भारतीय अर्थव्यवस्था की समयरेखा

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यहाँ भारतीय उपमहाद्वीप के आर्थिक इतिहास की प्रमुख घटनाएँ संक्षेप में दी गई हैं।

२०१४ में क्रयशक्ति समानता के आधार पर भारतीय अर्थव्यवस्था विश्व में तीसरी सबसे बड़ी थी।

प्राचीन काल एवं मध्यकाल[संपादित करें]

  • 500 ईसापूर्व
    • महाजनपदों द्वारा चाँदी के पंच किए हुए सिक्के (punch-marked coins)[1] ढाले जाते थे। इन सिक्कों ने सघन व्यापार में तथा नगरीय विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।.[2][3]
  • 1500
    • विश्व अर्थव्यवस्था में भारतीय अर्थव्यवस्था का हिसा 24.5% था जो चीन के बाद दूसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था थी। इस काल में विश्व अर्थव्यवस्था में चीन का हिस्सा लगभग २५% था।[5]
  • 1600
    • भारत की आय 17.5 मिलियन पाउण्ड थी (जनसंख्या लगभग 150 मिलियन) जो सन् १८०० में ब्रिटेन की सम्पूर्ण ट्रेजरी (लगभग 16 मिलियन पाउण्ड) से भी अधिक थी।[6]
  • 1700
    • भारत की अर्थव्यवस्था, विश्व की सम्पूर्ण आय की 24.4% के बराबर थी जो विश्व में सर्वाधिक थी।[7]
सकल घरेलू उत्पाद (डॉलर)
वर्ष 1000AD 1500 AD 1600 AD 1700 AD
भारत 33,750 60,500 74,250 90,750
चीन 26,550 61,800 96,000 82,800
पश्चिमी योरप 10,165 44,345 65,955 83,395
सम्पूर्ण विश्व 116,790 247,116 329,417 371,369

ब्रितानी उपनिवेश काल[संपादित करें]

ईस्ट इण्डिया कम्पनी[संपादित करें]

  • 1806
    • भारत में पत्र-मुद्रा (पेपर करेंसी) का चलन आरम्भ हुआ।
  • 1820
    • भारत की अर्थव्यवस्था चीन और यूके के बाद तीसरे स्थान पर आ गई। ब्रिटेन द्वारा भारत के औपनिवेशिक शोष्ण तथा ब्रिटेन में औद्योगिक क्रान्ति के परिणामस्वरूप यूके अर्थव्यवस्था की दृष्टि से पहली बार यूरोप में भी सबसे आगे पहुँच गया। अब ब्रिटेन की विदेश नीति तथा आर्थिक नीति में भारत को असमान भागीदार के रूप में व्यवहार किया जाना आरम्भ हुआ।
  • 1850
    • 1850 में भारत की सकल घरेलू उत्पाद घटकर 5-10% रह गया। यह चीन के सकल घरेलू उत्पाद का लगभग 40 अनुमानित था। 1850 तक भारत के 30 प्रतिशत बाजार पर ब्रिटेन के कपास का कब्जा हो गया।[8]

ब्रिटिश राज[संपादित करें]

स्वाधीनता के बाद[संपादित करें]

नेहरू काल[संपादित करें]

  • 1948
    • प्रथम औद्योगिक नीति घोषित की गयी।
  • 1956
    • द्वितीय औद्योगिक नीति की घोषणा
  • 1962
    • चीन का भारत पर आक्रमण
  • 1966
    • रूपए का अवमूल्यन करना पड़ा
  • 1969
    • राजाओं-नवाबों के प्रिवीयर्स एवं विशेषाधिकार की समाप्ति
    • शीघ्रता तथा एकदम अप्रत्याशित ढंग से 14 बड़े भारतीय वाणिज्यिक बैंकों के राष्ट्रीयकरण की घोषणा। आज़ादी से लेकर उस समय तक भारत सरकार द्वारा लिए गए आर्थिक निर्णयों में से इस निर्णय को सबसे महत्वपूर्ण निर्णय माना जा सकता है। राष्ट्रीयकरण से बैंकिंग नेटवर्क का तेजी से विस्तार हुआ तथा ग्रामीण क्षेत्रों में इसकी अच्छी पैठ हो गयी।
  • 1971
    • बंगलादेश मुक्ति ; बहुत से बंगलादेशी शरणार्थी भारत आए।
  • 1973
    • भारतीय अर्थव्यवस्था 494.8 बिलियन अमेरिकी डॉलर के बराबर थी जो विश्व की सकल आय का 3.1% होता है।[कृपया उद्धरण जोड़ें]

