भारतीय अमरीकी

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अमरीका में बसे १७ लाख भारतीय अमेरिकी भारत और अमेरिका के बीच मजबूत कङी बनाते हैं। सैन फ़्रांसिस्को-लॉस एंजेलिस, न्यूयॉर्क-न्यू जर्सी, शिकागो, डैट्रायट, ह्यूस्टन, एटलांटा, मायामी-आरलैंडो-टैंपा और वाशिंगटन डी. सी. के बड़े क्षेत्र में उनकी उल्लेखनीय उपस्थिति है। १९६० और १९७० के दशकों में अमरीका आए पहले भारतीयों में डॉक्टर, वैज्ञानिक और इंजीनियर (अभियान्त्रक) जैसे पेशों के लोग थे पर हाल ही में बहुत से अन्य पेशों के लोग भी आने लगे हैं। भारतीय अमेरिकियों ने बहुत सी संस्थाएं और संगठन बनाये हुए हैं जो मुख्य रूप से भाषा के आधार पर और कुछेक व्यवसाय के आधार पर बनाये गये हैं। संपन्नता बढ़ने से, ख़ासकर सूचना तकनीक और बायोटेक्नोलॉजी क्षेत्रों में, यह समुदाय राजनीति के क्षेत्र में भी लगातार सक्रीय भूमिका निभा रहे हैं। भारतीय अमेरिकी समुदाय की बढ़ती हुई राजनीतिक चेतना और प्रभाव का एक महत्वपूर्ण परिणाम कांग्रेशनल कॉकस ऑन इंडिया एंड इंडियन अमेरिकन्स के रूप में सामने आया है। निचले सदन में इस कॉकस के सदस्यों की संख्या १३० है और सदन में यह किसी एक देश से संबंधित सबसे बड़ा गुट है। इस गुट और भारतीय अमेरिकी समुदाय दोनों की भूमिका महत्वपूर्ण है और उनकी कोशिश है कि दुनिया के दो सबसे बड़े लोकतांत्रिक देश अतीत को भुला दें और अपनी नीतियों और हितों में मजबूत तालमेल बनायें