बुलबुल तरंग

बुलबुल तरंग (अन्य नाम भारतीय बैंजो) एक भारतीय तंतुवाद्य यंत्र है। यह जापानी वाद्य यंत्र ताइशोगोतो से विकसीत हुआ है और ऐसा माना जाता है कि 1930 के दशक में यह दक्षिण एशिया में पहुँचा।[1]
बुलबुल तरंग अस्मय के साथ विकसीत हुआ। वर्तमान में बुलबुल तरंग में कुल 14 तंतु होते हैं जिन्हें 3 भागों में विभक्त किया जाता है: इनमें 2 मुख्य (मेलोडी और बेस) तंतु, 4 झाला तंतु और 8 स्वरमंडल तंतु शामिल हैं। ये तंतु एक फ्रेटबोर्ड के ऊपर से गुजरते हैं जिसे हिन्दी में 'सुरपट्टी' कहा जाता है; इसके ऊपर टाइपराइटर की चाबियों जैसी कुंजियाँ होती हैं और इन्हें दबाने से तंतु दब जाते हैं या छोटे हो जाते हैं। इससे उनकी पिच (स्वर की ऊँचाई) बढ़ जाती है।[1]
ताइशोगोतो के बारे में माना जाता है कि इसे 1930 के दशक में भारत लाया गया था। यह भारतीय उपमहाद्वीप में लोकप्रिय हुआ और यहाँ मान्यता प्राप्त वाद्ययंत्र बन गया। अब इसे 'बुलबुल तरंग' (बुलबुल की मधुर, झरने जैसी बहते स्वर) या इंडियन बैंजो कहा जाता है।[1]
सन्दर्भ
[संपादित करें]- 1 2 3 कैथवास, वैभव (2024). हिन्दुस्तानी मौसिक़ी में रुहानी क़व्वाली. आगरा: श्री विनायक पब्लिकेशन. p. 38. ISBN 9789391267612.