भगवा आतंकवाद

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भगवा आतंकवाद से तात्पर्य उन हिंसात्मक गतिविधियों से है जिन्हें हिन्दू राष्ट्रवाद द्वारा प्रेरित बताया जाता है। यह शब्द हिन्दू धर्म के प्रमुख प्रतीक केसरिया रंग के पर्यायवाची से उद्धृत है।[1][2]

प्रयोग[संपादित करें]

भगवा आतंकवाद का सबसे पहला प्रयोग अंग्रेज़ी में सन् २००२ में, फ़्रंटलाईन (Frontline) नामक अंग्रेज़ी पत्रिका के एक लेख में, गुजरात दंगे को संबोधन करने के लिए हुआ था।[3] लेकिन इस शब्द का अधिक प्रयोग २९ सितंबर सन् २००८ के मुंबई के मालेगाँव धमाके के बाद हुआ क्योंकि जांच के सिलसिले में धमाके से संबद्धित, कथित तौर पर, एक हिन्दू संगठन से जुङे लोगों को गिरफ्तार किया गया। हालांकि इस्लामी उग्रवादी संगठन, इंडियन मुजाहिदीन (Indian Mujahideen) पर भी दोष आया था क्योंकि इसी इलाके में सन् २००६ के धमाके में इंडियन मुजाहिदीन का हाथ होने की आशंका थी (असल में इंडियन मुजाहिदीन उस समय 'स्टूडेंट्स इस्लामिक मूवमेंट ऑफ़ इंडिया' के नाम से जाना जाता था)। लेकिन, जांच आगे बढ़ने के बाद किसी हिन्दू संगठन के शामिल होने की कथित तौर पर​ पूष्ती हो गई।

शिवसेना अध्यक्ष उद्धव ठाकरे के अनुसार, शरद पवार ने ही सबसे पहले भगवा आतंकवाद शब्द का प्रयोग किया था। इसका जवाब देते हुए पवार ने कहा कि उन्होंने सबसे पहले मालेगांव विस्फोट के बाद इस शब्द का उपयोग किया था।[4] भगवा आतंकवाद अौर हिन्दू आतंकवाद में अधिक अंतर नहीं प्रतित होता है। हिन्दूत्व आतंकवाद का भी कभी-कभी हिन्दू आतंकवाद अौर भगवा आतंकवाद की जगह प्रयोग किया जाता है। भारतीय मिडिया में तीनों शब्दों का इस्तमाल होता है। प्रसिद्ध पत्रिका 'आउटलुक' (Outlook) में ही तीनों शब्दों का बारी-बारी से इस्तमाल होता देखा गया है। 'द नैश्नल' (The National) के अनुसार कोई भी हिन्दू उग्रवादी द्वारा, मुसलमानों के खिलाफ कोई भी हिंसा की कथित भूमिका को या तो भगवा आतंकवाद या तो हिन्दू आतंकवाद से संबोधित किया जाता है। [5] लेकिन सूभाष गटाडे की किताब-गोडसेज़ चिल्ड्रेन (Godse's Children) में हिन्दूत्व अौर हिन्दू को अलग बताया गया है [6] अौर वीर सावरकर की किताब "हिन्दूत्व" में हिन्दू को हिन्दूत्व का एक छोटा सा हिस्सा बताया गया है, इसलिए हिन्दू को हिन्दूत्व से भिन्न बताया गया है।[7]

मुख्य हिन्दू राष्ट्रवादी दल, जैसे राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ का आरंभ ठिक हिन्दूत्व विचारधारा के आने के बाद शुरू हुआ (हिन्दू विचारधारा की शुरूआत वीर सावरकर द्वारा सन् १९२३ में लिखि किताब "हिन्दूत्व" से हुई, दो साल बाद ही राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ का नि्रमाण हुआ)। लेकिन भगवा रन्ग बौद्द ध्रम के लोग भी अपनाते है। इसलिए भगवा आतंकवाद को एक गलत नाम माना जाता है अौर इसलिए हिन्दू आतंकवाद अौर हिन्दूत्व आतंकवाद जैसे नामों को अपनाया जाता है। [8][9]

इतिहास[संपादित करें]

