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बेंटोनाइट

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बेंटोनाइट

व्योमिंग (अमेरिका} में ज्वालामुखीय राख के अपक्षय से बनी बेंटोनाइट की प्राकृतिक परतें।
बनावट
मोंटमोरिलोनाइट और स्मेक्टाइट समूह के खनिज

बेंटोनाइट एक अत्यधिक अवशोषक और पानी पाकर फूलने वाली विशिष्ट मिट्टी है। इसमें मुख्य रूप से मोंटमोरिलोनाइट खनिज पाया जाता है, जो स्मेक्टाइट समूह का एक हिस्सा है।[1] रासायनिक और संरचनात्मक आधार पर यह मुख्य रूप से दो प्रकार की होती है: सोडियम-बेंटोनाइट और कैल्शियम-बेंटोनाइट। इनमें से सोडियम बेंटोनाइट में पानी को सोखकर अपने मूल आकार से कई गुना अधिक फूलने की अभूतपूर्व क्षमता होती है।

बेंटोनाइट का निर्माण आमतौर पर समुद्री पानी में ज्वालामुखीय राख के रासायनिक अपक्षय के कारण होता है।[2] ताजी खुली चट्टानी सतहों पर इसका रंग सफेद, हल्का नीला या हल्का हरा दिखाई देता है, लेकिन जैसे-जैसे हवा और पर्यावरण के संपर्क में इसका ऑक्सीकरण होता है, यह मलाईदार, पीले, लाल या भूरे रंग में बदल जाता है।[3]

यह मिट्टी अपने विशाल विशिष्ट सतह क्षेत्र के कारण एक उत्कृष्ट अधिशोषक के रूप में कार्य करती है, जिसके कारण सिविल इंजीनियरिंग, तेल ड्रिलिंग, शुद्धिकरण और दवा निर्माण में इसका बड़े पैमाने पर औद्योगिक उपयोग किया जाता है।

इतिहास और नामकरण

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बेंटोनाइट का यह नाम संयुक्त राज्य अमेरिका के व्योमिंग क्षेत्र में स्थित 'बेंटन शेल' के कारण पड़ा, जहाँ 19वीं शताब्दी के उत्तरार्ध में इसके विशाल भंडार की खोज की गई थी। इस भूवैज्ञानिक संरचना का नामकरण 'फोर्ट बेंटन' (मोंटाना) के नाम पर प्रसिद्ध अमेरिकी भूवैज्ञानिकों द्वारा किया गया था।[4] वर्तमान में अमेरिका के अलावा चीन, यूनान (ग्रीस) और भारत इसके सबसे बड़े वैश्विक उत्पादक देश हैं। वर्ष 2018 में पूरी दुनिया में बेंटोनाइट का कुल उत्पादन लगभग 2.04 करोड़ मीट्रिक टन दर्ज किया गया था।[5]

क्रिस्टलीय संरचना और प्रकार

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कोलोराडो में पाई जाने वाली धूसर शेल और बेंटोनाइट की मिश्रित चट्टानी परतें।
कोलोराडो में पाई जाने वाली धूसर शेल और बेंटोनाइट की मिश्रित चट्टानी परतें।

मोंटमोरिलोनाइट खनिज की क्रिस्टलीय संरचना को 2:1 लेयर यूनिट के रूप में जाना जाता है। इसका मतलब है कि इसमें एक ऑक्टाहेड्रल शीट दोनों तरफ से दो टेट्राहेड्रल शीट्स के सैंडविच जैसी जुड़ी होती है। इस पूरी संरचना पर एक हल्का ऋणात्मक विद्युत आवेश होता है, जिसे संतुलित करने के लिए परतों के बीच कैल्शियम या सोडियम के धनायन मौजूद होते हैं। इन परतों के बीच पानी के अणु बहुत आसानी से प्रवेश कर जाते हैं, जिससे यह मिट्टी तेजी से फैलने लगती है।[2]

औद्योगिक और व्यावसायिक उपयोग के आधार पर बेंटोनाइट को मुख्य रूप से निम्नलिखित श्रेणियों में विभाजित किया जाता है:

1. सोडियम बेंटोनाइट

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सोडियम बेंटोनाइट पानी के संपर्क में आने पर असाधारण रूप से फैलती है और अपने सूखे आयतन से लगभग आठ गुना तक बढ़ सकती है। अपने इस उत्कृष्ट कोलाइडल गुण के कारण यह पानी के लिए एक अभेद्य और कम पारगम्यता वाली सुरक्षात्मक दीवार बना लेती है।[6] इसका उपयोग मुख्य रूप से तेल और गैस के कुओं की ड्रिलिंग, लैंडफिल (कचरा डंपिंग यार्ड) के निचले हिस्से को सील करने और परमाणु कचरे के रिसाव को रोकने के लिए किया जाता है।

