भारतीय शस्त्र अधिनियम,1878

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ब्रिटिश भारत के वायसराॅय लॉर्ड लिटन की दमनकारी नीतियों में एक और प्रमुख कार्य, भारतीय शस्त्र अधिनियम,1878 था। सन् 1878 में ब्रिटिश पार्लियामेंट द्वारा पारित ग्यारहवें अधिनियम के अनुसार किसी भारतीय नागरिक के लिए बिना लाइसेंस शस्त्र/हथियार रखना अथवा उसका व्यापार करना, एक दंडनीय अपराध बन गया। इस अधिनियम को तोड़ने पर 3 वर्ष तक की ज़ेल, अथवा जुर्माना या फिर इनमें से दोनों, और यदि इसको छुपाने का प्रयत्न किया गया हो तो उस पर सात वर्ष तक की ज़ेल, अथवा जुर्माना या फिर इनमें से दोनों दण्ड दिए जा सकते थे। इसमें भी ब्रिटिश सरकार द्वारा भेदभाव किया जाता था अर्थात यूरोपीय, ऐंग्लो-इण्डियन अथवा सरकार के कुछ विशेष अधिकारी इस अधिनियम की परिधि से मुक्त थे। इस अधिनियम द्वारा स्पष्ट हो गया कि उस समय ब्रिटिश भारत में भारतीय लोग अविश्वसनीय समझे जाते थे।