३० जनवरी सन् १९४८ में अहि्मसावादी भारतीय सैनानी मोहनदास करमचंद गांधी की हत्या को हिन्दूत्व विचारधारा से प्रेरित बताया जाता है। [10] गांधी का एकलौता हत्यारा नाथूराम गोडसे १९४० तक राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सदस्य थे। लेकिन गांधी की हत्या को भगवा आतंकी से प्रेरित करार देने पर अभी तक विवाद चल रहा है क्योंकि सरदार वल्लभभाई पटेल, जो उस समय भारत के गृह मंत्री थे, ने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ पर प्रतिबंध लगाया था। लेकिन जाँच अायोग अौर कपूर कमीशन ने १९६९ में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ को क्लीन चिट दे दी।[11] इंडियन नेशनल कांग्रेस प्रवक्ता संजय झा के अनुसार राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ ने अपने सेवकों को गांधी की हत्या से पहले 'किसी बड़ी घटनाक्रम' के लिए इंतजार करने को कहा था अौर फिर गांधी की मृत्यु के बाद राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ ने मिठाईयाँ बाँटी। [12]

६ दिसंबर सन् १९९२ को राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ, १,१५,००० विश्व हिंदू परिषद अौर भारतीय जंता पार्टी के कारसेवकों ने बाबरी मस्ज़िद के सामने एक रैली का आयोजन किया। इस रैली में उमा भारती, मुरली मनोहर जोशी, लाल कृष्ण आडवाणी जैसे प्रमुख हिन्दू राष्ट्रवादी नेताओं ने भाषण दिया था। वे अभी भारतीय जंता पार्टी के प्रमुख नेताओं में से हैं। सूभाष गटाडे के अनुसार, बाबरी मस्ज़िद विध्वंस हिन्दूत्व आतंकवाद की मिसाल है।[13]

केंद्रीय गृह मंत्री रह चुके पी. चिदंबरम ने भगवा आतंकवाद को एक नई घटना बताई।[14] लेकिन बी. रमण, जो मंत्रिमंडल सचिवालय के अपर सचिव रह चुके हैं, उनके अनुसार भगवा आतंकवाद की शुरुआत भारतीय सरकार की पाकिस्तान अौर भारतीय मुसलमान समुदाय, जो आतंकवाद में लिप्त हैं, के प्रति कथित नरम नीति के कारण हुई। उन्होनें हिन्दूत्व व भगवा आतंकवाद को इस्लामी आतंकवाद के मुकाबले कार्यनीतिक स्वभाव का बताया।[15] २००२ में शिवसेना प्रमुख बाल ठाकरे ने इस्लामी आतंकवाद पर रोक लगाने हेतु हिन्दू अात्मघाती हमलावरों का दस्तों बनवाने का अादेश जारी किया था। [16] पाकिस्तिनी खुफिया एजेंसी शिवसेना को एक आतंकवादी संगठन मानती थी। [17] पूर्व गृह सचिव जी. के पिल्लय के अनुसार भगवा आतंकवाद को बड़ी चिंता का एक कारण बताया।[18]

राजनीतिक कनेक्शन[संपादित करें]

हिन्दू राष्ट्रवादी दल, जिन पर भगवा आतंकवादी गतिविधियों का समर्थन करने का या समर्थन देने के अारोप लगे हैं, उनको राजनीतिक पार्टी से कथित तौर पर राजनीतिक मदद या तो फिर खुला समर्थन मिलता है।

भारतीय जनता पार्टी[संपादित करें]

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ, भारतीय जनता पार्टी जैसे राजनीतिक पार्टी से अपने ऊपर भगवा आतंकवादी गतिविधियों के समर्थन का अारोप मिटिने हेतु राजनीतिक मदद माँगती है। [19]राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ को राजनीतिक मदद मिलती भी है। [20] विश्व हिंदू परिषद जैसे दलों को भी मिलता है भारतीय जनता पार्टी से राजनीतिक मदद। [21] हिन्दू राष्ट्रवादी दलों को राजनीतिक मदद देने से वोटरों में फूट डालना अासान होता है, जिसके कारण चुनाव में फायदा हो सकता है। बाबरी मस्ज़िद विध्वंस में कई भारतीय जनता पार्टी के दिग्गजों का हाथ था। [22] २००८ के मालेगाँव धमाके की आरोपी साधवी प्रग्या सिंघ ने भारतीय जनता पार्टी के लिए गुजरात में चुनाव अभियान चलाया था। [23]

