भारत में जल आपूर्ति और स्वच्छता

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भारत: जल और स्वच्छता
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विवरण
कम से कम बुनियादी पानी तक पहुंच 88%[1]
कम से कम बुनियादी स्वच्छता तक पहुंच 44%[1]
औसत शहरी जल उपयोग (लीटर/व्यक्ति/दिन) 126 (2006)[2]
औसत शहरी पानी और सीवर बिल US$2 (2007)[3]
घरेलू मीटरींग का हिस्सा 55 प्रतिशत, शहरी क्षेत्रों में (1999)[4]
एकत्रित अपशिष्ट जल प्रशोधन का हिस्सा 27% (2003)[5]
जल आपूर्ति और स्वच्छता में वार्षिक निवेश US$5 / व्यक्ति[6]
संस्थान
नगर पालिकाओं के लिए विकेंद्रीकरण आंशिक
राष्ट्रीय जल और स्वच्छता कंपनी नहीं
जल और स्वच्छता नियामक नहीं
नीति व्यवस्था के लिए जिम्मेदारी राज्य सरकारें; संघीय स्तर पर आवास और शहरी गरीबी उन्मूलन मंत्रालय, शहरी विकास मंत्रालय और पेयजल और स्वच्छता मंत्रालय
क्षेत्र कानून नहीं
शहरी सेवा प्रदाताओं की संख्या 3,255 (1991)
ग्रामीण सेवा प्रदाताओं की संख्या लगभग 100,000
भारत में पानी की एक लॉरी

भारत में पेयजल आपूर्ति और स्वच्छता, सरकार और समुदायों के विस्तृत कार्यक्षेत्र में सुधार के विभिन्न स्तरों के लंबे प्रयासों के बावजूद अपर्याप्त है। पानी और स्वच्छता में निवेश का स्तर, अंतरराष्ट्रीय मानकों से कम है, हालांकि 2000 के बाद से इसमें वृद्धि हुई है। उदाहरण के लिए, 1980 में ग्रामीण स्वच्छता कार्यक्षेत्र का अनुमान 1% था, जोकि 2008 में बढ़कर 21% तक पहुंच गया था।[7][8] इसके अलावा, 1990 में स्वच्छ जल के बेहतर स्रोतों तक पहुंच 72% से बढ़कर 2008 में 88% हो गया था।[7] साथ ही, बुनियादी ढांचे के संचालन और रखरखाव के प्रभारी स्थानीय सरकारी संस्थानों को अशक्त माना जाता है और उनके कार्यों को पूरा करने के लिए वित्तीय संसाधनों की भी कमी रहती है। इसके साथ ही, केवल दो भारतीय शहरों में लगातार पानी की आपूर्ति है और 2008 के अनुमान के अनुसार लगभग 69% भारतीय अभी भी उन्नत स्वच्छता सुविधाओं से वंचित है।[9] वाटरएड द्वारा किए गए एक अध्ययन के अनुसार शहरी क्षेत्रों में रहने वाले 157 मिलियन लोग या 41 प्रतिशत भारतीय पर्याप्त स्वच्छता के बिना रहते हैं। स्वच्छता के बिना रहने वाले शहरी लोगों की सबसे बड़ी संख्या के कारण इस मामलें में भारत शीर्ष पर आता है। भारत, शहरी स्वच्छता संकट में सबसे ऊपर है, इसमें स्वच्छता के बिना शहरी निवासियों की सबसे बड़ी मात्रा है और तकरीबन 41 मिलियन से अधिक लोगों खुले में शौच करते हैं।[10][11]

भारत में पानी की आपूर्ति और स्वच्छता में सुधार के लिए कई अभिनव दृष्टिकोण में कई परीक्षण किए गए हैं, विशेष रूप से 2000 के दशक में। इनमें 1999 से ग्रामीण जल आपूर्ति में मांग-संचालित दृष्टिकोण, समुदाय के नेतृत्व में कुल स्वच्छता, कर्नाटक में शहरी जल आपूर्ति की निरंतरता में सुधार के लिए सार्वजनिक-निजी साझेदारी, और सुधार के लिए जल आपूर्ति और स्वच्छता के लिए माइक्रोक्रेडिट का उपयोग कर पानी और स्वच्छता तक पहुंच बनाना आदि शामिल थे।

२०१४ में चलाये गये स्वच्छ भारत अभियान, लोगों में जागरूकता फैला कर स्वच्छता में सुधार लाने का प्रयास किया गया है। इस अभियान के तहत देश में लगभग 11 करोड़ 11 लाख शौचालयों के निर्माण का लक्ष्य रखा गया था।[12]

पहुँच[संपादित करें]

2015 में, शहरी क्षेत्रों में 96% और ग्रामीण इलाकों के 85% आबादी अर्थात कुल आबादी का 88% लोगों की कम से कम बुनियादी पानी तक पहुंच थी। 2016 से "कम से कम बुनियादी जल" शब्द, पहले इस्तेमाल किए गए "बेहतर जल स्रोत" की जगह उपयोग किया जा रहा है। 2015 में भारत में, 44% लोगों को "कम से कम बुनियादी स्वच्छता", या शहरी क्षेत्रों में 65% और ग्रामीण इलाकों में 34% तक पहुंच थी। 2015 में, 150 मिलियन लोग बुनियादी जल और 708 मिलियन लोग बुनियादी शौच सुविधाओं के बिना थे।[13][1]

