भारत में रासायनिक उद्योग

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भारत में रासायनिक उद्योग आधुनिक भारत के कुछ स्वतंत्र विकास करने वाले उद्योगों में से एक है। रासायनिक उद्योग से तात्पर्य अकार्बनिक, पॉलीमर तथा अन्य औद्योगिक और प्रयोगिक पदार्थों के निर्माण और व्यापार से है। इसका मुख्य विकास सन् १९३० के दशक से हुआ है, लेकिन सन् २०१० के आसपास से इसका विकास उत्तरोत्तर होता जा रहा है। २००८ में यह ३5 अरब डॉलर का और भारतीय अर्थव्यवस्था का ३ प्रतिशत था [1] लेकिन २०१० में यह १३ प्रतिशत हो गया [2]। इस क्षेत्र के प्रमुख कारखाने टाटा केमीकल्स, एक्मे आदि हैं। प्रमुख उत्पादों में दवा, रंग, पेंट, शराब आदि आते हैं।

इस उद्योग का विकास महाराष्ट्र में बहुत हुआ है। जीवन से जुड़े (Organic) रसायन अजैव रसायनों से मामूली मात्रा में अधिक बनाए जाते हैं (५७-४३%)।

सन्दर्भ[संपादित करें]

  1. "संग्रहीत प्रति". मूल से 24 सितंबर 2015 को पुरालेखित. अभिगमन तिथि 10 दिसंबर 2015.
  2. "संग्रहीत प्रति". मूल से 25 अप्रैल 2016 को पुरालेखित. अभिगमन तिथि 10 दिसंबर 2015.

इन्हें भी देखें[संपादित करें]

बाहरी कड़ियाँ[संपादित करें]