शिवसेना[संपादित करें]

विश्व हिंदू परिषद के अायोध्या में राम मंदिर की माँगो को शिवसेना का मिलता है खुला समर्थन। [24] राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ को शिवसेना अौर भारतीय जनता पार्टी के राजनिती में दखलअंदाजी देने में पुरी छुट मिलती है। शिवसेना अौर भारतीय जनता पार्टी के बिच में हुई राजनितिक फूट को सुलझाने के लिए सामने अाते है राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ संघसरचालक मोहन भागवत[25] विश्व हिंदू परिषद का सम्रथन भी उन्हीं पार्टी को जाता है जो हिन्दूत्व विचारधारा का प्रचार करती है। [26]

श्री राम सेना[संपादित करें]

श्री राम सेना का नि्रमाण १९६० में कलकी महाराज द्वारा हुआ था जो शिवसेना के महामहीम बाल ठाकरे के दाहिना हाथ थे। इस पार्टी का भगवा आतंकवाद में प्रत्यक्ष भागीदारी साबित हो चुका है। इस पार्टी का नाम २००६ के मालेगाँव धमाके के पुलिस चार्जशीट में मौजूद था। [27] श्री राम सेना के ४० सदस्य ने मेंगलोर के एक पब में २००९ को कई युवाअों को पीटा। [28]

कथित आतंकवादी ट्रेनिंग कैम्प्स और आतंकवादी[संपादित करें]

पूर्व केंद्रीय गृह मंत्री सुशील कुमार शिंदे ने कहा जाँच रिपोर्ट के अनुसार राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ और भारतीय जनता पार्टी पर आतंकवादी ट्रेनिंग कैम्प्स चलाने के आरोप हैं। इस कथन के लिए सुशील कुमार शिंदे की भारतीय जनता पार्टी के तरफ से भारी आलोचना हुई। [29] सुशील कुमार शिंदे को साबित करने के लिए कांग्रेस सरकार ने १० आतंकवादियों के नाम जारी किए जिनका ताल्लुक़ राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ और कई हिंदू संगठनों के साथ था। [30]

विश्व हिंदू परिषद और बजरंग दल जैसे दल अपने सदस्यों को हथियार चलाने की प्रशिक्षण प्रदान करती है। [31][32] विश्व हिंदू परिषद के महिला सदस्यों को 'दुर्ग वाहिनी' द्वारा प्रशिक्षण मिलती है। [33]

भगवा आतंकवाद की कथित गतिविधियाँ[संपादित करें]

(इस अनुभाग में अंग्रेज़ी विकिपीडिया के Saffron Terror नामक पृष्ठ के अनुभाग Alleged acts of saffron terror का अनुवाद है।)

हिन्दू उग्रवादी संगठनों पर कई आतंकवादी हमलों को अंजाम देने का आरोप लगा है, जैसे २००६ मालेगाँव धमाके, मक्का मस्जिद धमाका (हैदराबाद), समझौता एक्सप्रेस धमाका अौर अजमेर शरीफ दरगाह धमाका।

२००७ समझौता एक्सप्रेस धमाका[संपादित करें]

दो धमाके ने समझौता एक्सप्रेस के दो डिब्बों को १८ फरवरी २००७ की अाधी रात को हिला कर रख दिया था। धमाके के बाद लगी आग में ६८ लोग मारे गए अौर दर्जनों घायल हुए। कथित तौर पर इसे अभिनव भारत, एक हिन्दू कट्टरपंथी संगठन से जोड़ा गया। नवंबर २००८ में सूचना दी गई थी की महाराष्ट्र आतंकवाद-विरोधी दस्तों (ATS) को शक हुआ की यह धमाके प्रसाद श्रीकांत पुरोहित, जो भारतीय सेना का एक अफसर है अौर अभिनव भारत का एक सदस्य भी। पुरोहित ने खुद दावा किया की उन्होंने अभिनव भारत में घुसपैठ की थी। सेना की कोर्ट की जांच के दौरीन, ५९ गवाहों ने उन अफसरों के साथ जिन्होंने गवाही दी, कोर्ट को बताया की वह उग्रवादी संगठनों में घुसपैठ कर खुफिया जानकारी इकट्ठा कर रहा था। ८ जनवरी सन् २०११ में स्वामी असीमानंद, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के एक प्रचारक, ने कबूला की वह समझौता एक्सप्रेस धमाके में उनका हाथ था, एक कथन जिसे उन्होनें तनाव में अाके दिया। असीमानंद ने कहा की उन्हें ज़ोर-ज़बरदस्ती करके गलत बयान देने पर मजबूर किया।[34]

