भाणक

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भाणक ( अर्थ : पढ़कर सुनाने वाला) उन बौद्ध भिक्षुओं को कहा जाता त्रिपिटक के किसी भाग को कण्ठस्थ करके उसे सुनाने में दक्ष होते थे। जब तक बुद्ध वचनों को लिखने की परिपाटी आरम्भ नहीं हुई थी (प्रथम शताब्दी ईसापूर्व) तब तक भाणकों ने ही बुद्ध वचनों को संरक्षित करके उसे अगली पीढी को सौंपने का कार्य किया। जब लेखन की प्रथा चल पड़ी तब भाणकों की परिपाटी का ह्रास होने लगा।

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संदर्भ[संपादित करें]