बुरुली अल्सर

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बुरुली अल्सर
वर्गीकरण एवं बाह्य साधन
Buruli ulcer left ankle EID.jpg
घाना से एक व्यक्ति की टखने पर बुरुली अल्सर।
आईसीडी-१० A31.1 (ILDS A31.120)
आईसीडी- 031.1
डिज़ीज़-डीबी 8568
एम.ईएसएच D009165

बुरुली अल्सर (जिसे बार्न्सडेल अल्सर, सियर्ल्स अल्सर, या डेनट्री अल्सर भी कहा जाता है[1][2][3]) एक संक्रामक रोग है जो माइकोबैक्टीरियम अल्सेरांस के कारण होता है।[4] इस संक्रमण की शुरुआती अवस्था में दर्दरहित गाँठ या सूजन देखने को मिलती है।[4] यह गाँठ अल्सर में बदल सकती है।[4] यह अल्सर जितना त्वचा पर दिखाई पड़ता है उसकी तुलना में अंदर कहीं अधिक बड़ा हो सकता है,[5] और इसके चारों ओर सूजन हो सकती है।[5] जैसे-जैसे यह बीमारी बिगड़ती जाती है, इससे हड्डी भी प्रभावित हो सकती है।[4] बुरुली अल्सर आमतौर पर हाथ या पाँवों पर होते हैं;[4] कभी-कभार बुखार भी आ सकता है।[4]

कारण[संपादित करें]

M. ulcerans (एम. अल्सेरांस) माइकोलैक्टोन नामक एक विषैला पदार्थ निकालता है, जो शरीर की रोग प्रतिरोधक प्रणाली की कार्यक्षमता को कमजोर करता है और इसीके चलते ऊतकों की मृत्यु होती है।[4] इसी वर्ग के बैक्टीरिया के चलते ये रोग भी होते हैं - टीबी यानी क्षय रोग और कुष्ठ रोग (M. tuberculosis और M. leprae, क्रमश:)।[4] रोग का फैलाव कैसे होता है, यह अभी नहीं पता चला है।[4] लेकिन इस फैलाव में जलस्रोतों की भूमिका हो सकती है।[5] इसके लिए 2013 तक किसी कारगर वैक्सीन यानी टीके की खोज नहीं हो पाई है। [4][6]

इलाज[संपादित करें]

यदि लोगों को ज़ल्दी इलाज मिल जाए तो एंटीबायटिक का आठ सप्ताह तक का सेवन 80% तक प्रभावी होता है।[4] इस रोग के उपचार में अक्सर रिफाम्पिसिन और स्ट्रेप्टोमाइसिन का प्रयोग होता है।[4] कभी-कभार स्ट्रेप्टोमाइसिन के स्थान पर क्लेरिथ्रोमाइसिन या मॉक्सीफ्लॉक्सासिन का प्रयोग होता है।[4] इसके उपचार में अल्सर को काटकर फेंक देना भी शामिल हो सकता है।[4][7] जब घाव भर जाता है तो उस जगह पर आमतौर पर निशान रह जाता है।[6]

व्यापकता[संपादित करें]

बुरुली अल्सर अधिकांशतया ग्रामीण उप-सहारा अफ्रीका में, और ख़ासतौर से आइवरी कोस्ट में, अधिक होता है लेकिन यह एशिया, पश्चिमी प्रशांत और अमेरिका में भी हो सकता है।[4] 32 से अधिक देशों में इसके मामले देखने को मिले हैं।[5] हर वर्ष पाँच से छह हजार मामले प्रकाश में आते हैं।[4] यह रोग इंसानों के अलावा कई पशुओं में भी होता है।[4] अल्बर्ट रस्किन कुक पहले व्यक्ति थे जिन्होंने 1897 में बुरुली अल्सर रोग की व्याख्या की थी।[5]

सन्दर्भ[संपादित करें]

  1. James, William D.; Berger, Timothy G.; एवं अन्य (2006). Andrews' Diseases of the Skin: clinical Dermatology. Saunders Elsevier. पृ॰ 340. आई॰ऍस॰बी॰ऍन॰ 0-7216-2921-0.
  2. Rapini, Ronald P.; Bolognia, Jean L.; Jorizzo, Joseph L. (2007). Dermatology: 2-Volume Set. St. Louis: Mosby. Chapter 74. आई॰ऍस॰बी॰ऍन॰ 1-4160-2999-0.
  3. Lavender CJ, Senanayake SN, Fyfe JA; एवं अन्य (January 2007). "First case of Mycobacterium ulcerans disease (Bairnsdale or Buruli ulcer) acquired in New South Wales". Med. J. Aust. 186 (2): 62–3. PMID 17223764.
  4. "Buruli ulcer (Mycobacterium ulcerans infection) Fact sheet N°199". World Health Organization. June 2013. अभिगमन तिथि 23 February 2014.
  5. Nakanaga, K; Yotsu, RR; Hoshino, Y; Suzuki, K; Makino, M; Ishii, N (2013). "Buruli ulcer and mycolactone-producing mycobacteria". Japanese journal of infectious diseases. 66 (2): 83–8. PMID 23514902.
  6. Einarsdottir T, Huygen K (November 2011). "Buruli ulcer". Hum Vaccin. 7 (11): 1198–203. PMID 22048117. डीओआइ:10.4161/hv.7.11.17751.
  7. Sizaire V, Nackers F, Comte E, Portaels F (2006). "Mycobacterium ulcerans infection: control, diagnosis, and treatment". Lancet Infect Dis. 6 (5): 288–296. PMID 16631549. डीओआइ:10.1016/S1473-3099(06)70464-9.