1980–1991[संपादित करें]

  • 1980
    • १५ अप्रैल १९८० को पुनः 6 और बैंकों का राष्ट्रीयकरण किया गया।

1991 से अब तक[संपादित करें]

  • 1991
    • रूपए का अवमूल्यन किया गया।
    • नरसिंह राव तथा उनके वित्तमंत्री मनमोहन सिंह द्वारा उदार आर्थिक नीतियाँ शुरू की गईं व डा मनमोहन सिंह ने अपनी नितियो से भारत को आर्थिक मंदी से बचाया।[9]
  • 1996
    • विनिवेश आयोग की स्थापना
  • 2010
    • भारतीय अर्थव्यवस्था 4.002 बिलियन अमेरिकी डॉलर के बराबर हो गई जो विश्व की सकल आय का 6.3% है। इस दृष्टि से यह विश्व की चौथी सबसे बड़ी आय है।[10]
  • 2012
    • भारतीय अर्थव्यवस्था 4,824.551 बिलियन अमेरिकी डॉलर के बराबर हो गई। इस दृष्टि से यह विश्व की तीसरी सबसे बड़ी आय है।[11]
  • 2013
    • भारत में एक के बाद एक आर्थिक घोटाले प्रकाश में आये। भारी मन्दी।
    • डॉलर एवं अन्य मुद्राओं के सापेक्ष रूपए का भाव लगातार गिर रहा है। ३ सितंबर २०१३ को डॉलर के सापेक्ष रूपए का भाव ६७ तक जा पहुंचा।[12]
    • २०१२-१३ में विकास दर गिरकर १० वर्षों के न्यूनतम स्तर ५% तक आ गई।[13]
  • 2014
    • तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था- अप्रैल 2014 में जारी वर्ल्ड बैंक की एक रिपोर्ट के अनुसार, भारतीय अर्थव्यवस्था परचेजिंग पावर पैरिटी के लिहाज से जापान को पछाड़कर दुनिया की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बन गयी है। बैंक के इंटरनैशनल कंपेरिजन प्रोग्राम (आईसीपी) के 2011 राउंड में अमेरिकी और चीन के बाद भारत को स्थान दिया गया है। इससे पहले 2005 के सर्वेक्षण में भारतीय अर्थव्यवस्था 10वें स्थान पर थी।[14]
  • 2017
    • 1 जुलाई : वस्तु एवं सेवा कर (भारत) की शुरुआत से संपूर्ण भारत में अप्रत्यक्ष कर व्यवस्था एकसमान हुई। इसके फलस्वरूप कई अप्रत्यक्ष कर समाप्त हो गए।

सन्दर्भ[संपादित करें]

  1. Nupam Mahajan and R. Balasubramaniam, "Scanning electron microscopy study of an ancient silver punch-marked coin with central pentagonal mark", Numismatic Digest v. 22.
  2. "Ancient Indian Coinage", RBI Monetary Museum, rbi.org
  3. The World Economy: Historical Statistics, Angus Maddison
  4. Angus Maddison (2001). The World Economy: A Millennial Perspective, OECD, Paris
  5. Angus Maddison (2003). The World Economy: Historical Statistics, OECD, Paris
  6. Bowen, H. V. Business of Empire: The East India Company and Imperial Britain, 1756-1833 (2006), 304pp
  7. Kumar, Dharma and Meghnad Desai, eds. The Cambridge Economic History of India: Volume 2, c.1751-c.1970 (1983).
  8. http://www.iisg.nl/hpw/papers/broadberry-gupta.pdf
  9. "Timeline: India". बीबीसी न्यूज़. 2011-02-22. अभिगमन तिथि 2011-03-06.
  10. "The Indian Economy In The Next Decade". Forbes.com. अभिगमन तिथि 2011-03-06.
  11. "Report for Selected Countries and Subjects". अभिगमन तिथि 2013-01-24.
  12. http://economictimes.indiatimes.com/et-now/forex/rupee-weakens-breaches-67-per-dollar-mark/videoshow/22253703.cms
  13. "भारतीय रिज़र्व बैंक की वार्षिक रिपोर्ट २०१२-१३, पृ-१, पैरा-1.1" (PDF).
  14. "भारत बना दुनिया की तीसरी सबसे बड़ी इकॉनमी". नवभारत टाईम्स. 30 अप्रैल 2014. अभिगमन तिथि 30 अप्रैल 2014.

इन्हें भी देखें[संपादित करें]

बाहरी कड़ियाँ[संपादित करें]