बोहाडा नृत्य

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बोहाडा नृत्य मे इस्तेमाल होने वाला धरती मां का मुखोटा

बोहाडा महाराष्ट्र के कोंकण मे एक पारम्परिक नृत्य है जिसमें चहरे पर लकड़ी, कागज या फिर प्लास्टिक के मूखोटे लगाए जाते हैं जिनपर जानवरों, राक्षसों एवं हिन्दू देवी देवताओं के चित्र छपे होते है।[1] यह नृत्य बर्ली, कोली और ठाकर जातीयों द्वारा किया जाता है। इस नृत्य को दिवाली और होली जैसे त्योहारों पर खासकर रात के समय किया जाता है।[2] यह नृत्य जव्हार रियासत के पृथम कोली शासक जयवा मुकने के समय से होता आ रहा है और आज भी जव्हार का शाही इसे बचाए हुए है और सभी प्रकार से समर्थन करता है।[3][4]

संदर्भ[संपादित करें]

  1. Gajrani, S. (2004). History, Religion and Culture of India (अंग्रेज़ी में). Gyan Publishing House. आई॰ऍस॰बी॰ऍन॰ 978-81-8205-062-4.
  2. Bhargava, S. C. Bhatt, Gopal K. (2005). Land and people of Indian states and union territories : (in 36 volumes). 32. Dadra and Nagar Haveli (अंग्रेज़ी में). Gyan Publishing House. आई॰ऍस॰बी॰ऍन॰ 978-81-7835-388-3.
  3. Tribhuwan, Robin D.; Savelli, Laurence (2003). Tribal Masks and Myths (अंग्रेज़ी में). Discovery Publishing House. आई॰ऍस॰बी॰ऍन॰ 978-81-7141-636-3.
  4. Ghurye, Govind Sadashiv (1957). The Mahadev Kolis (अंग्रेज़ी में). Popular Book Depot.