बृहत् तंत्रसार
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| लेखक | कृष्णानन्द आगमवागीश Editor: Rasik Mohon Chattapadhhayay |
|---|---|
| अनुवादक | श्री चन्द्रकुमार तर्कालंकार |
| भाषा | Bengali |
| विषय | Bengali Shaktism, Kali puja |
| शैली | तन्त्र |
| प्रकाशक | Nababharat Publishers |
| प्रकाशन तिथि | फाल्गुन, 1285 बंगाब्द |
| प्रकाशन स्थान | India |
| मीडिया प्रकार | Printed texts |
| पृष्ठ | 771 |
बृहत् तंत्रसार या तंत्रसार, तंत्र का प्रसिद्ध ग्रन्थ है जिसके रचनाकार प्रसिद्ध तांत्रिक कृष्णानन्द आगमवागीश हैं। यह तंत्र-साधना के १७० ग्रंथों पर आधारित है।[1] इसमें दशमहाविद्याओं की सामाजिक अराधना का ग्रन्थ है।
उनके इस ग्रन्थ की पूरे भारत में बड़ी प्रसिद्धि है।[2] कृष्णानन्द बड़े उदार थे, इसलिए उन्होंने इस ग्रन्थ की रचना के लिये शैव, गणपति, शाक्त, वैष्णव और सौर सम्प्रदाय के विभिन्न आगम ग्रन्थों का सार लेकर इसमें सम्मिलित कर लिया।[3]
सन्दर्भ
[संपादित करें]- ↑ Harding, Elizabeth U. (1998). Kali: The Black Goddess of Dakshineswar (अंग्रेज़ी भाषा में). Motilal Banarsidass Publ. p. 217. ISBN 978-81-208-1450-9.
- ↑ Samājadāra, Maṇīndranātha (1987). Saṃskr̥ta-Prākr̥ta-Abahaṭṭha sāhityera itibr̥tta (Bengali भाषा में). Bāṃlā Ekāḍemī. p. 70.
- ↑ বন্দ্যোপাধ্যায়, দেবাশিস. "কৃষ্ণানন্দকে সামনে দেখে জিভ কাটলেন কৃষ্ণাঙ্গী বধূ - Anandabazar". anandabazar.com (Bengali भाषा में). अभिगमन तिथि: 2020-12-02.