पिछले वर्षों में, 2010 में, संयुक्त राष्ट्र ने भारतीय आंकड़ों के आधार पर अनुमान लगाया था कि 525 मिलियन लोग खुले में शौच करते हैं।[14] जून 2012 में ग्रामीण विकास मंत्री जयराम रमेश ने कहा कि भारत दुनिया का सबसे बड़ा "खुला मैदान शौचालय" है। उन्होंने यह भी टिप्पणी की कि पाकिस्तान, बांग्लादेश और अफगानिस्तान इसमें बेहतर हैं।[15]

भारतीय मानदंडों के मुताबिक, बेहतर पानी की आपूर्ति तक पहुंच मौजूद है यदि कम से कम 40 लीटर/व्यक्ति/दिन, सुरक्षित पेयजल 1.6 किमी या 100 मीटर के भीतर प्रदान किया जाये। प्रति 250 व्यक्तियों में कम से कम एक पंप होना चाहिए।

शहरी क्षेत्रों में, जिन्हें पाइप नेटवर्क द्वारा पानी नहीं प्राप्त होता हैं उन्हें अक्सर निजी जल विक्रेताओं से संदिग्ध गुणवत्ता के महंगी पानी लेना पड़ता है। उदाहरण के लिए, दिल्ली में पानी के ट्रको को यमुना नदी के किनारे बने अवैध कुओं से 0.75 रुपये प्रति गैलन (२.८४ प्रति लीटर) की दर से पानी मिलता है।[16]

स्वास्थ्य प्रभाव[संपादित करें]

पर्याप्त स्वच्छता और सुरक्षित पानी की कमी से स्वास्थ में नकारात्मक प्रभाव पड़ते हैं जिनमें डायरिया शामिल है, जिसे यात्रियों द्वारा "दिल्ली बेली" के रूप में संदर्भित किया जाता है,[17] और सालाना लगभग 10 मिलियन आगंतुक इससे प्रभावित होते है।[18] हालांकि अधिकांश पर्यटक जल्द ही ठीक हो जाते हैं या उचित देखभाल प्राप्त करते हैं। सीवर श्रमिकों की निराशाजनक परिस्थितियाँ एक और चिंता है। दिल्ली में सीवेज श्रमिकों की कामकाजी परिस्थितियों के एक सर्वेक्षण से पता चला है कि उनमें से ज्यादातर पुरानी बीमारियों, श्वसन समस्याओं, त्वचा विकार, एलर्जी, सिरदर्द और आंखों के संक्रमण से पीड़ित हैं।[19]

जल आपूर्ति और जल संसाधन[संपादित करें]

गिरते भूजल तालिका (जल स्तर) और पानी की खराब गुणवत्ता ने भारत के कई हिस्सों में शहरी और ग्रामीण जल आपूर्ति दोनों की स्थिरता में खतरा पैदा कर दिया है। सतह के पानी पर निर्भर शहरों में प्रदूषण, पानी की कमी और उपयोगकर्ताओं के बीच संघर्ष में वृद्धि होने लगी है। उदाहरण के लिए, बैंगलोर 1974 से कावेरी नदी के पानी पर काफी हद तक निर्भर रहता है, आज यह पानी कर्नाटक और तमिलनाडु राज्यों के बीच विवाद का विषय है। अन्य भारतीय शहरों में पानी की होने पर उच्च लागत पर अधिक दूरी से और जल पूर्ति की जाती है। बैंगलोर के मामले में, 33.84 बिलियन (यूएस $471.3 मिलियन) के कावेरी चौथे चरण परियोजना, चरण दो में 100 किमी की दूरी से प्रति दिन 500,000 घन मीटर पानी की आपूर्ति शामिल है, इसके बावजूद शहर की आपूर्ति में मात्र दो तिहाई की ही वृद्धि हुई है।[20][21]

कुछ तटीय इलाकों में समुद्री जल का अलवणीकरण कर आपूर्ति, पेयजल का एक महत्वपूर्ण स्रोत बन गया है। उदाहरण के लिए, चेन्नई मेट्रोपॉलिटन वाटर सप्लाई और सीवरेज बोर्ड ने 2010 में मिंजुर में प्रति दिन 100,000 एम3 की क्षमता वाले बड़े समुद्री जल विलवणीकरण संयंत्र की स्थापना की है। उसी वर्ष निममेली में उसी क्षमता वाले दूसरा संयंत्र अनुबंधित किया गया है।[22]

सन्दर्भ[संपादित करें]