कहा गया है कि लश्कर-ऐ-तैयबा धमाके के लिए दोषी है। [35] अम्रिका ने अरिफ कस्मानी, एक पाकिस्तानी और कथित तौर पर लश्कर-ऐ-तैयबा का वित्तदाता, को २००६ की ट्रेन धमाके और २००७ समझौता एक्सप्रेस धमाके के लिए दोषी थैराया, और उन्हें 'युनाईटेड नेशन्स' (United Nations) द्वारा एक अंतराष्ट्रिय आतंकवादी घोषित कराया। २०१३ तक, भारत में किसी को भी इस अपराध के लिए सज़ा नहीं मिली। [36]

२००७ अजमेर दरगाह धमाका[संपादित करें]

अजमेर दरगाह धमाका ११ अक्टूबर २००७ को सुफी संत मोइनुद्दिन चिस्ती के दरगाह के बाहर राजस्थान के अजमेर शहर में हुअा था, कथित तौर पर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सदस्य द्वारा।[37][38] २२ अक्टूबर सन् २०१० को पाँच अभियुक्त अपराधियों, जिनमें से चार राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सदस्य थे, को गिरफ्तार कर लिया गया। स्वामी असीमानंद ने अपने स्वीकरण में, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ संघसरचालक मोहन भागवत और प्रचारक ईन्द्रेष कुमार को इस हमले का अादेश देने का आरोप लगाया। भावेष पटेल, दुसरा अपराध में अभियुक्त, ने भी यही कहा पर बाद में सुशील कुमार शिंदे पर अौर कई कांग्रेसी नेता पर दबाव का अारोप लगाया। [39][40][41] ८ मार्च २०१७ को अजमेर दरगाह में २००७ में हुए विस्फोट मामले में राष्ट्रीय अन्वेषण अभिकरण की विशेष अदालत ने मुख्य आरोपी स्वामी असीमानंद सहित सात आरोपि, गुप्ता, भावेश पटेल और सुनील जोशी को दोषी माना।[42][43]

२००८ मालेगाँव धमाके[संपादित करें]

[1] २९ सितंबर सन् २००८ को गुजरात और महाराष्ट्र में तीन बम धमाके से ८ लोग मारे गए और ८० घायल हुए। महाराष्ट्र में जांच के दौरान, एक हिन्दू संगठन को कथित रूप से ज़िम्मेदार बताया। गिरपफ्त अारोपी में से तीन लोगों को साधवी प्रग्या सिंघ ठाकुर, शिव नारायण गोपाल सिंघ कलसंघरा अौर श्याम भावरलाल साहू के नाम से पहचाना गया। तीनों को नाशिक में मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट के सामने हाज़िर करवाया, जिसने ३ नवंबर तक तीनों को पुलिस के गिरफ्त में रखने का आदेश दिया। २८ अक्टूबर को शिवसेना ने आरोपियों के हित में कहा की यह गिरफ्तारी महज़ राजनैतिक है। [44] इस बात को प्रत्यय देते हुए, पार्टी मेखिया उद्धव ठाकरे के इशारा किया की रिजनैतिक होड़ में एक संभावित ब्याज का संघर्ष है क्योंकि 'नैश्नल कांग्रेस पार्टी' (NCP) प्रासंगिक मंत्रालय संभाल रहि है। 'नैश्नल जांच एजेन्सी' (NIA) को साधवी प्रग्या सिंघ ठाकुर के खिलाफ कोई भी सबूत नहीं मिला और उनके खिलाफ सारे अारोप गिराने की सलाह दी है। [45]

