मछभाला
मछभाला या हारपून (अंग्रेज़ी: Harpoon) एक लंबा, भाले के आकार का उपकरण और हथियार है जिसका उपयोग मुख्य रूप से समुद्री जानवरों, जैसे कि बड़ी मछलियों, सील और व्हेल का शिकार करने के लिए किया जाता है। एक सामान्य भाले और मछभाले के बीच सबसे बड़ा तकनीकी अंतर इसके सिरे का डिज़ाइन है। मछभाले के सिरे पर पीछे की ओर मुड़े हुए कांटे होते हैं, जो यह सुनिश्चित करते हैं कि एक बार शिकार के शरीर में घुसने के बाद हथियार आसानी से बाहर न निकल सके। इसके अलावा, इसके पिछले हिस्से से एक लंबी मजबूत रस्सी बंधी होती है, जिससे शिकारी जानवर को अपनी नाव की ओर खींच सकता है।[1][2]
इतिहास और प्रागैतिहासिक उत्पत्ति
[संपादित करें]मछभाले का आविष्कार मानव इतिहास की सबसे महत्वपूर्ण तकनीकी सफलताओं में से एक माना जाता है। इसके सबसे पुराने पुरातात्विक साक्ष्य अफ़्रीका के कांगो क्षेत्र में स्थित 'कटांडा' से मिले हैं। यहाँ पाई गई जानवरों की हड्डियों से बनी मछभाले की नोक लगभग 90,000 वर्ष पुरानी (मध्य पुरापाषाण काल) मानी जाती है।[3]
हिमयुग के दौरान और उसके बाद, आर्कटिक क्षेत्र के इनुइट और अन्य स्वदेशी जनजातियों ने वालरस और सील के शिकार के लिए हड्डी और लकड़ी से बने जटिल मछभालों का निर्माण किया। इन शुरुआती डिज़ाइनों ने मानव को गहरे पानी के बड़े जानवरों का शिकार करने में सक्षम बनाया, जिससे उनके अस्तित्व और आहार में एक बड़ी क्रांति आई।[4][5]
तकनीकी विकास और 'टॉगल आयरन'
[संपादित करें]19वीं शताब्दी के मध्य तक, मछभाले का डिज़ाइन काफी हद तक पारंपरिक ही रहा। लेकिन व्हेल के शिकार के व्यावसायिक उदय ने इसके डिज़ाइन में बड़े बदलाव की मांग की।
- दोहरे कांटे वाला हारपून: 18वीं शताब्दी में लोहे से बने ऐसे हारपून आम थे, जिनमें तीर के समान दो कांटे होते थे। हालांकि, कई बार शक्तिशाली व्हेल के संघर्ष करने पर ये कांटे शरीर का मांस फाड़कर बाहर आ जाते थे।
- टॉगल आयरन: 1848 में, अमेरिकी आविष्कारक लुईस टेम्पल ने हारपून के डिज़ाइन में एक क्रांतिकारी बदलाव किया। उन्होंने 'टॉगल आयरन' का आविष्कार किया, जिसका सिर एक धुरी पर घूम सकता था। जब यह व्हेल के शरीर में घुसता था और रस्सी खींची जाती थी, तो इसका सिर शरीर के अंदर क्षैतिज रूप से घूम जाता था (एक 'T' आकार में), जिससे इसका बाहर निकलना लगभग असंभव हो जाता था। इस एक आविष्कार ने व्हेल शिकार उद्योग की सफलता दर को दोगुना कर दिया।[6]
आधुनिक युग: 'विस्फोटक हारपून'
[संपादित करें]1860 के दशक में, नॉर्वे के एक नाविक और आविष्कारक स्वेन्ड फॉयन ने आधुनिक व्हेल शिकार की नींव रखी। उन्होंने विस्फोटक हारपून का आविष्कार किया, जिसे हाथ से फेंकने के बजाय जहाज़ पर लगी एक भारी तोप के माध्यम से दागा जाता था।
इस आधुनिक हारपून के सिरे पर एक विस्फोटक ग्रेनेड लगा होता था। जब हारपून व्हेल के शरीर में गहराई तक प्रवेश करता था, तो एक टाइम-डिले फ़्यूज़ विस्फोट कर देता था, जिससे जानवर की तुरंत मृत्यु हो जाती थी। इस तकनीक ने नीली व्हेल और फिन व्हेल जैसे सबसे बड़े और सबसे तेज़ समुद्री जीवों का शिकार भी संभव बना दिया, जिन्हें पहले छोटे जहाजों से पकड़ना असंभव था।[7]
वर्तमान उपयोग और संरक्षण
[संपादित करें]आज के समय में, बड़े पैमाने पर व्यावसायिक व्हेल शिकार पर अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर प्रतिबंध लगा दिया गया है, जिसे 'अंतर्राष्ट्रीय व्हेलिंग आयोग' द्वारा लागू किया जाता है। हालाँकि, आज भी कुछ देशों (जैसे जापान, नॉर्वे और आइसलैंड) में और स्वदेशी जनजातियों द्वारा पारंपरिक निर्वाह शिकार में मछभाले का उपयोग किया जाता है। इसके अलावा, गोताखोरों द्वारा पानी के नीचे शिकार के लिए इस्तेमाल की जाने वाली 'स्पीयरगन' भी मछभाले का ही एक आधुनिक और कॉम्पैक्ट रूप है।[8]
सन्दर्भ
[संपादित करें]- ↑ Kurlansky, Mark (1997). Cod: A Biography of the Fish that Changed the World. Penguin Books. pp. 34-38. ISBN 978-0140275018.
- ↑ "Inuit Harpoon Use"[मृत कड़ियाँ]
- ↑ "Inuit harpoon head"
- ↑ Yellen, John E. (1995). "A Middle Stone Age worked bone industry from Katanda, Upper Semliki Valley, Zaire". Science. 268 (5210): 553–556.
- ↑ Nature of Paleolithic Art.
- ↑ Dolin, Eric Jay (2007). Leviathan: The History of Whaling in America. W. W. Norton & Company. pp. 210-215. ISBN 978-0393060577.
- ↑ Tonnessen, J. N.; Johnsen, A. O. (1982). The History of Modern Whaling. University of California Press. pp. 25-30. ISBN 978-0520039735.
- ↑ Ellis, Richard (1991). Men and Whales. Knopf. pp. 450-455. ISBN 978-0394558392.
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