भारत का अनन्य आर्थिक क्षेत्र

भारत का अनन्य आर्थिक क्षेत्र (अंग्रेज़ी: Exclusive economic zone of India; एक्सक्लूस़िव इकोनॉमिक ज़ोन ऑफ़ इंडिया) विश्व का 18वाँ सबसे बड़ा अनन्य आर्थिक क्षेत्र है, जिसका कुल क्षेत्रफल 2,305,143 वर्ग किलोमीटर है। अनन्य आर्थिक क्षेत्र, या सक्षेप में ईईज़ेड (EEZ) समुद्री क़ानून के तहत किसी राष्ट्र को मिला एक विशेष एकाधिकार होता है जिसके अंतर्गत उसे अपनी तटरेखा से कुछ दूरी तक के समुद्र में समस्त आर्थिक गतिविधियों, जैसे मछली पकड़ना, खनन करना और ऊर्जा संसाधनों का दोहन करने का, विशिष्ट अधिकार प्राप्त होता है।[1]
भारत का प्रादेशिक समुद्री क्षेत्र (टेरिटोरियल सी) इसकी तटरेखा से 12 समुद्री मील की दूरी तक है और इसके आगे 200 समुद्री मील तक अनन्य क्षेत्र है। इस अनन्य आर्थिक क्षेत्र में भारत के दक्षिण-पश्चिमी तट से दूर लक्षद्वीप सागर में स्थित लक्षद्वीप द्वीपसमूह तथा बंगाल की खाड़ी और अंडमान सागर में स्थित अंडमान और निकोबार द्वीपसमूह भी सम्मिलित हैं। भारत का अनन्य आर्थिक क्षेत्र पश्चिम में पाकिस्तान, दक्षिण में मालदीव और श्रीलंका, तथा पूर्व में बांग्लादेश, म्यांमार, थाईलैंड, मलेशिया और इंडोनेशिया के विशिष्ट आर्थिक क्षेत्रों से सटा हुआ है।
नए वैज्ञानिक सर्वेक्षण से प्राप्त आँकड़ों के आधार पर भारत ने संयुक्त राष्ट्र से अपने अनन्य आर्थिक क्षेत्र की सीमा को 200 समुद्री मील से बढ़ाकर 350 समुद्री मील तक विस्तारित करने का अनुरोध किया है।[2]
इन्हें भी देखें
[संपादित करें]संदर्भ
[संपादित करें]- ↑ "Part V – Exclusive Economic Zone, Article 56". Law of the Sea. United Nations. अभिगमन तिथि: 28 August 2011.
- ↑ Sunderarajan, P. (12 June 2011). "India hopes to double its EEZ". The Hindu. अभिगमन तिथि: 1 April 2017.
बाहरी कड़ियाँ
[संपादित करें]- भारतीय अनन्य आर्थिक क्षेत्र. लेखिका: डॉ. शुभ्रता मिश्रा. इंडिया वॉटर पोर्टल. (हिन्दी में)
- United Nations Convention on the Law of the Sea – Part V. (अंग्रेज़ी में)
| यह भारत-सम्बन्धी लेख एक आधार है। जानकारी जोड़कर इसे बढ़ाने में विकिपीडिया की मदद करें। |