सेना अफसर प्रसाद श्रिकांत पुरोहित पर भी अारोप लगे थे। लेकिन उसके वकील ने कहा की उन पर रिजनैतिक कारणों से गलत आरोप लगाए जा रहे हैं क्योंकि उनके पास 'स्टूडेंट्स इस्लामिक मूवमेंट आॅफ़ इंडिया' (SIMI) अौर पाकिस्तानी खुफिया एजेन्सी के बारे में खुफिया जानकारी है जिस्से कई राजनेता के पोल खुल सकते है।

मक्का मस्जिद धमाका[संपादित करें]

मक्का मस्जिद धमाका १८ मई २००७ को हैदराबाद के मक्का मस्जिद के अंदर हुई थी। धमाके के तुरंत बाद ही १४ लोगों की मरने की खबर आई। 'नैश्नल जांच एजेन्सी' (NIA), 'सेंट्रल ब्यूरो अाॅफ़ इनवेस्टिगेषन' (CBI) अौर भारतीय 'आतंकवाद विरोधी दस्तोॅ' (ATS) ने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के पुर्व सदस्यों से पूछताछ की। १९ नवंबर २०१० को 'सेंट्रल ब्यूरो अाॅफ़ इनवेस्टिजेषन' (CBI) ने कोर्ट के सामने अपराध के सिमसिमे में स्वामी असीमानंद को पेश किया गया। लेकिन बाद में उन्होंने अपनी गवाही से मूँह मोर लिया अौर उन पर दबाव बनाने का आरोप लगाया। हैदराबाद की 'स्पेशल इनवेस्टिगेषन टीम' (SIT) ने लश्कर-ऐ-तैयबा के 'दक्शिन भारत के कमांडर' को गिरफ्त में लिया जिन्हें शैख अब्दुल खाजा (अजमद) के नाम से पहचाना गया। पुलिस ने कहा की आरोपी का मोहम्मद अब्दुल शहिद बिलाल के साथ संबंध है, धमाके से जुड़ा एक मुख्य संदिग्ध।

दक्शिन एशिया आतंकवाद द्वार, रक्शा अध्ययन और विश्लेषण संस्थान, अम्रिका के राष्ट्रिय आतंकवाद विरोधी सेंटर अौर 'युनाईटेड नेशन्स' (United Nations) ने, किसी भी हिन्दू संगठन को छोड़कर, खबर दी की हरकथ-ऊल-जीहाद अल-ईस्लामी का असल में धमाके में हाथ था। इसको ध्यान में रखते हुए, रक्शा विश्लेषक बहूकुतंब रमण ने दो अलग-अलग संस्करणों पर सवाल उठाए। दक्शिन एशिया आतंकवाद द्वार ने विकार अहमद को मुख्य संदिग्ध घोषित कराया। मोहम्मद अब्दुल शहिद बिलाल, जिसे धमाके से जुड़ा एक मुख्य संदिग्ध माना जाता है, बाध में अंजान बंदूकधारियों द्वारा करांची में ३० अगस्त २००७ को मारे गए।

अंतराष्ट्रिय प्रतिक्रिया[संपादित करें]

अम्रिकी कांग्रेस की रिपोर्ट में हिन्दू अातंकवाद के बढ़ते संकेत पर चिंता जताई थी।[46] पाकिस्तानी तालिबान ने 'युनाईटेड नेशन्स' (United Nations) और अमेरिका को "कश्मीर में भाजपा द्वारा प्रायोजित राज्य आतंकवाद" को रोकने को कहा नहीं तो कश्मीर पर हमला करने की धमकी दी। [47]

आलोचनाएँ[संपादित करें]

पत्रकार बलबिर पुंज ने 'भगवा आतंकवाद' को एक मिथ्या करार किया है और इसे भारतीय जंता पार्टी को आतंकी करार करने के लिए, इंडियन नेशनल कांग्रेस का एक आविश्कार बताया है। पंडित श्री श्री रविशन्कर ने भगवा आतंकवाद को हिन्दू धर्म के प्रति अपमानजनक बताया क्योंकि हिन्दू धर्म सबसे सहिष्णु धर्म है। [48] राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के अनुसार आतंकवाद को भगवा रंग से रंगने की कोशिश की जा रही है। [49]

सन्दर्भ[संपादित करें]

