भगवान सिंह ज्ञानी

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डॉ॰ भगवान सिंह ज्ञानी ‘प्रीतम’ (27 जुलाई 1884 - 8 अकतूबर 1962) भारतीय राष्ट्रवादी तथा गदर पार्टी के प्रमुख नेता थे। वे 1914 से 1920 तक ग़दर पार्टी के अध्यक्ष रहे। प्रथम विश्वयुद्ध के समय १९१५ के गदर क्रान्ति में उनकी प्रमुख भूमिका थी। इस क्रान्ति के असफल होने पर वे जापान चले गये थे। उनकी 'हिन्दुस्तान गदर' में प्रकाशित राष्ट्रभक्तिपूर्ण कविताएँ बहुत प्रसिद्ध हैं। बाद में इन कविताओं को 'गदर दी गुँज' के नाम से संकलित किया गया।

जीवन[संपादित करें]

भाई भगवान सिंह का जन्म तरन तारन (उस समय अमृतसर में) में हुआ था। उनकी माता का नाम हर कौर तथा पिता का नाम सरमुख सिंह था। उनकी पढ़ाई मुख्यतः उनके दादा बाबा रतन सिंह की देखरेख में हुई।[1]

सन्दर्भ[संपादित करें]