भक्ति रस

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भक्ति रस: इसका स्थायी भाव देव रति है इस रस में ईश्वर कि अनुरक्ति और अनुराग का वर्णन होता है अर्थात इस रस में ईश्वर के प्रति प्रेम का वर्णन किया जाता है।

उदाहरण[संपादित करें]

अँसुवन जल सिंची-सिंची प्रेम-बेलि बोई

मीरा की लगन लागी, होनी हो सो होई.

इस लेख का श्रोत[संपादित करें]

भक्ति रस की परिभाषा भेद और उदाहरण