इसके अतिरिक्त, इसका उपयोग कृषि में 'सल्फर उर्वरक' के साथ मिलाकर किया जाता है, जिससे पौधों को लंबे समय तक आवश्यक पोषक तत्व मिलते रहते हैं।[7]

2. कैल्शियम बेंटोनाइट

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कैल्शियम बेंटोनाइट में सोडियम बेंटोनाइट की तुलना में फूलने की क्षमता बहुत कम होती है, लेकिन यह घोल में मौजूद आयनों, वसा और तेलों को सोखने के लिए एक बेहतरीन अधिशोषक का कार्य करती है।[8] इसे ऐतिहासिक रूप से 'मुलतानी मिट्टी' या 'फुलर्स अर्थ' का मुख्य सक्रिय घटक माना जाता है, जिसका उपयोग प्राचीन काल से ही कपड़ों की सफाई, तेलों को रंगहीन करने और सौंदर्य प्रसाधनों में किया जाता रहा है।[9]

औद्योगिक स्तर पर, कैल्शियम बेंटोनाइट को सोडियम कार्बोनेट के साथ मिलाकर रासायनिक आयन-विनिमय प्रक्रिया द्वारा सोडियम बेंटोनाइट में भी परिवर्तित किया जा सकता है।[10]

3. पोटेशियम बेंटोनाइट

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भूवैज्ञानिक संस्तरों और प्राचीन ज्वालामुखीय इतिहास के अध्ययन में इसे 'पोटाश बेंटोनाइट' भी कहा जाता है। जब स्मेक्टाइट मिट्टी लंबे समय तक पोटेशियम-समृद्ध भूजल के संपर्क में रहती है, तो रासायनिक परिवर्तनों के कारण यह इलाइट नामक गैर-फूलने वाले खनिज में बदल जाती है। औद्योगिक अनुप्रयोगों में इसका उपयोग बहुत सीमित होता है।[11]

मुख्य औद्योगिक अनुप्रयोग

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  • ड्रिलिंग मड: तेल और गैस के कुओं की गहरी खुदाई के दौरान बेंटोनाइट के गाढ़े घोल का उपयोग किया जाता है। यह ड्रिलिंग उपकरणों को ठंडा और चिकना रखता है, कटी हुई चट्टानों के मलबे को बाहर निकालता है, और कुएं की कंक्रीट की दीवारों को ढहने से बचाता है। इसकी अनूठी 'थिक्सोट्रोपिक' प्रकृति के कारण यह हिलाने पर तरल की तरह बहता है और शांत छोड़ने पर तुरंत जेल की तरह गाढ़ा हो जाता है।[12]
  • फाउंड्री और बाइंडर: लोहे और स्टील के कारखानों में ढलाई के लिए सांचे बनाने के लिए रेत में बेंटोनाइट मिलाया जाता है। यह रेत के कणों को आपस में मजबूती से जोड़कर 'ग्रीन सैंड' बनाता है, जो पिघली हुई धातुओं के अत्यधिक उच्च तापमान को आसानी से सहन कर सकता है।[6]
  • शराब और खाद्य पदार्थों का शुद्धिकरण: बेंटोनाइट जलीय घोलों से प्रोटीन के अणुओं को अपनी सतह पर चिपकाकर अलग करने में माहिर है। इसलिए वाइन (शराब), बियर, सिरका और विभिन्न वनस्पति तेलों को साफ और पारदर्शी बनाने के लिए इसका उपयोग निस्पंदन के रूप में किया जाता है।[13]
  • सीलेंट और जियोसिंथेटिक लाइनर: कचरा डंपिंग स्थलों और नहरों के तल में बेंटोनाइट की परतें बिछाई जाती हैं ताकि दूषित पानी रिसकर नीचे शुद्ध भूजल में न मिल सके। आधुनिक निर्माण कार्यों में इसे कृत्रिम चादरों के बीच सैंडविच की तरह दबाकर 'जियोसिंथेटिक क्ले लाइनर्स' बनाए जाते हैं।
  • चिकित्सा और सौंदर्य प्रसाधन: बेंटोनाइट का उपयोग पेट साफ करने वाली दवाओं में और त्वचा रोगों के मलहम में आधार सामग्री के रूप में किया जाता है। सौंदर्य प्रसाधनों में चेहरे के फेस-पैक और विषैले पदार्थों को त्वचा से सोखने के लिए इसका अत्यधिक उपयोग होता है।[14]
  • थाईलैंड में कृषि सुधार: दक्षिण-पूर्वी एशिया, विशेष रूप से पूर्वोत्तर थाईलैंड में अंतरराष्ट्रीय जल प्रबंधन संस्थान के सहयोग से किसानों ने नष्ट हो चुकी रेतीली मिट्टी में बेंटोनाइट क्ले मिलाकर उसकी जल-धारण क्षमता और उत्पादकता में क्रांतिकारी सुधार दर्ज किया है।[15]

