बुराई की समस्या

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(अंग्रेजीः Problem of evil) यह दर्शन की एक प्रसिद्ध समस्या है। मनुष्य अन्य मनुष्यों के कर्म व्यवहार स्वभाव प्रवृत्ति और वाणी से प्रभावित या अप्रभावित होकर उसे पसंद करते है या नापसंद करते है कभी कभी पसंद और नापसंद जैसे मनोस्थित मनुष्यों के उम्र कर्म ज्ञान के अनुसार परिवर्तित होती है ।

किसी मनुष्य से प्रभावित होकर उसे पसंद करना या उसके जीवन का अनुसरण करना या उसका अनुयायी बन जाना            
जो स्त्री पुरूष अविवाहित होते है वे और उनके प्रियजन  उन्हें विवाह सम्बन्ध में जोड़ने के लिए उम्र संस्कृति रूप रंग सम्पन्नता प्रतिष्ठा का अवलोकन कर विवाह करते है या फिर उचित वर वधु की तलाश करते है ।

मानव समाज में ऐसे भी लोग भी है जो अपने माता पिता भाई बहन दादा दादी सास ससुर आदि रिश्तेदारो के व्यवहार स्वभाव प्रवृत्ति ज्ञान और कार्यो से प्रभावित होकर होने अत्याधिक पसंद करते है उनके कहे शब्दों का अनुसरण कर जीवनयापन करते है । विश्व में ऐसे भी मनुष्य है जो लोगों के कार्यो अनुसार उन्हें पसंद और नापसंद करते है जैसे किशोर व युवा फिल्मी कलाकार की आदाकारी या खिलाड़ी के खेल ,संगीतकार के संगीत से प्रभावित होकर उसे पसंद करती है इसमें बच्चे बुजुर्ग भी शामिल है ये ऐसे मनुष्य है जो जीवन में आनंद व मनोरंजन की इच्छा करते है जो इनका मनोरंजन करता है उसे ये पसंद करते है । जो मनुष्य अधिकारी शासक राजनेता के कार्यों वाणी से प्रभावित होकर उसे पसंद करता है उनकी मानसिकता शिक्षा आधुनिकीकरण सुरक्षा का विकास चाहता है देश शहर गांव या वहां प्रसिध्द प्रतिष्ठा से उच्च व वाणी का उचित प्रयोग करने वाले मनुष्य से प्रभावित होकर उन्हें पसंद करते है । कुछ धार्मिक गुरूओं या महात्माओ को पसंद करते है ऐसे मनुष्य संसार में भेदभाव हिंसा पाप देखकर या उस गतिविधि से प्रभावित होकर स्वयं का मन अशांत हो गया है इसलिए वे धार्मिक वचन सुनकर उनके हृदय की व्याकुलता बैचेनी दूर होती है सभी मनुष्य अपने कर्मों को करके बुर्जुग अवस्था में अशांति को प्राप्त करते है इसलिए वे अपना मन शांत करने के लिए धार्मिक उपदेश सुनते है कुछ आस्था के कारण कुछ अन्य मनुष्यों को देख सुनकर धार्मिक गुरूओं या महात्माओ का उपदेश सुनते है या पढते है ।

परन्तु विश्व में अधिकांश मनुष्य अन्य मनुष्यों के कर्म से कम ज्यादा प्रभावित होते । मानव समाज में ऐसे मनुष्यों के अधिकता है जो मनोरंजन करने वाले शासन करने वाले धर्म उपदेश देने वाले मनुष्य से प्रभावित ना होकर अपने निजी जीवन व परिवार के सुख सुविधा उन्नति के लिए शारीरिक व मानसिक परिश्रम करके धन व नाम कमाते है ये सिर्फ अपने धर्म वचन को ही मानकर ही जीवनयापन करते है । विश्व में ऐसे बहुत ही कम मनुष्य है जो भोजन वस्त्र गृह के प्राप्ति के लिए कर्म करते है ।

कौन मनुष्य किसे प्रभावित होगा किसे नहीं देश शहर गांव परिवार लिंग उम्र शारीरिक रूप रंग ज्ञान व उस मनुष्य के संसार के कर्मो पर निर्भर करता है ।  

बहुत ही कम मनुष्य धन दौलत नाम प्रसिध्द प्रतिष्ठा रूप रंग को देखकर प्रभावित होकर किसी मनुष्य को पसंद व नापसंद करते है ।

 किसी को पसंद करना उसके जीवन का अनुसरण करना या उसका अनुयायी बनना प्रभावित होने पर है 

जो कम प्रभावित है वहां पसंद करेगा जो अधिक प्रभावित होगा वह उसका अनुसरण करेगा जो अत्याधिक प्रभावित है वहां अनुयायी बन जाऐगा ।

जिसे मनोरंजन चाहिए व मनोरंजन करने वालों से प्रभावित होगा ।

जिसे उन्नति विकास सम्पन्नता चाहिए देश दुनिया या खुद का वहां संसार का आधुनिकीकरण व विकास करने वालों से प्रभावित होगा । जो मनुष्य मन की शांति चाहता है वहां धार्मिक उपदेश देने वाले से प्रभावित होगा ।

  बहुत ही कम लोग उघोगपति वैज्ञानिकों व माफिया के लोगों के कर्म ज्ञान गुण को देखकर प्रभावित होते है ।
जो मनुष्य अन्य मनुष्य के कर्मो ज्ञान से प्रभावित नहीं होता है वहां उसका विरोधी या शत्रु भी बन सकता है । विश्व के अधिकांश मनुष्य किसी से ना प्रभावित होते  है ना उसे ध्यान देते है वे अपने जीवन के गतिविधि में व्यस्त रहते है ।