बुखारा साम्राज्य
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बुखारा ख़ानत (फ़ारसी: خانات بخارا, उज़्बेक: Bukhoro Xonligi) मध्य एशिया में स्थित एक उज़्बेक राज्य था, जो 1501 से 1785 तक अस्तित्व में रहा। इसे अबू'ल-ख़ैरिद वंश (Shaybanid वंश की एक शाखा) द्वारा स्थापित किया गया था। प्रारंभ में, बुखारा राजधानी नहीं थी, लेकिन 1533 से 1540 के बीच उबैदुल्लाह ख़ान के शासनकाल में इसे अस्थायी रूप से राजधानी बनाया गया।
इस ख़ानत का स्वर्ण युग अब्दुल्लाह ख़ान द्वितीय (1557–1598) के शासनकाल में आया, जब इसकी सीमा और प्रभाव दोनों चरम पर थे। 17वीं और 18वीं शताब्दी में, इसे जानिद वंश (Astrakhanids या Toqay Timurids) द्वारा शासित किया गया, जो चंगेज़ ख़ान के अंतिम प्रत्यक्ष वंशज थे जिन्होंने बुखारा पर शासन किया।
बुखारा ख़ानत | |||||||||||
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| 1501–1785 | |||||||||||
| Status | संप्रभु ख़ानत | ||||||||||
| राजधानी | बुखारा (1533–1785) समरकंद (1501–1533) | ||||||||||
| प्रचलित भाषा(एँ) | फ़ारसी (आधिकारिक), चगताई तुर्की | ||||||||||
| धर्म | सुन्नी इस्लाम (नक्शबंदी सूफ़ीवाद) | ||||||||||
| सरकार | ख़ानत (मोनार्की) | ||||||||||
| ख़ान | |||||||||||
| ऐतिहासिक युग | मध्य युग - प्रारंभिक आधुनिक काल | ||||||||||
• मुहम्मद शिबानी द्वारा तैमूरी साम्राज्य से बुखारा पर कब्ज़ा | 1501 | ||||||||||
• जानिद वंश की स्थापना | 1599 | ||||||||||
• नादिर शाह द्वारा विजय | 1740 | ||||||||||
• मांगित वंश सत्ता में आया | 1747 | ||||||||||
• बुखारा अमीरात की स्थापना | 1785 1785 | ||||||||||
| मुद्रा | बुखारी तंगा फ़ारसी अब्बासी | ||||||||||
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| अब जिस देश का हिस्सा है | |||||||||||
1740 में, फारस के शाह नादिर शाह ने इसे जीत लिया। नादिर शाह की मृत्यु (1747) के बाद, यह राज्य उज़्बेक अमीर ख़ुदायार बी के वंशजों के नियंत्रण में आ गया, जिनकी सत्ता अतालीक (प्रधानमंत्री) के रूप में स्थापित थी।
1785 में शाह मुराद ने आधिकारिक रूप से मांगित वंश की सत्ता स्थापित की और बुखारा ख़ानत को बुखारा अमीरात (Emirate of Bukhara) में बदल दिया। मांगित वंश के शासक चंगेज़ ख़ान के वंशज नहीं थे, इसलिए उन्होंने "ख़ान" के बजाय "अमीर" की उपाधि ग्रहण की।
शिबानी वंश और प्रारंभिक विस्तार (1501–1598)
[संपादित करें]1501 में, मुहम्मद शिबानी (Shaybanid वंश के संस्थापक) ने तैमूरी साम्राज्य से बुखारा पर कब्ज़ा कर लिया और इसे अपनी राजधानी बनाया। इसके बाद, शिबानी ख़ान और उनके उत्तराधिकारियों ने समरकंद, ताशकंद, और अंदीजन पर कब्ज़ा कर लिया।[1]
जानिद वंश (1599–1747)
[संपादित करें]शिबानी वंश के बाद, 1599 में जानिद वंश सत्ता में आया। उन्होंने बुखारा में फ़ारसी संस्कृति और इस्लामी शिक्षा को बढ़ावा दिया।[2]
मांगित वंश और अमीरात की स्थापना (1747–1785)
[संपादित करें]1747 में, मांगित वंश के प्रमुख मुहम्मद रहीम बी ने सत्ता अपने हाथ में ले ली। 1785 में शाह मुराद ने औपचारिक रूप से बुखारा अमीरात की स्थापना की और ख़ानत का अंत कर दिया।[3]
निष्कर्ष
[संपादित करें]बुखारा ख़ानत मध्य एशिया का एक महत्वपूर्ण ऐतिहासिक राज्य था, जिसने तुर्क-मंगोल परंपरा और फ़ारसी संस्कृति का अनूठा समावेश किया। 1785 में बुखारा अमीरात के रूप में इसका अंत हुआ।[3]
संदर्भ
[संपादित करें]- ↑ "Bukhara Khanate". Oxford Reference (अंग्रेज़ी भाषा में). डीओआई:10.1093/oi/authority.20110803095534548?p=emaila2hw/mnrqfivq&d=/10.1093/oi/authority.20110803095534548. अभिगमन तिथि: 2025-01-31.
- ↑ "The Khanate (emirate) of Bukhara". unesdoc.unesco.org. अभिगमन तिथि: 2025-01-31.
- 1 2 Foundation, Encyclopaedia Iranica. "Welcome to Encyclopaedia Iranica". iranicaonline.org (अमेरिकी अंग्रेज़ी भाषा में). अभिगमन तिथि: 2025-01-31.