आधुनिक निर्माण में बेंटोनाइट स्लरी दीवारें

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आधुनिक गगनचुंबी इमारतों और सबवे के निर्माण के दौरान 'स्लरी वॉल्स' या डायफ्राम दीवारें बनाने के लिए बेंटोनाइट का उपयोग किया जाता है। जब जमीन में गहरे संकीर्ण गड्ढे खोदे जाते हैं, तो आसपास की मिट्टी के भारी हाइड्रोलिक दबाव के कारण गड्ढा ढह सकता है। खुदाई के दौरान उस गड्ढे को बेंटोनाइट और पानी के गाढ़े कोलाइडल मिश्रण से भर दिया जाता है। यह मिश्रण गड्ढे की दीवारों पर विपरीत दबाव बनाकर उसे गिरने से रोकता है। बाद में इस घोल के भीतर ही लोहे के सरिये डालकर नीचे से कंक्रीट भरी जाती है। कंक्रीट भारी होने के कारण बेंटोनाइट स्लरी को ऊपर धकेल देती है, जिसे रीसाइक्लिंग यूनिट में भेजकर अगले गड्ढे के लिए पुनः उपयोग कर लिया जाता है।[16]

इन्हें भी देखें

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सन्दर्भ

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  1. ↑ "ऑक्सफोर्ड लेक्सिको डिक्शनरी: बेंटोनाइट की परिभाषा और भाषाई उत्पत्ति". मूल से से 27 अप्रैल 2021 को पुरालेखित।. अभिगमन तिथि: 14 जून 2026.
  2. 1 2 Nesse, William D. (2000). Introduction to Mineralogy. Oxford University Press.
  3. ↑ Fourth Edition: Glossary of Geology, American Geological Institute
  4. ↑ व्योमिंग स्टेट जियोलॉजिकल सर्वे: बेंटोनाइट की ऐतिहासिक पृष्ठभूमि और आर्थिक महत्व
  5. ↑ "ब्रिटिश जियोलॉजिकल सर्वे: विश्व खनिज उत्पादन और सांख्यिकी रिपोर्ट" (PDF). मूल से (PDF) से 18 अप्रैल 2022 को पुरालेखित।. अभिगमन तिथि: 14 जून 2026.
  6. 1 2 यूएसजीएस प्रोफेशनल पेपर: संयुक्त राज्य अमेरिका में बेंटोनाइट और फुलर्स अर्थ के प्राकृतिक संसाधन
  7. ↑ फर्टिलाइजर रिसर्च: कृषि फसलों के लिए सल्फर/सोडियम बेंटोनाइट उर्वरकों का प्रभाव
  8. ↑ एप्लाइड क्ले साइंस: प्राकृतिक और संशोधित बेंटोनाइट के रियोलॉजिकल गुणों का विवरण
  9. ↑ रॉबर्टसन, आर.एच.एस. (1986)। फुलर्स अर्थ: कैल्शियम मोंटमोरिलोनाइट का इतिहास। वोल्टूर्ना प्रेस, यूके।
  10. ↑ एलीमेंट्स जर्नल: बेंटोनाइट और आधुनिक जीवन पर इसका बहुआयामी प्रभाव
  11. ↑ अमेरिकन मिनरैलॉजिस्ट: स्मेक्टाइट का इलाइट में रूपांतरण और के-बेंटोनाइट चट्टानों का अध्ययन
  12. ↑ कोलाइड और इंटरफ़ेस विज्ञान में प्रगति: बेंटोनाइट निलंबन के रियोलॉजिकल गुण
  13. ↑ फ़ूड केमिस्ट्री जर्नल: वाइन निर्माण में प्रोटीन हटाने के लिए बेंटोनाइट का उपयोग
  14. ↑ यूएसएफडीए: बेंटोनाइट क्ले के औषधीय उपयोग और सुरक्षा चेतावनी डेटाबेस
  15. ↑ "थाईलैंड कृषि रिपोर्ट: बेंटोनाइट क्ले के माध्यम से खराब हो चुकी रेतीली मिट्टी का उपचार" (PDF). मूल से (PDF) से 20 जनवरी 2022 को पुरालेखित।. अभिगमन तिथि: 14 जून 2026.
  16. ↑ वर्जीनिया टेक यूनिवर्सिटी: आधुनिक सिविल इंजीनियरिंग में स्लरी दीवारों का निर्माण और पर्यावरण संरक्षण