बैरिस्टर सोमदत्त बखोरी

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बैरिस्टर सोमदत्त बखोरी ने हिन्दी प्रचारिणी सभा का सदस्य न होते हुए भी हिंदी परिषद आंदोलन का प्रारंभ किया था। उन्होंने देश भर में अट्ठारह हिन्दी परिषदों की स्थापना की। इस आंदोलन से देश में अनेक नवोदित साहित्यकार प्रेरित और प्रोत्साहित हुए। प्रत्येक परिषद से एक एक प्रतिनिधि बखोरी जी की अध्यक्षता में पोर्ट लुई में एक मासिक बैठक में भाग लेते थे। परिषद द्वरा त्रैमासिक अनुराग पत्रिका का प्रकाशन होता था। परिषद आंदोलन एक अपूर्व साहित्यिक आंदोलन था।[1]


सन्दर्भ[संपादित करें]

  1. पांडेय, राकेश (जनवरी अक्टूबर-दिसम्बर २००५). मारीशस में हिन्दी एक सिंहावलोकन. गीता कालोनी, नई दिल्ली: प्रवासी संसार. पृ॰ १३-१९. |year= में तिथि प्राचल का मान जाँचें (मदद); |access-date= दिए जाने पर |url= भी दिया होना चाहिए (मदद)