भादू

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भादू एक जाट[1] तथा बिश्नोई जाति की गोत्र है ।

भादू :- यह एक जाट और विश्नोई कबीले के लोगो की गोत्र हैं

इस गोत्र का इतिहास कुछ इस प्रकार हैं

इतिहास

भादू गोत्र का इतिहास दलीप सिंह अहलावत लिखते हैं कि महाभारतकालीन जनपदों में भद्रक लोगों का भी वर्णन आता है। ये जाटवंश अवश्य ही जांगल देश के भादरानगर के क्षेत्र में रहे होंगे और निश्चित ही भादरा इनकी राजधानी रही होगी। भादरा से जोधपुर और अजमेर की ओर इनका बढ़ना पाया जाता है। ये लोग शान्तिप्रिय पाये जाते हैं और अब भादू और कहीं-कहीं भादा कहलाते हैं।

{एक अन्य मत के अनुसार  :-भारद्वाज (भदौतिया) जनपद महाभारतकाल में भारतवर्ष के जनपदों में भारद्वाज जाट जनपद भी था। (भीष्मपर्व, अध्याय 9)भदावर के प्रदेश का शासक जाट क्षत्रिय समुदाय भादू,भदौरिया,भदौतिया नाम से प्रसिध हुआ। यह लोग सपेऊ,सादावाद के मध्य 8 बड़े खेड़ों और जिला मथुरा के बहुत से गांवों में बसे हुए हैं। खौण्डा गांव के ठा० तोताराम ने तोसागढ़ी बसाई जो ठाकुर लालसिंह के पुत्र ठाकुर छत्तरसिंह के द्वारा भव्यभवन और कच्चीगढ़ी बनवाने पर छत्तरगढ़ी के नाम से प्रसिद्ध हुई।भादू नाम से प्रसिद्ध जाटों के बीकानेर राज्य में बहुत से गांव हैं (जाटों का उत्कर्ष पृ० 366, ले० योगेन्द्रपाल शास्त्री)।। 💪

भादुओं के ढाडी द्वारा बताया गया भादुओ का इतिहास इस प्रकार हैं 👇👇👇👇

भगवानाराम ढ़ाडी (नागौर) वाले के अनुसार भादू गौत्री जाटो व विश्नोईयों की उत्पत्ति काबा गजनी नामक एक पुराने राज्य से होती है . जो अब वर्तमान में हरयाणा के अधीन आता है. काबा (गढ़ गजनी गांव के राजा भादसैन हुआ करते थे जिनके नाम पर इस वंश का नाम भादू पड़ गया! राजा भादसैन के पिताजी का नाम कानसिंह भादू था!! राजा भादसैन के तीन भाई और थे १.,छेतसैन,२.गणसैन,३.खड़गसैन यह चार भाई थे!! बाद में इन चारो का अलग अलग वंश बनने से अलग अलग गौत्र बन गया..( भादसैन के वंशज भादू गौत्री जाट कहलाये व छैतसैन के सिद्धु गौत्री जाट कहलाये ( राजा छैत सैन हरयाणा के खोथ गाँव का राजा था / हरयाणा से राजस्थान की और पलायन करने वाले कुछ खोथ गाँव के जाटों नें अपना गाँव खोथ बताया जिसे भाषा ज्ञान की कमी के कारण मारवाड़ आंचल में सिद्धु गौत्री जाटो को ही खोत/खोथ कहा जाने लगा ( खोत और सिद्धु एक ही गौत्र हैं. उसी तरह राजा घणसैन से घणघस गौत्र बना एंव खड़ग सैन से खोड़/खोड गौत्र की उत्पति हूई यहा एक बात और है की इन चारो गौत्र का आपस मैं रिश्तेदारी नही होती .यह चारो गौत्री जाट चार भाईयों की तरह अपना रिश्ता निभाते हैं ••••√√√√महान जाट महाराजा समंतराज राजा भादसैन के ही वंशज थे ••••√√यह बात प्रमाणिक तथ्यो के अनुसार सत्य हैं

[2]एक दुसरे मत के अनुसार भादू गौत्र की उत्पति हरयाणा और पंजाब के मारु स्थल सिरसा, फतेहाबाद यानी बागड़ मारू धरती में मिलते हैं पंजाब की भी मारू जगह यानी मालवा में हैं भादू !!!!! भादू गौत्र जाटों का राज सांचौर से लेकर बाड़मेर(जाटाणा) ,जैसलमैर, नागौर ,बीकानेर, लुणकरणसर, हनुमानगढ़ , गंगानगर, रावतसर से पंजाब में मालवा, मारू स्थल से होकर हरयाणा में सिरसा फतेहाबाद से पश्चिमी उत्रप्रदेश के कुछ स्थानो पर इनका राज रहा हैं . भादू गौत्री जाट राजाओ का 250 से अधिक वर्तमान बिकानेर व हनुमानगढ़ के गावों पर राज रहा हैं

भादू गौत्र जाट खुद में एक बहुत शक्तिशाली रहे हैं . जिसने पांडू गोदारा जैसै बलशाली राजा को नाको तले चने चबवाये थे . इसकी कथा बहुत बड़ी हैं आगे संपादित की जायेगी !!!


01/01/2017तक की भादू गौत्री जाटों व विश्नोईयों के ढाडी की घर गणना के अनुसार गंगानगर से लेकर साचैर तक केवल राजस्थान के भादु जाटो के घरो की संख्या 9530है. बाकी राज्यो के घरो की गणना के आकड़े अभी तक नही आये हैं () जय जाट मात पिता की

यह सम्पूर्ण लेख सत्य हैं इसे कोई मिटाये नही धन्यवाद

कुँ•अशोक सिंह भादू [9950291401]

ठाकुर देशराज:जाट इतिहास, दिल्ली, 1992, पृ॰ 597

  1. ठाकुर देशराज:जाट इतिहास, दिल्ली, 1992, पृ॰ 597