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भूतापीय ऊर्जा

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क्राफला, आइसलैंड में एक भूतापीय विद्युत स्टेशन
भूतापीय विद्युत परियोजनाएं स्थापित या विकसित करने वाले देश

भूतापीय ऊर्जा को स्थायी और नवीकरणीय ऊर्जा का स्रोत माना जाता है क्योंकि धरती की ऊष्मा के सापेक्ष इसका निष्कर्षण बहुत कम होता है। भूतापीय विद्युत संयंत्रों से निकलने वाले हरीत गृह गैसों का उत्सर्जन केवल 45 ग्राम CO₂ प्रति किलोवाट-घंटा होता है, जो पारंपरिक कोयला-आधारित संयंत्रों के उत्सर्जन का लगभग पाँच प्रतिशत ही है। यही कारण है कि भूतापीय ऊर्जा पर्यावरणके लिए अपेक्षाकृत सुरक्षित और सतत विकल्प मानी जाती है।[1][2]

20वीं सदी में बिजली की बढ़ती मांग के कारण भूतापीय ऊर्जा को उत्पादन का स्रोत माना जाने लगा। 4 जुलाई 1904 को प्रिंस पिएरो गिनोरी कोंटी ने इटली के लार्डेरेलो में पहला भूतापीय ऊर्जा संयंत्र सफलतापूर्वक परीक्षण किया, इस परीक्षण में उत्पन्न हुई ऊर्जा द्वारा चार बल्ब जल उठे। इसके बाद, 1911 में वहीं दुनिया का पहला वाणिज्यिक भूतापीय बिजलीघर स्थापित हुआ। सन् 1920 के दशक में जापान के बेप्पू और कैलिफ़ोर्निया के प्रयोगशाला में प्रायोगिक तौर पर जनरेटर बनाए गए, लेकिन 1958 तक इटली ही दुनिया का एकमात्र औद्योगिक भूतापीय बिजली उत्पादक देश बना रहा।

भूतापीय विद्युत संयंत्र सामान्य भाप टरबाइन तापीय संयंत्रों के समान कार्य करते हैं। इसमें पृथ्वी की गर्मी से पानी या किसी अन्य कार्यशील तरल को गर्म किया जाता है। यह गर्म तरल टरबाइन घुमाकर जनरेटर को चलाता है और बिजली उत्पन्न होती है। बाद में तरल को ठंडा कर पुनः ऊष्मा स्रोत में भेज दिया जाता है। भूतापीय ऊर्जा उत्पादन के प्रमुख प्रकार हैं:

  1. शुष्क भाप बिजलीघर
  2. फ्लैश स्टीम पावर स्टेशन
  3. द्वि-चक्र भूतापीय बिजलीघर

इन्हें भी देखें

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  1. भूतापीय ऊर्जा संगठन भूतापीय ऊर्जा: अंतर्राष्ट्रीय बाजार अद्यतन Archived 25 मई 2017 at the वेबैक मशीन May 2010, p. 4-6.
  2. बासम, निसार El; मैडार्ड, प्रेवीन; श्लिचिंग, मेरिको (2013). ग्रिड से अलग समुदायों के लिए वितरित नवीकरणीय ऊर्जा : ऊर्जा उत्पादन और आपूर्ति में स्थिरता प्राप्त करने हेतु रणनीतियाँ और प्रौद्योगिकियाँ।” (अंग्रेज़ी भाषा में). न्यूनेस. p. 187. ISBN 978-0-12-397178-4. 11 मई 2021 को मूल से पुरालेखित. अभिगमन तिथि: 25 अक्टूबर 2020.