भारशिव राजवंश

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भारशिव वंश (१७०-३५० ईसवीं) मथुरा के नागवंशी शासकों का कुल था जिसके शासक गुप्त राजाओं से पहले गंगा घाटी पर राज करते थे। जब योधेय, मल्लाव आदि राज्यों के विद्रोह के कारण कुषाण साम्राज्य का अधिकतर भारत पर से नियंत्रण चला गया तब भारशिव ने अपने को स्वतंत्र घोषित कर लिया। भारशिव राजाओं ने दस अश्वमेध यज्ञ किये। उन्होंने अपना साम्राज्य मालवा ,ग्वालियर ,बुंदेलखंड और पूर्वी पंजाब तक फैला लिया था।[1]

सन्दर्भ[संपादित करें]

  1. प्राचीन भारतीय परंपरा और इतिहास, पृ ४०१