भारत में संघवाद

मुक्त ज्ञानकोश विकिपीडिया से
यहाँ जाएँ: भ्रमण, खोज

भारत, क्षेत्र और जनसंख्या की दृष्टि से अत्यधिक विशाल और बहुत अधिक विविधताओं से परिपूर्ण है, ऐसी स्थिति में भारत के लिए संघात्मक शासन व्यवस्था को ही अपनाना स्वाभाविक था और भारतीय संविधान के द्वारा ऐसा ही किया गया है। संविधान के प्रथम अनुच्छेद में कहा गया है कि ’’भारत, राज्यों का एक संघ होगा।’’ लेकिन संविधान-निर्माता संघीय शासन को अपनाते हुए भी भारतीय संघ व्यवस्था की दुर्बलताओं को दूर रखने के लिए उत्सुक थे और इस कारण भारत के संघीय शासन में एकात्मक शासन के कुछ लक्षणों को अपना लिया गया है। वास्तव में, भारतीय संविधान में संघीय-शासन के लक्षण प्रमुख रूप से और एकात्मक शासन के लक्षण गौण रूप से विद्यमान हैं।[1]

भारतीय संविधान के संघात्मक लक्षण[संपादित करें]

भारतीय संघ व्यवस्था में संघात्मक शासन के प्रमुख रूप से चार लक्षण कहे जा सकते हैं:

  • (1) संविधान की सर्वोच्चता,
  • (2) संविधान के द्वारा केन्द्रीय सरकार और इकाइयों की सरकारों में शक्तियों का विभाजन,
  • (3) लिखित और कठोर संविधान,
  • (4) स्वतन्त्र उच्चतम न्यायालय।

भारतीय संविधान में संघात्मक शासन के ये सभी प्रमुख लक्षण विद्यमान हैं।

भारतीय संविधान के एकात्मक लक्षण[संपादित करें]

भारत एक अत्यन्त विशाल और विविधतापूर्ण देश होने के कारण संविधान-निर्माताओं के द्वारा भारत में संघात्मक शासन की स्थापना करना उपयुक्त समझा गया, लेकिन संविधान-निर्माता भारतीय इतिहास के इस तथ्य से भी परिचित थे कि भारत में जब-जब केन्द्रीय सत्ता दुर्बल हो गयी, तब-तब भारत की एकता भंग हो गयी और उसे पराधीन होना पड़ा। संविधान के ये एकात्मक लक्षण प्रमुख रूप से निम्नलिखित हैं:

(1) शक्ति का विभाजन केन्द्र के पक्ष में

(2) इकहरी नागरिकता

(3) संघ और राज्यों के लिए एक ही संविधान

(4) एकीकृत न्याय-व्यवस्था

(5) संसद राज्यों की सीमाओं के परिवर्तन में समर्थ

(6) भारतीय संविधान संकटकाल में एकात्मक

(7) सामान्य काल में भी संघीय सरकार की असाधारण शक्तियां

(8) मूलभूत विषयों में एकरूपता

(9) राज्यों के राज्यपालों की नियुक्ति राष्ट्रपति द्वारा

(10) राज्य सभा में इकाईयों को समान प्रतिनिधित्व नहीं

(11) आर्थिक दृष्टि से राज्यों की केन्द्र पर निर्भरता

(12) संविधान के संशोधन में संघ को अधिक शक्तियां प्राप्त होना

(13) अन्तर्राज्य परिषद् और क्षेत्रीय परिषदें

(14) भारतीय संघ में संघीय क्षेत्र

सन्दर्भ[संपादित करें]