  1. Gatade 2011.
  2. Gatade, Subhash (2011). Godse's Children: Hindutva Terror in India. Pharos Media & Publishing. आई॰ऍस॰बी॰ऍन॰ 81-7221-052-3.
  3. फ्रंटलाईन पत्रिका का लेख
  4. जागरण वेबसाइट
  5. हिन्दू अातंकवाद-इसका मतलब क्या है?
  6. 'हिन्दूत्व आतंकवाद कहो, हिन्दू आतंकवाद नहीं'
  7. हिन्दुत्व
  8. अंग्रेजी विकिपीडिया लेख
  9. अातंक का रंग: भगवा, हरा या काला?
  10. स्वतंत्र भारत का प्रथम आतंकवादी
  11. कपूर कमिशन रिपोर्ट
  12. क्या एक इंसान के या एक विचारधारा ने मारा गांधी को?
  13. भगवा आतंकवाद
  14. भगवा आतंकवाद-एक नई घटना
  15. भगवा आतंकवाद विवाद
  16. बाल ठाकरे का निधन
  17. बाल ठाकरे को मारना चाहती थी आई.एस.आई : हेडली
  18. भगवा आतंकवाद को बड़ी चिंता का एक कारण
  19. भगवा आतंकवाद का आरोप हटाने के लिए राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ ने भारतीय जनता पार्टी से मदद की माँग की
  20. भारतीय जनता पार्टी के एम.पी ने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के हिन्दू राष्ट्र कथन का किया सम्रथन
  21. कोसी परिक्रमा यात्रा, वोटरों में फूट
  22. अड्वानी, उमा और भी कई बाबरी मस्ज़िद विध्वंस से जुड़े हुए |
  23. भगवा आतंकवाद (भारतीय जनता पार्टी की ज़िम्मेदारी)
  24. शिवसेना करेगी विश्व हिंदू परिषद के राम मंदिर की माँगो का समर्थन
  25. मोहन भागवत की शिवसेना और भारतीय जनता पार्टी को साथ-साथ लाने की कोशिश
  26. विश्व हिंदू परिषद उन पार्टी का सम्रथन करेगी जो हिन्दूत्व विचारधारा का प्रचार करेगा
  27. श्री राम सेना पुलिस चार्जशीट में मौजूद
  28. युवा महिलाओं को पब में पीटा
  29. राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ और भारतीय जनता पार्टी पर आतंकवादी ट्रेनिंग कैम्प्स चलाने के आरोप
  30. १० आतंकवादियों के नाम जारी किए जिनका तालूक राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ और कई हिंदू संगठनों के साथ
  31. विश्व हिंदू परिषद सदस्यों को हथियार चलाने की प्रशिक्षण प्रदान करती है
  32. बजरंग दल सदस्यों को हथियार चलाने की प्रशिक्षण प्रदान करती है
  33. दुर्ग वाहिनी
  34. समझौता एक्सप्रेस धमाके का मुख्य आरोपी पकड़ा गया
  35. धमाके के पीछे लश्कर-ऐ-तैयबा: विकि लीक्स
  36. स्वामी असीमानंद की गवाही
  37. "What is the Ajmer Dargah blast case?".
  38. "India jails Hindu radicals for life over Ajmer Sharif shrine blast".
  39. राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ नेता अजमेर चार्जशीट में
  40. भगवा आतंकवाद: अजमेर विस्फोट मामले ने पहले जोड़े बिन्दू
  41. अजमेर विस्फोट मामले
  42. "अजमेर धमाके में बरी स्वामी असीमानंद हैं कौन?".
  43. "Ajmer blast case: Two 'RSS pracharaks' sentenced life imprisonment".
  44. बाल ठाकरे का साधवी प्रग्या को समर्थन
  45. 'नैश्नल जांच एजेन्सी' (NIA) ने साधवी प्रग्या सिंघ के खिलाफ सारे अारोप गिराए
  46. हिंदू आतंकवाद की हाल ही में प्रकट संकेत: अम्रिकी रिपोर्ट
  47. पाकिस्तानी तालिबान का भारतीय जनता पार्टी द्वारा स्वचालित आतंकवादी ट्रेनिंग कैम्प्स पर हमला करने की धमकी
  48. भगवा आतंकवाद को हिन्दू धर्म के प्रति अपमानजनक
  49. आतंकवाद को भगवा रंग से रंगने की कोशिश

आगे पढ़ने के लिए[संपादित करें]

  1. हिन्दुत्व आतंकवाद के उदय