भ्राजक पित्‍त

मुक्त ज्ञानकोश विकिपीडिया से
Jump to navigation Jump to search

भ्राजक पित हमारी त्वचा में रहता है ।

भ्राजक पित्‍त[संपादित करें]

यह चमडे मे रहता है और कान्ति उत्‍पन्‍न करता है। त्‍वचा के समस्‍त रोग और व्‍याधियां इसी पित्‍त की विकृति से होती हैं। शरीर मे किये गये लेप, मालिश, औषधि स्‍नान आदि के पाचन कार्य यही पित्‍त करता है।

[[श्रेणी:आयुर्वेद]