्वारा विकृत किया जा सकता है। उच्च ताप (जैसे निर्जीवीकरण प्रक्रिया से जुड़ा सतत 72 डिग्री सेल्सियस (160 डिग्री फ़ारेनहाइट) से अधिक उच्च तापमान) मट्ठा प्रोटीन को विकृत करता है। जबकि देसी मट्ठा प्रोटीन जामन या दूध के अम्लीकरण पर एकत्र नहीं होता है, मट्ठा प्रोटीन की विकृति अन्य प्रोटीनों के साथ मिल कर जलांतक पारस्परिक क्रिया को प्रवर्तित और प्रोटीन लप्सी का निर्माण करती है।[9] कुछ लोगों को ताप से विकृत मट्ठे से एलर्जी हो सकती है।[11]

अन्य डेयरी उत्पादों की तुलना में मट्ठे की क़ीमत 25-40% कम होती है, लेकिन पनीर उद्योग में उत्पादन की समस्याओं के कारण, मट्ठे का इस्तेमाल प्रायः उतना नहीं किया जाता, जितना कि हो सकता है।[12]

संरचना[संपादित करें]

मट्ठा प्रोटीन, मट्ठे से अलग किए हुए गोलाकार प्रोटीन का संग्रह है, जो गाय के दूध से निर्मित पनीर का एक उपोत्पाद है। प्ररूपतः यह बीटा-लैक्टोग्लॉब्युलिन (~ 65%), अल्फ़ा-लैक्टालब्युमिन(~ 25%) और सीरम अलब्युमिन (~ 8%) का मिश्रण है, जो pH से स्वतंत्र, अपने मूल रूप में घुलनशील है। मट्ठे में प्रोटीन अंश (मट्ठे के भीतर कुल सूखे ठोस का लगभग 10%) में प्रमुख प्रोटीन के चार भाग और छोटे प्रोटीन के छह भाग शामिल हैं। मट्ठे के प्रमुख प्रोटीन अंश हैं, बीटा लैक्टोग्लॉब्युलिन, अल्फ़ा-लैक्टालब्युमिन, गोजातीय सीरम अलब्युमिन और प्रतिरक्षक-ग्लॉब्युलिन.[13]

प्रमुख रूप[संपादित करें]

मट्ठा प्रोटीन आम तौर पर तीन प्रमुख रूपों में मिलता है: सांद्र, वियुक्त और जलापघटितघोल.

  • सांद्र में वसा और कोलेस्ट्रॉल का स्तर कम होता है, लेकिन सामान्य तौर पर, जैवसक्रिय यौगिक और दुग्धशर्करा के रूप में कार्बोहाइड्रेट का उच्च स्तर होता है - वे 29%-89% वज़न के प्रोटीन होते हैं।
  • वसा तथा दुग्धशर्करा को हटाने के लिए वियुक्त का संसाधन किया जाता है, लेकिन आम तौर पर जैवसक्रिय यौगिकों में ये कम होते हैं - वे 90%+ वजन के प्रोटीन होते हैं। स्वाद में ये दोनों प्रकार, किंचित् दुधिया होते हैं।
  • जलापघटितघोल पाचनपूर्व, आंशिक रूप से जलापघटित मट्ठा प्रोटीन हैं, जिसके परिणामस्वरूप, अधिक आसानी से अवशोषित हो जाते हैं, लेकिन आम तौर पर उनकी क़ीमत अधिक होती है।[9] अधिक-जलापघटित मट्ठा, मट्ठे के अन्य रूपों से कम प्रतिजनक हो सकता है।[11] वे स्वाद में बहुत कड़वे होते हैं।

स्वास्थ्य प्रभाव[संपादित करें]

अमीनो अम्ल के एक स्रोत के रूप में मट्ठा प्रोटीन का उपयोग और हृदय रोग तथा कैंसर जैसे रोगों के जोखिम को कम करने में उसके प्रभाव पर चालू अनुसंधान का ध्यान केंद्रित है।[3] मट्ठा, अमीनो अम्ल (BCAAs) की शाखित श्रृंखला का स्रोत है, जो सक्रिय मांसपेशियों और प्रोटीन संश्लेषण को उत्तेजित करने के लिए प्रयुक्त होते हैं।[14] मट्ठा में BCAAs की उच्च मात्रा होती है[15]. विशेष रूप से, प्रोटीन संश्लेषण को भड़काने वाले नक़ली मार्ग को शुरू करने में ल्यूसिन महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।[16] जब अधिक मात्रा में ल्यूसिन का अंतर्ग्रहण होता है, जैसे कि मट्ठा प्रोटीन पूरकता के साथ, तब प्रोटीन संश्लेषण अधिक उत्तेजित होता है, जिससे स्वास्थ्य-लाभ और तनाव (कसरत) के प्रति अनुकूलन में तेजी आती है।[17]

मट्ठा प्रोटीन में अमीनो अम्ल सिस्टीन होता है, जिसका उपयोग ग्लूटाथैऑन तैयार करने के लिए किया जा सकता है। बहरहाल, ग्लूटाथैऑन के संश्लेषण के लिए यह अमिनो अम्ल ज़रूरी नहीं है और कुछ अध्ययनों ने सुझाव दिया है कि आहार में सिस्टीन की मात्रा का ग्लूटाथैऑन संश्लेषण पर काफ़ी कम असर होता है।[18] तथापि, एक अन्य अध्ययन में सुझाव दिया गया है कि मट्ठा प्रोटीन की बड़ी मात्रा से कोशिकीय ग्लूटाथैऑन स्तर बढ़ सकते हैं।[19] ग्लूटाथैऑन एक प्रतिउपचायक है, जो मुक्त कणों से नुक्सान और कुछ विषाक्त पदार्थों से शरीर की रक्षा करता है और जानवरों के अध्ययनों ने सुझाव दिया है कि दुग्ध प्रोटीन से कैंसर का ख़तरा कम हो सकता है।[20]

सन्दर्भ[संपादित करें]

  1. Hakkak R, Korourian S, Ronis MJ, Johnston JM, Badger TM (2001). "Dietary whey protein protects against azoxymethane-induced colon tumors in male rats". Cancer Epidemiol. Biomarkers Prev. 10 (5): 555–8. PMID 11352868. नामालूम प्राचल |month= की उपेक्षा की गयी (मदद)
  2. Xiao R, Carter JA, Linz AL, Ferguson M, Badger TM, Simmen FA (2006). "Dietary whey protein lowers serum C-peptide concentration and duodenal SREBP-1c mRNA abundance, and reduces occurrence of duodenal tumors and colon aberrant crypt foci in azoxymethane-treated male rats". J. Nutr. Biochem. 17 (9): 626–34. PMID 16504496. डीओआइ:10.1016/j.jnutbio.2005.11.008. नामालूम प्राचल |month= की उपेक्षा की गयी (मदद)
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बाहरी कड़ियाँ[संपादित करें]