बोलने की आजादी

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बोलने का अधिकार हमारा जन्मजात अधिकार होना चाहिए यदि बोलना बंद कर दिया गया तो हमारी आवाज़ और हमारे विचार सीमित हो जाएंगे।

     इसलिए भारतीय संविधान के अनुच्छेद 19(१) के अंदर हमें बोलने की स्वतंत्रता दी गई है और इसे लागू भी किया गया है , यह हमारा मौलिक अधिकार है अतः हम इसे लेकर न्यायालय में भी का सकते हैं।
          बोलने का अधिकार इसीलिए होना चाहिए जिससे हम अपने विचारों को समाज को बता सके और जागृत कर सकें, लोगों तक अपनी बात पहुंचा सके। कोई बात गलत या सही हो सकती जो बोली गई हो लेकिन क्या पता को बात आज के लिए गलत लग रही हो वही बात कल के लिए हमारा नियम या आदर्श बन जाए और एक प्रेरणास्रोत साबित हो अतः बोलने की आजादी होनी चाहिए।
      हमारी बोलने की आज़ादी वहां सीमित कर देनी चाहिए जंहा इससे राष्ट्र की एकता और अखंडता या फिर इसकी सुरक्षा को खतरा हो । दूसरी ओर बोलने की आज़ादी को वहां भी सीमित होने चाहिए जिससे किसी व्यक्ति को ठेस पहुंचे या उसकी मानहानि हो अर्थात नकारातमकता को फैलने से बचना चाहिए।
       उल्लेखनीय है कि बोलने की आज़ादी को हर राष्ट्र में समान रूप से प्रभावी होना चाहिए जिससे राष्ट्र का विकास हो सके।