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भारतीय विदेशी नागरिकता (ओसीआई) योजना

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भारतीय विदेशी नागरिकता (OCI) योजना 02.12.2005 से दोहरी नागरिकता प्रदान करने के पहले कदम के रूप में प्रचालित की गई थी। इसका अर्थ है भारत में दीर्घकालिक निवास का अधिकार प्राप्त करना और किसी विदेशी देश की नागरिकता रखना। यह योजना नागरिकता अधिनियम, 1955 (धारा 7A, 7B आदि) में संशोधन द्वारा बनाई गई थी क्योंकि अधिनियम की धारा 9 के अनुसार, जो व्यक्ति किसी अन्य देश की नागरिकता प्राप्त करता है उसकी भारतीय नागरिकता समाप्त हो जाती है।

एक विदेशी नागरिक, जो 26.01.1950 को भारत का नागरिक बनने का पात्र था या 26.01.1950 के बाद किसी समय भारत का नागरिक था या 15.08.1947 के बाद भारत का हिस्सा बने क्षेत्र का था, और उसके बच्चे तथा पोते-पोतियाँ ओसीआई पंजीकरण के लिए पात्र हैं। यह तभी संभव है जब उनके देश के स्थानीय कानून या अन्य नियमों में दोहरी नागरिकता की अनुमति हो। ऐसे व्यक्तियों के अल्पवयस्क बच्चे भी पात्र हैं। लेकिन यदि आवेदक पाकिस्तान या बंगलादेश का नागरिक रहा है तो उसे ओसीआई की पात्रता नहीं होगी।

भारत सरकार का उद्देश्य इस योजना द्वारा विदेशों में बसे भारतीयों में निष्ठा को बढ़ाना, अंतरराष्ट्रीय समर्थन प्राप्त करना और उन्हें भारत के लिए दूत के रूप में बदलना है। इसी कारण भारत कुछ और बदलाव लाने की योजना बना रहा है। अन्य देशों की तरह, जो अपने नागरिकों को दोहरी नागरिकता का दर्जा देते हैं, भारत भी शर्तें जोड़ने पर विचार कर रहा है। उदाहरण के लिए, मतदान का अधिकार देने से पहले लंबे समय तक और लगातार भारत में निवास की शर्त रखना, राजनीतिक उम्मीदवार बनने से पहले अन्य नागरिकताओं का त्याग और सुरक्षा अनुमति लेना, भारतीय मूल के दूसरी और तीसरी पीढ़ी के लोगों से मौजूदा रिश्तों का प्रमाण माँगना, और चुनाव अभियानों में विदेशी चंदे पर प्रतिबंध लगाना नियोजित नियमों और शर्तों में शामिल हैं।

बाहरी कड़ियाँ

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https://web.archive.org/web/20110902173646/http://mha.nic.in/foreigDiv/OCI.html