बिहारी लाल हरित

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बिहारी लाल हरित
जन्म 13 दिसम्बर,1913
मृत्यु 26 जून,1999

बिहारी लाल हरित हिंदी दलित कविता के प्रसिद्ध हस्ताक्षर रहे हैं। हीरा डोम और स्वामी अछूतानंद जैसे प्रारंभिक दलित रचनाकारों की श्रेणी में 'हरित' का नाम लिया जाता है।[1] सन 1940 से 1980 के दशक तक दलित हिंदी कविता धारा के क्षेत्र में 'हरित' एवं उनके शिष्यों का प्रभाव रहा है। उनके प्रभाव का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि 70-80 के दशक में टेलीविजन पर एक ही चैनल दूरदर्शन आता था, उस समय दूरदर्शन और आकाशवाणी पर 'हरित' की कविताओं का प्रसारण अनेक अवसरों पर किया जाता था ।

विशिष्ट योगदान[संपादित करें]

दलित समाज के प्रसिद्ध नारे जय भीम की रचना का श्रेय बिहारीलाल हरित को है। उन्होंने ही 1946 में डॉक्टर भीमराव अंबेडकर के जन्म दिवस समारोह के अवसर पर पहली बार दिल्ली में डॉ आंबेडकर की उपस्थिति में एक कविता के माध्यम से जय भीम का उद्घोष किया था । कविता के बोल थे :

नवयुवक कौम के जुट जावें सब मिलकर कौम परस्ती में,
जय भीम का नारा लगा करे भारत की बस्ती-बस्ती में ।

दलित साहित्य की अवधारणा[संपादित करें]

डॉक्टर अंबेडकर को दलित समाज के घर घर तक पहुंचाने तथा जनमानस को अंबेडकर के प्रति श्रद्धा से भरने के लिए हरित जी ने 1973 में 'भीमायण' महाकाव्य की रचना की। अभिमान की एक विशेषता यह भी है कि इसमें उन्हीं छंदों का प्रयोग किया गया है जिनका प्रयोग तुलसीदास ने रामचरितमानस में किया है। यह साहित्य के उन आचार्य आलोचकों के लिए एक सशक्त जवाब है जो दलित रचनाकारों में कौशल की संभावनाओं को नकारते हैं।[2]

वीरांगना झलकारी बाई हरित जी का दूसरा महत्वपूर्ण काव्य ग्रंथ है जिसमें देश के स्वाधीनता आंदोलन के दौरान झांसी की रानी लक्ष्मीबाई की जान बचाने के लिए अंग्रेजी सेना से वीरता पूर्वक लड़का अपने प्राणों का उत्सर्ग करने वाली दलित वीरांगना झलकारी बाई के शौर्य और बलिदान की गौरव गाथा का चित्रण कर इतिहास के उन प्रसंगों और घटनाओं की ओर समाज और राष्ट्र क्या ध्यान आकृष्ट करने का सार्थक प्रयास किया गया है जो दलितों के राष्ट्र प्रेम त्याग और शौर्य से परिपूर्ण है। प्रसिद्ध दलित राजनेता और देश के भूतपूर्व उप प्रधान मंत्री बाबू जगजीवन राम के जीवन पर आधारित जग जीवन ज्योति नामक एक चंपू काव्य की रचना भी उन्होंने की।

बिहारीलाल हरित अभिमान के कवि थे। सन 1940 में हापुर उत्तर प्रदेश निवासी चर्चित शायर जिनका उपनाम 'बूंम' था उसने चमारी नामा नामक एक लघु पुस्तिका लिखी जिसमें दलित स्त्रियों पर आपत्तिजनक टिप्पणी की गई थी। हरित जी का मानस दलितों के प्रति बूम की आपत्तिजनक टिप्पणियों साहब और आंदोलित हुआ और उन्होंने चमार नामा लिखकर बूंम का सटीक जवाब दिया। इसके अलावा भी बिहारीलाल हरित ने अन्य कई पुस्तकें लिखी जिनमें अछूतों का बेताज बादशाह प्रमुख है। हिंदी दलित साहित्य में कई महाकाव्य रचे गए जिनमें बिहारीलाल हरित कृत्य भीमायण, जग जीवन ज्योति कथा वीरांगना झलकारी बाई प्रसिद्ध है। इस प्रकार सन 40 से लेकर 80 के दशक तक दलित समाज में अंबेडकरी आंदोलन के प्रचार प्रसार में हरित जी की महत्वपूर्ण साहित्यिक सभा रही है इनकी काव्य संवेदना का निर्माण असमानता शोषण और अन्याय के प्रतिकार का उद्वेलन है जिसका संबंध समाज में व्याप्त कुरीतियों को मिटाने से है। हरित जी दलित चेतना के समर्थ रचनाकार हैं जिन की कविताओं में प्रतिरोध की भावना प्रबल दिखती है।

सामाजिक योगदान[संपादित करें]

बिहारी लाल हरित का समाज सेवी के रूप में एक विशेष स्थान रहा है। पूर्वी दिल्ली के विकास में हरित का विशेष योगदान है। शाहदरा स्थित "बिहारी कालोनी" आज बिहारी लाल हरित के नाम से है।

प्रसिद्ध रचनाएं[संपादित करें]

  • भीमायण महाकाव्य (1973)
  • वीरांगना झलकारी बाई महाकाव्य (1995)
  • जग जीवन ज्योति महाकाव्य (1978)
  • गुरू दक्षिणा (नाटक) (1969)
  • देवासुर संग्राम (नाटक)
  • चमार नामा
  • अछूतों का बेताज बादशाह (1946)
  • अछूतों का पैगम्बर ।(1946)[3]
  • आजादी की लड़ाई (1947)[4]

जन्म[संपादित करें]

जन्म : 13 दिसम्बर, 1913 को पूर्वी दिल्ली के तेलीवाड़ा, शाहदरा में हुआ था।

संदर्भ[संपादित करें]

  1. "संग्रहीत प्रति". मूल से 26 मई 2020 को पुरालेखित. अभिगमन तिथि 3 जून 2020.
  2. "संग्रहीत प्रति". मूल से 14 मई 2019 को पुरालेखित. अभिगमन तिथि 3 मई 2020.
  3. https://www.hindisahity.com/%E0%A4%A6%E0%A4%B2%E0%A4%BF%E0%A4%A4-%E0%A4%95%E0%A4%B5%E0%A4%BF%E0%A4%A4%E0%A4%BE-dalit-sahitya-hindi-sahitya-ka-itihas/
  4. "संग्रहीत प्रति" (PDF). मूल (PDF) से 19 अगस्त 2019 को पुरालेखित. अभिगमन तिथि 3 जून 2020.