ब्रह्मदत्त 'जिज्ञासु'

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पण्डित ब्रह्मदत्त 'जिज्ञासु' (14 अक्टूबर 1882 - 23 दिसम्बर 1964) संस्कृत के विद्वान तथा वैदिक साहित्य के शिक्षक थे। उन्हें 'राष्ट्रीय पण्डित' की पदवी से सम्मानित किया गया था। उन्होने संस्कृत पठन-पाठन की सरलतम विधि विकसित की थी जो पाणिनि के अष्टाध्यायी पर आधारित था।

परिचय[संपादित करें]

पण्डित ब्रह्मदत्त जिज्ञासु का जन्म पंजाब के जालंधर जिले के मल्लूपोटा बंगा में हुआ था। उनका मूल नाम 'लब्भूराम' था। 'ब्रह्मदत्त' नाम उनके गुरु द्वारा दिया गया नाम था। उनके पिता जी का नाम रणदास सारस्वत पाठक और माताजी का नाम श्रीमती परमेश्वरी देवी था।

नौ वर्ष की अल्पायु में ही उनके माता-पिता का देहान्त हो गया। आर्यसमाज के किसी सज्जन ने उन्हें १०वीं कक्षा तक शिक्षित होने में सहायता की। १९१२ में उन्होने घर त्याग दिया तथा अपने गुरु स्वामी पूर्णानन्द से पाणिनीय व्याकरण की शिक्षा ली तथा काशी में वेदांग, उपांग, तथा वैदिक साहित्य का गहन अध्ययन किया।

कृतियाँ[संपादित करें]

  • यजुर्वेद भाष्य विवरण (दो भागों में)

इन्हें भी देखें[संपादित करें]

बाहरी कड़ियाँ[संपादित करें]