बॉलीवुड में लिंगभेद
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हिन्दी चलचित्र (बॉलीवुड) में लिंगभेद से अभिप्राय उस प्रवृत्ति से है जिसमें स्त्रियों के प्रति भेदभाव, रूढ़िबद्ध चित्रण तथा असमान व्यवहार दृष्टिगोचर होता है। इसमें चलचित्रों में स्त्रियों का निरूपण, कैमरे के पीछे कार्यरत स्त्री पुरुषों के मध्य असमानता, तथा प्रतिनिधित्व एवं पूर्वाग्रह से सम्बन्धित व्यापक प्रश्न सम्मिलित हैं।[1]
इतिहास
[संपादित करें]बॉलीवुड में स्त्रियों का चित्रण उद्योग के प्रारम्भ से लेकर वर्तमान तक अत्यन्त परिवर्तित हुआ है। आरम्भिक काल में स्त्रियों को प्रायः रूढ़िबद्ध, अधीनस्थ तथा पितृसत्तात्मक मूल्यों के अनुरूप भूमिकाओं में प्रस्तुत किया जाता था।
प्रारम्भिक काल (१९३०–१९६०)
[संपादित करें]इस काल में स्त्रियों को प्रायः सत्यनिष्ठ, त्यागमयी, तथा पारम्परिक गृह-भूमिकाओं का पालन करने वाली के रूप में दर्शाया गया। वे मुख्यतः पत्नी, माता अथवा पुत्री के रूप में परिवार-मान एवं परम्परा की रक्षक के रूप में चित्रित होती थीं।[उद्धरण चाहिए] मदर इण्डिया (१९५७) जैसी कृतियाँ इस प्रवृत्ति का प्रमुख उदाहरण हैं, जिनमें स्त्री को परिवार तथा राष्ट्र, दोनों की आधारशिला के रूप में प्रस्तुत किया गया।[2]
१९७०–८० के दशक
[संपादित करें]इस अवधि में स्त्री-पात्रों का चित्रण कुछ जटिल अवश्य हुआ, किन्तु वे अभी भी परम्परागत भूमिकाओं तक सीमित रहीं। स्त्रियों को प्रायः कष्ट सहने वाली, मौन रूप से संघर्ष करने वाली, तथा अन्ततः पुरुष-हस्तक्षेप अथवा दैवी शक्ति द्वारा उद्धार प्राप्त करने वाली के रूप में दिखाया गया।[3] सीता और गीता (१९७२) तथा जय सन्तोषी माँ (१९७५) जैसी कृतियाँ इस प्रवृत्ति को रेखांकित करती हैं।[4]
१९९० का दशक
[संपादित करें]१९९० के दशक में पारम्परिक एवं आधुनिक स्त्री चित्रण का मिश्रण दिखाई देता है। कुछ चलचित्रों में स्त्रियों को रूढ़िबद्ध भूमिकाओं में ही रखा गया, जबकि अन्य में उन्हें स्वावलम्बी, व्यवसायोन्मुख, किन्तु प्रायः पुरुष प्रधान संरचना के अधीन दिखाया गया।[5] मोहरा (१९९४) जैसी कृतियों में स्त्रियों को सशक्त भूमिकाओं में दिखाया गया, परन्तु अनेक बार उन्हें केवल दृश्य आकर्षण एवं नृत्य प्रदर्शन तक सीमित कर दिया गया।
२००० के दशक से वर्तमान तक
[संपादित करें]वर्तमान के दशकों में स्त्री पात्रों का चित्रण अधिक स्वायत्त, सशक्त, तथा कथा के केन्द्र में स्थित रूप में उभरकर आया है। इस परिवर्तन में स्त्री निर्देशकों, लेखिकाओं तथा अभिनेत्रियों की बढ़ती उपस्थिति का महत्त्वपूर्ण योगदान है, जिन्होंने पारम्परिक लैंगिक मानकों को चुनौती दी है।[6] क्वीन (२०१४), पिंक (२०१६) तथा छपाक (२०२०) जैसी कृतियाँ स्त्री सम्बन्धी प्रश्नों को प्रमुखता से प्रस्तुत करती हैं।[उद्धरण चाहिए]
लैंगिक असमानताएँ
[संपादित करें]वेतन अन्तर
[संपादित करें]परिमाण
[संपादित करें]अनेक प्रमुख अभिनेत्रियों ने उद्योग में वेतन असमानता पर खुलकर वक्तव्य दिए हैं। उदाहरणतः, लारा दत्ता ने उल्लेख किया है कि अभिनेत्रियों को प्रायः पुरुष अभिनेताओं की तुलना में अत्यल्प पारिश्रमिक प्राप्त होता है।[7] इसी प्रकार, कृति सेनन ने भी इस असमानता पर असन्तोष व्यक्त किया है, यह बताते हुए कि कई पुरुष अभिनेता अपनी हाल की सफलताओं से असम्बद्ध होते हुए भी अत्यधिक पारिश्रमिक प्राप्त करते हैं।[8]
प्रमुख उदाहरण
[संपादित करें]प्रियंका चोपड़ा तथा दीपिका पादुकोण जैसी अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रतिष्ठित अभिनेत्रियों ने भी वेतन-असमानता पर चिंता व्यक्त की है।[9] उन्होंने बताया है कि व्यावसायिक सफलता के बावजूद उन्हें अपने पुरुष सह कलाकारों की तुलना में अत्यल्प पारिश्रमिक दिया गया।[10]
उद्योग व्यवहार
