बृहस्पतिवार व्रत कथा

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बृहस्पति व्रत
आधिकारिक नाम बृहस्पति
अन्य नाम बृहस्पति
अनुयायी हिन्दू, भारतीय, भारतीय प्रवासी
प्रकार Hindu
समान पर्व सप्ताह के अन्य दिवस

यह उपवास सप्ताह के दिवस बृहस्पतिवार व्रत कथा को रखा जाता है। किसी भी माह के शुक्ल पक्ष में अनुराधा नक्षत्र और गुरुवार के योग के दिन इस व्रत की शुरुआत करना चाहिए। नियमित सात व्रत करने से गुरु ग्रह से उत्पन्न होने वाला अनिष्ट नष्ट होता है।[क्या ये तथ्य है या केवल एक राय है?]

कथा और पूजन के समय मन, कर्म और वचन से शुद्ध होकर मनोकामना पूर्ति के लिए बृहस्पति देव से प्रार्थना करनी चाहिए। पीले रंग के चंदन, अन्न, वस्त्र और फूलों का इस व्रत में विशेष महत्व होता है।

विधि[संपादित करें]

सूर्योदय से पहले उठकर स्नान से निवृत्त होकर पीले रंग के वस्त्र पहनने चाहिए। शुद्ध जल छिड़ककर पूरा घर पवित्र करें। घर के ही किसी पवित्र स्थान पर बृहस्पतिवार की मूर्ति या चित्र स्थापित करें। तत्पश्चात पीत वर्ण के गंध-पुष्प और अक्षत से विधिविधान से पूजन करें। इसके बाद निम्न मंत्र से प्रार्थना करें-

धर्मशास्तार्थतत्वज्ञ ज्ञानविज्ञानपारग। विविधार्तिहराचिन्त्य देवाचार्य नमोऽस्तु ते॥ तत्पश्चात आरती कर व्रतकथा सुनें।

बृहस्पतिवार व्रत के दिन क्या करें

इस दिन एक समय ही भोजन किया जाता है। व्रत करने वाले को भोजन में चने की दाल अवश्य खानी चाहिए। बृहस्पतिवार के व्रत में कंदलीफल (केले) के वृक्ष की पूजा की जाती है। == बृहस्पतिवार की कथा==?

लाभ[संपादित करें]

बृहस्पतिवार व्रत के पूजन से स्त्री-पुरुष को वृहस्पतिदेव की अनुकम्पा से धन-संपत्ति का अपार लाभ होता है।[क्या ये तथ्य है या केवल एक राय है?] परिवार में सुख तथा शांति रहती है।[क्या ये तथ्य है या केवल एक राय है?] स्त्रियों के लिए बृहस्पतिवार का व्रत बहुत शुभ फल देने वाला है।[क्या ये तथ्य है या केवल एक राय है?] बृहस्पतिवार की पूजा के पश्चात कथा सुनने का विशेष महत्व है।[क्या ये तथ्य है या केवल एक राय है?] बृहस्पतिवार के व्रत करने और कथा सुनने से विद्या का बहुत लाभ होता है।[क्या ये तथ्य है या केवल एक राय है?] बृहस्पतिवार का नियमित व्रत रखने वाली स्त्री की सभी मनोकामनाएँ पूर्ण होती हैं।[क्या ये तथ्य है या केवल एक राय है?]

इन्हें भी देखें[संपादित करें]

सन्दर्भ[संपादित करें]