बीकानेर की जातियां

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हिंदुओं में ब्राह्मण, राजपूत,राजपुरोहित, महाजन, मेघवाल, सुथार, कायस्थ, जाट, चारण, भाट, सुनार, दर्जी, लुहार, खाती (बढ़ई), कुम्हार, तेली, माली, नाई, धोबी, गूज्जर, कंजर, अहीर, गोंसाई, स्वामी, भार्गव ज्योतिषी, कलाल, लेखरा, छींपा, सेवक, भगत, भड़भूंजा, रैगर, मोची, चमार आदि कई जातियाँ हैं। ब्राह्मण, महाजन आदि कई जातियों की अनेक उपजातियाँ भी बन गई है जिनमें परस्पर विवाह संबंध नही होता, जैसे-ब्राह्मणों में गोड़ ब्राह्मण और वैष्णव (बैरागी) और आदिवासियों में भील, बावरी, थोरी आदि हैं। ये लोग खेती और मजदूरी करते हैं। मुसलमानों में चुनगर, व्यापारी, तेली, खलीफा, कुरैशी, भुट्टा ,नागौरी व्यापारी, शेख, सैयद, मुगल, पठान, कायमख़ानी, राठ, जोहिया, रंगरेज, भिश्ती और कुंजड़े आदि कई जातियाँ हैं।

यहाँ के अधिकांश लोग खेती करते हैं। शेष व्यापार, नौकरी, दस्तकारी, मजदूरी अथवा लेन-देन का कार्य करते हैं। पशु पालन यहाँ का मुख्य पेशा है। परीज़ादे और राढ जाति के मुसलमान इस धंधे में लिप्त है। व्यापार करने वाली जातियों में प्रधान महाजन हैं, जो दूर-दूर स्थानों में जाकर व्यापार करते हैं और ये वर्ग संपन्न वर्ग भी है। ब्राह्मण विशेषकर पूजा-पाठ तथा पुरोहिताई करते हैं, वैष्णव (बैरागी) ब्राह्मण मुख्यत: मंदिरो और मठो में महंत या पुजारी होते है। परंतु कोई-कोई व्यापार, नौकरी तथा खेती भी करते हैं। कुछ महाजन कृषि से भी अपना निर्वाह करते हैं। राजपूतें का मुख्य पेशा सैनिक-सेवा है, किंतु कई खेती भी करते है।

वैसे आज कल जाति आधारित कार्य बन्द हो चुके हैं। ब्राह्मण भी नौकरी कर रहा है, व्यवसाय कर रहा है, खेती कर रहा है, तो महाजन भी किसी के अधीन काम कर रहा है। कुल मिलाकर अब वो कर्म प्रधान जाति का समय जा चुका है।

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