मंडावर

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मंडावर, राजस्थान प्रान्त के दौसा जिले की महवा तहसील में स्थित है। यह अरावली की सुंदर पाहाड़ियो से घिरा हुआ एक प्राचीन ऐतिहासिक ग्राम है। यह अलवर एवं दौसा जिले की सीमा बनाता है। यह् विश्वप्रसिद्ध सरिस्का बाघ अभयारण्य के निकट है। यह जयपुर-आगरा लिंक रेलपथ का प्रमुख ब्रिटिशकालीन रेल स्टेशन है जो उत्तर-पश्चिम रेलवे के प्रमुख बांदीकुई जंक्शन के निकट अवस्थित है। मंडावर राजस्थान प्रांत के अग्रणी ग्रामों में से एक है। इसमे सभी जाति व धर्म (हिन्दू, मुस्लिम, जैन व बाहर से आए सिक्ख धर्म ) के लोग आपसी भाईचारे से निवास करते हैं। इसमे विशाल अनाज मंडी स्थित है जिसमे बाँदीकुई साइड से निहालपुरा तक के किसान अपने जिन्स को बेचने के लिए आते हैं। मंडावर की जयपुर से रेलमार्ग की दुरी 117 किमी हैं विकास सैण्टल स्कूल ने शिक्षा के लिए अथक प्रयास किए हैं व सम्पत डीजे साउण्ड ने सगींत के क्षेत्र में अपना महत्वपूर्ण योगदान दिया यहाँ एक सेठी पेट्रोल पंप है जिससे लोडिंग वाहनों को सुविधा मिलती है

इतिहास[संपादित करें]

मंडावर एक ऐतिहासिक ग्राम है जिसके प्रमाण यह अपने चारों ओर समेटे हुए हैं। वैसे तो मंडावर का इतिहास मुख्य रूप से मुगल काल से जाना जाता है। लेकिन इसका सीधा सम्बन्ध संत निगु॔ण जी से है। जिन्होने निगु॔ण पंथ की स्थापना की, संत निगु॔ण ने यही पर तप किया और समाधी ली, मंडावरकी तपोभूमि में निगु॔ण जी ने अपने प्रसिद दिव्य ग्रंथ अमर कथा की रचना की जिसके इकलोते कथा वाचक मंड़ावर के प्रसिद दिवगंत पंडित चंडिका प्रसाद वशिष्ट थे। इतिहास में पहला ज़िक्र मंडावर का मुगल काल के समय से माना जाता है, जब तत्कालीन मुगल बादशाह औरंगजेब ने राजस्थान की जयपुर रियासत पर किसी कारणवश आक्रमण के आदेश दे दिये, तब तत्कालीन जयपुर महाराज जयसिंह घबरा गये तब अपने राजपुरोहित की सलाह पर महाराज जयसिंह संत निगु॔ण जी की शरण में मंडावर आये निगु॔ण जी ने महाराज जयसिंह को निभ॔य होकर जयपुर जाने को कहा। संत निगु॔ण जी की कृपा से शाही सेना जो करीरी की घाटी [करोली] में ठहरी हुयी थी देवीय प्रकोप से आगे नहीं जा सकी, तब संत निगु॔ण जी की प्रसिद्दी सुनकर शाही सेना के मुख्य अधिकारी संत निगु॔ण जी की शरण में मंडावर आये संत निगु॔ण जी ने शाही सेना के मुख्य अधिकारी को जयपुर रियासत पर आक्रमण न करने के आदेश दिये एवं यह आदेश मुगल बादशाह औरंगजेब को कहने को कहा मुगल बादशाह औरंगजेब ने घबराकर जयपुर रियासत पर आक्रमण करने के आदेश वापस ले लिये। इस घटना के बाद रियासत के महाराज जयसिंह संत निगु॔ण जी का आभार प्रकट करने मंडावर आये उस समय मंडावर जयपुर रियासत का प्रमुख ग्राम होगया। ब्रिटीश काल में मंडावर खालसा ग्राम था। जब पूरा देश ब्रिटीश शासन के खिलाफ खड़ा था।