मंगला नार्लीकर

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मंगला नार्लीकर
जन्म मंगला राजवड़े
बॉम्बे, भारत
शिक्षा प्राप्त की मुंबई विश्वविद्यालय
व्यवसाय गणितज्ञ
जीवनसाथी जयंत नार्लीकर
बच्चे तीन बेटियाँ

मंगला नार्लीकर एक भारतीय गणितज्ञ हैं जिन्होंने उन्नत गणित और सरल अंकगणित दोनों में कार्य किया है। गणित में अपनी डिग्री के बाद, उन्होंने शुरू में मुंबई में टाटा इंस्टीट्यूट ऑफ फंडामेंटल रिसर्च (TIFR) में कार्य किया और बाद में बॉम्बे और पुणे विश्वविद्यालय में व्याख्याता के रूप में कार्य किया था।[1] उन्होंने गणित से संबंधित विषयों पर अंग्रेजी और मराठी दोनों भाषाओं में कई किताबें और लेख लिखे हैं। उन्हें २००२ अपनी मराठी पुस्तक गार्गी अजून जिवंत आहे के लिए विश्वनाथ पार्वती गोखले पुरस्कार से भी सम्मानित किया गया है।[2]

जीवनी[संपादित करें]

नार्लीकर ने मुंबई विश्वविद्यालय से अध्ययन किया और १९६२ में बीए (मैथ्स) की डिग्री प्राप्त की और १९६४ में एमए (मैथ्स) में प्रथम रैंक के साथ चांसलर का स्वर्ण पदक भी जीता।[1][3] उन्होंने १९६६ में प्रसिद्ध ब्रह्मांड विज्ञानी और भौतिक विज्ञानी जयंत नार्लीकर से विवाह किया। उनकी तीन बेटियाँ हैं, गीता, गिरिजा और लीलावती, जिनमें से सभी ने विज्ञान में करियर बनाया है; गीता कैलिफोर्निया विश्वविद्यालय, सैन फ्रांसिस्को में जैव रसायन की प्रोफेसर हैं और अन्य दो कंप्यूटर विज्ञानी में हैं।[4][5]

१९६४ से १९६६ तक नार्लीकर ने टाटा इंस्टीट्यूट ऑफ फंडामेंटल रिसर्च, मुंबई के स्कूल ऑफ मैथमेटिक्स में एक शोध छात्र और अनुसंधान सहयोगी के रूप में कार्य किया है।[1][6] १९६७ से १९६९ तक उन्होंने कैम्ब्रिज विश्वविद्यालय में स्नातक स्कूल में पढ़ाने का कार्य किया तो १९७४ से १९८० तक उन्होंने फिर से टाटा इंस्टीट्यूट ऑफ फंडामेंटल रिसर्च के गणित के स्कूल में कार्य किया। उन्होंने अपनी पीएच.डी. की उपाधि शादी के १६ साल बाद, बॉम्बे विश्वविद्यालय से गणित में प्राप्त की थी।[3] डॉक्टरेट की उपाधि प्राप्त करने के बाद, उन्होंने १९८२-१९८५ तक स्कूल ऑफ मैथेमेटिक्स में पूल अधिकारी के रूप में टीआईएफआर के साथ काम करना जारी रखा। १९८२ से १९८५ तक उनका अध्यापन कार्य बॉम्बे विश्वविद्यालय में गणित विभाग में एम फिल वर्ग के लिए था। उन्होंने १९८९ से २००२ तक पुणे विश्वविद्यालय के गणित विभाग में भी कार्यरत रहीं।

नार्लीकर की रुचि के मुख्य क्षेत्र वास्तविक और जटिल विश्लेषण, विश्लेषणात्मक ज्यामिति, संख्या सिद्धांत, बीजगणित और टोपोलॉजी हैं।

सन्दर्भ[संपादित करें]

  1. "E-learning in Mathematics at Undergraduate and Postgraduate Level". Bhaskaracharya Pratishthana. मूल से 20 अप्रैल 2014 को पुरालेखित. अभिगमन तिथि 1 November 2015.
  2. "Gargi Ajun Jeevant Aahe - गार्गी अजून जिवंत आहे" (Marathi में). Online Book Store India indy.co.in. मूल से 4 अगस्त 2016 को पुरालेखित. अभिगमन तिथि 1 November 2015.सीएस1 रखरखाव: नामालूम भाषा (link)
  3. Chengalvarayan & Gokilvani 2007, पृ॰ 110.
  4. "Living Legends in Indian Science Jayant Vishnu Narlikar" (PDF). Current Science. मूल से 23 सितंबर 2015 को पुरालेखित (PDF). अभिगमन तिथि 1 November 2015.
  5. "Mangala Narlikar: The Journey of an Informal Mathematician: Academic Featured Biographies". Brainprick. 9 July 2012. मूल से 21 नवंबर 2015 को पुरालेखित. अभिगमन तिथि 1 November 2015.
  6. "Indian Women In Science". American Chemical Society. मूल से 4 मार्च 2016 को पुरालेखित. अभिगमन तिथि 1 November 2015.