  1. WHO and UNICEF (2017) Progress on Drinking Water, Sanitation and Hygiene: 2017 Update and SDG Baselines Archived 25 जुलाई 2019 at the वेबैक मशीन.. Geneva: World Health Organization (WHO) and the United Nations Children’s Fund (UNICEF), 2017
  2. World Bank Water and Sanitation Program (WSP): (September 2010). "The Karnataka Urban Water Sector Improvement Project: 24x7 Water Supply is Achievable" (PDF). अभिगमन तिथि 20 August 2012.सीएस1 रखरखाव: फालतू चिह्न (link)
  3. Asian Development Bank:2007 Benchmarking and Data Book of Water Utilities in India Archived 8 अप्रैल 2020 at the वेबैक मशीन., 2007, p. 3
  4. National Institute of Urban Affairs: Status of Water Supply, Sanitation and Solid Waste Management Archived 8 अप्रैल 2020 at the वेबैक मशीन., 2005, p. xix–xxvi. The evaluation is based on a survey of all 23 metropolitan cities in India (cities with more than 1 million inhabitants) and a representative sample of 277 smaller cities with an aggregate population of 140 million. The survey was carried out in 1999.
  5. GTZ:ECOLOGICAL SANITATION – A NEED OF TODAY! PROGRESS OF ECOSAN IN INDIA Archived 15 अप्रैल 2012 at the वेबैक मशीन., 2006, p. 3. This figure refers to 921 Class I Cities and Class II Towns in 2003–04.
  6. Planning Commission (India):DRAFT REPORT OF THE STEERING COMMITTEE ON URBAN DEVELOPMENT FOR ELEVENTH FIVE YEAR PLAN (2007–2012) Archived 4 मार्च 2016 at the वेबैक मशीन., 2007. Retrieved 15 April 2010.
  7. UNICEF/WHO Joint Monitoring Programme for Water Supply and Sanitation estimate for 2008 based on the 2006 Demographic and Health Survey, the 2001 census, other data and the extrapolation of previous trends to 2010.
  8. Planning Commission of India. "Health and Family Welfare and AYUSH : 11th Five Year Plan" (PDF). मूल (PDF) से 7 जुलाई 2010 को पुरालेखित. अभिगमन तिथि 19 September 2010., p. 78
  9. Sridhar, Kala Seetharam; Reddy, A. Venugopal (24 July 2018). "State of Urban Services in India's Cities: Spending and Financing". Public Affairs Centre. मूल से 1 मई 2016 को पुरालेखित. अभिगमन तिथि 17 सितंबर 2018 – वाया Google Books.
  10. "The State of the World's Toilet 2016" (PDF). मूल (PDF) से 28 नवंबर 2016 को पुरालेखित. अभिगमन तिथि 27 November 2016.
  11. "Overflowing Cities: 157 Million Indians Still Without Toilets". मूल से 28 नवंबर 2016 को पुरालेखित. अभिगमन तिथि 27 November 2016.
  12. "MDWS Intensifies Efforts with States to Implement Swachh Bharat Mission", Business Standard, 18 March 2016, मूल से 2 अप्रैल 2016 को पुरालेखित, अभिगमन तिथि 17 सितंबर 2018
  13. "WASHwatch.org - India". washwatch.org (अंग्रेज़ी में). मूल से 21 जनवरी 2018 को पुरालेखित. अभिगमन तिथि 2017-04-12.
  14. WASHwatch WASHwatch:[1] Archived 21 जनवरी 2018 at the वेबैक मशीन.,
  15. The Telegraph:India the world's largest open air toilet Archived 24 फ़रवरी 2017 at the वेबैक मशीन., 25 June 2012, retrieved on 28 June 2012. According to JMP data for 2010 the share of people defecating in the open was 64% in Nepal, 63% in India, 37% in Pakistan, 29% in Afghanistan and 20% in Bangladesh. According to these figures, the statement by Jairam Ramesh is correct except for Nepal.
  16. Sethi, Aman. "At the Mercy of the Water Mafia, Foreign Policy, July/August 2015". मूल से 11 अक्तूबर 2015 को पुरालेखित. अभिगमन तिथि 11 October 2015.
  17. John P. Cunha, DO, FACOEP. "Travelers' Diarrhea: Learn About Antibiotics and Treatment". MedicineNet. मूल से 8 अगस्त 2015 को पुरालेखित. अभिगमन तिथि 29 July 2015.सीएस1 रखरखाव: एक से अधिक नाम: authors list (link)
  18. "Fullstopindia.com Is For Sale". www.fullstopindia.com. मूल से 20 फ़रवरी 2011 को पुरालेखित. अभिगमन तिथि 17 सितंबर 2018.
  19. Survey by Dr Ashish Mittal, reported by Rupa Jha for the BBC on 7 February 2009 'My life cleaning Delhi's sewers' Archived 24 जुलाई 2018 at the वेबैक मशीन.
  20. Projects Monitor:Stage-IV of Cauvery water supply scheme underway Archived 15 जुलाई 2011 at the वेबैक मशीन., 17 August 2009
  21. Bangalore Water Supply and Sanitation Board:Water Sources Archived 20 नवम्बर 2008 at the वेबैक मशीन.. Retrieved 28 August 2009.
  22. Global Water Intelligence: Chennai to get more desal after Nemmeli award Archived 20 जनवरी 2016 at the वेबैक मशीन., 7 January 2010