[संपादित करें]वेतन अन्तर केवल कुछ विशिष्ट मामलों तक सीमित नहीं है, किन्तु यह उद्योग में व्यापक रूप से विद्यमान है। ऐतिहासिक उदाहरणों में यह भी देखा गया है कि समान पारिश्रमिक की माँग करने पर अभिनेत्रियों को परियोजनाओं से हटाया भी गया। कंगना रनौत जैसी अभिनेत्रियों ने भी अपनी सफलताओं के उपरान्त समान वेतन की माँग की है, किन्तु परिवर्तन की गति अभी भी धीमी है।[11]
स्त्री प्रधान चलचित्रों पर प्रभाव
[संपादित करें]वेतन-अन्तर का प्रभाव स्त्री-प्रधान चलचित्रों के निर्माण पर भी पड़ता है। ऐसे चलचित्रों को प्रायः कम बजट प्रदान किया जाता है, जिसके कारण अभिनेत्रियों को पारिश्रमिक में कटौती स्वीकार करनी पड़ती है। यह असमान निवेश स्त्री प्रधान कथानकों के अवसरों को सीमित करता है।[12]
परिवर्तन की माँग
[संपादित करें]उद्योग में समान वेतन एवं समान प्रतिनिधित्व की माँग निरन्तर प्रबल हो रही है। अनेक अभिनेत्रियाँ, निर्देशकाएँ तथा सामाजिक कार्यकर्ता इस विषय पर मुखर हैं। स्त्री प्रधान चलचित्रों की बढ़ती व्यावसायिक सफलता ने भी पारम्परिक मानकों को चुनौती दी है।[13]
आयु भेदभाव
[संपादित करें]बॉलीवुड में आयु-भेदभाव भी लैंगिक पक्षपात से जुड़ा हुआ है। अधिक आयु की अभिनेत्रियों को प्रायः पुरुष अभिनेताओं की तुलना में कम अवसर प्राप्त होते हैं।[14]
सांस्कृतिक प्रभाव
[संपादित करें]सामाजिक मानकों का सुदृढ़ीकरण
[संपादित करें]बॉलीवुड की व्यापक लोकप्रियता के कारण उसके द्वारा प्रस्तुत लैंगिक भूमिकाएँ समाज में प्रचलित मान्यताओं एवं दृष्टिकोणों को सुदृढ़ करती हैं।[15]
सौन्दर्य मानकों पर प्रभाव
[संपादित करें]बॉलीवुड में स्त्रियों का चित्रण प्रायः कुछ विशिष्ट सौन्दर्य मानकों, विशेषतः उज्ज्वल वर्ण की प्राथमिकता, को बढ़ावा देता है।[16]
सन्दर्भ
[संपादित करें]- ↑ "Why Bollywood remains 'sexist and regressive'". BBC News. 2023-07-05. अभिगमन तिथि: 2024-07-19.
- ↑ "Feminism and Bollywood: How the portrayal of women has evolved". The Daily Star. 2023-03-08. अभिगमन तिथि: 2024-07-19.
- ↑ "How leading roles for women in Bollywood have evolved over the years". Vogue India. 15 March 2019. अभिगमन तिथि: 2024-07-19.
- ↑ "Feminism and Bollywood: How the portrayal of women has evolved". The Daily Star. 2023-03-08. अभिगमन तिथि: 2024-07-19.
- ↑ "Bollywood And The Portrayal Of Women Characters Over The Years". Feminism in India. 2023-05-11. अभिगमन तिथि: 2024-07-19.
- ↑ "The Evolution Of Women In Bollywood". Film Companion. 6 March 2023. मूल से से 13 March 2023 को पुरालेखित।. अभिगमन तिथि: 2024-07-19.
- ↑ "Lara Dutta opens up on the PAY disparity in Bollywood". Times of India. 2023-07-05. अभिगमन तिथि: 2024-07-19.
- ↑ "Kriti Sanon opens up about the gender pay gap in the industry". Times of India. 2023-07-05. अभिगमन तिथि: 2024-07-19.
- ↑ "In India, The Gender Pay Gap Extends Even To Bollywood". Forbes. 2017-08-30. अभिगमन तिथि: 2024-07-19.
- ↑ "Priyanka Chopra Jonas Reveals Bollywood Gender Pay Gap". IndieWire. 2023-07-05. अभिगमन तिथि: 2024-07-19.
- ↑ "In India, The Gender Pay Gap Extends Even To Bollywood". Forbes. 2017-08-30. अभिगमन तिथि: 2024-07-19.
- ↑ "Kriti Sanon opens up about the gender pay gap in the industry". Times of India. 2023-07-05. अभिगमन तिथि: 2024-07-19.
- ↑ "In India, The Gender Pay Gap Extends Even To Bollywood". Forbes. 2017-08-30. अभिगमन तिथि: 2024-07-19.
- ↑ "Why Bollywood remains 'sexist and regressive'". BBC News. 2023-07-05. अभिगमन तिथि: 2024-07-19.
- ↑ Khudabukhsh, Ashique; Bukhsh, Khuda; Mitchell, Tom (2022-02-01). "Bollywood study reveals history of gender bias reflecting real life". Nature. अभिगमन तिथि: 2024-07-19.