Provides for curtailment of fundamental rights, imposes fundamental duties and changes to the basic structure of the constitution by making India a "Socialist Secular" Republic.
भारतीय संविधान का 42वाँ संशोधनइन्दिरा गांधी के प्रधानमंत्रित्व वाली भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस द्वारा आपातकाल (25 जून 1975 – 21 मार्च 1977) के दौरान किया गया था। आधिकारिक रूप से इसका नाम 'संविधान (बयालीसवाँ संशोधन) अधिनियम, 1976' है। [1] यह एक बहुत बड़ा संशोधन था और इसके अधिकांश संशोधन 3 जनवरी 1977 से लागू हो गए। यह संशोधन भारतीय इतिहास का सबसे विवादास्पद संशोधन माना जाता है। विशेष बात यह है कि यह संशोधन इन्दिरा गांधी द्वारा लगाए गए आपातकाल के दौरान लाया गया था और व्यक्तिगत महत्वाकांक्षाओं की पूर्ति के लिए लाया गया था। [2] इस संशोधन के द्वारा भारत के सर्वोच्च न्यायालय तथा उच्च न्यायालयोंकी उन शक्तियों को कम करने का प्रयत्न किया गया जिनमें वे किसी कानून की संवैधानिक वैधता की समीक्षा कर सकते हैं। इस संशोधन को कभी-कभी 'लघु-संविधान' (मिनी-कॉन्स्टिट्यूशन) या 'कान्स्टिट्यूशन ऑफ इन्दिरा' भी कहा जाता है। [3]
↑ Hart, Henry C. (April 1980). "The Indian Constitution: Political Development and Decay". Asia Survey, Vol. 20, No. 4, Apr., 1980. University of California Press. जेस्टोरi345360.