बिलारी

मुक्त ज्ञानकोश विकिपीडिया से
Jump to navigation Jump to search
बिलारी
क़स्बा
देशFlag of India.svg भारत
राज्यउत्तर प्रदेश
जनपदमुरादाबाद
ऊँचाई184 मी (604 फीट)
जनसंख्या (2011)
 • कुल37,567
भाषा
 • आधिकारिकहिंदी
 • बोलचाल की भाषाहिंदी , उर्दू
समय मण्डलआईएसटी (यूटीसी+5:30)
PIN244411[1]
टेलीफोन कोड05921[2]
वाहन पंजीकरणUP 21

बिलारी, उत्तर प्रदेश राज्य के मुरादाबाद जिले में स्थित एक नगर पालिका परिषद है। बिलारी शहर 25 वार्डों में बांटा गया है जिनमें हर 5 साल में चुनाव आयोजित किये जाते हैं। 2011 में हुई भारत की जनगणना के अनुसार इस तहसील में 342 गांव हैं।[3][4]

इतिहास[संपादित करें]

मुग़ल साम्राज्य की नींव 1526 ई. में बाबर ने डाली थी। इसी मुग़ल वंश में 1628 ई. में विश्व प्रसिद्ध ताजमहल के निर्माता शाहजहाँ शासक का चरम युग कहा जाता है। जो भारत में 1628 ई.से सन 1558 तक रहा। बिलारी नगर की स्थापना कबीलों के द्वारा एक छोटे से गाँव के रूप में की गयी थी। शुुुरू मेें इस गाँव की स्थापना करने वाले बहादुर सिंह के नाम पर इसका नाम बहादुरगढ रखा गया। आगे चलकर यह नाम बदलते-बदलते बिलारी हो गया| बाद में यह गाँव से क़स्बा और अब यह कस्बे से नगर का रूप लेता जा रहा है।

स्थिति और विस्तार[संपादित करें]

बिलारी नगर उत्तर प्रदेश के मुरादाबाद की तहसील के रूप में स्थित है| जो मुरादाबाद से 25 किलोमीटर दक्षिण में, चंदौसी नगर से 19 किलोमीटर उत्तर में, संभल जनपद मुख्यालय से 26 किलोमीटर पूर्व में, रामपुर जनपद की तहसील शाहबाद मुुख्यालय से 25 किलोमीटर पश्चिम में स्थित है। बिलारी नगर पूर्व में 2.5 किलोमीटर, पश्चिम में 2 किलोमीटर, उत्तर में 2 किलोमीटर तथा दक्षिण में 1.5 किलोमीटर तक फैला हुआ है।

जनसँख्या एवं मानव आवास[संपादित करें]

समतल व परतदार मिट्टी होने के कारण यहाँ जनसँख्या आधिक है। यहाँ हिंदू,मुस्लमान एवं पंजाबी आधिक हैं। नगर में 44.47% हिंदू आबादी है। जिनमें मुख्य रूप से बनिए, जाट, यादव, ठाकुर व सुनार हैं। इस्लाम धर्मं के अंतर्गत अंसारी, मनिहार आदि हैं। 2001 की जनगणना के अनुसार यहाँ की आबादी 30,246 थी| जिसमें 15,992 पुरुष ततः 14,254 स्त्रियां थीं। यहाँ की आधिकांश जन्संख्या के आवास पक्के हैं। 2011 की जनगणना के अनुसार, बिलारी नगर पालिका परिषद की जनसँख्या 37,567 है| जिनमें से 19,747 पुरुष व 17,820 महिलाएं हैं। 0-6 साल की उम्र के बच्चों की संख्या 5,054 है जोकि कुल आबादी की 13.45% है। बिलारी नगर पालिका परिषद में, महिला लिंग अनुपात (राज्य का औसत लिंगानुपात 912) 902 है। इसके अलावा बाल लिंग अनुपात 912 है। साक्षरता दर 57.84% है, जोकि 67.68% की राज्य औसत दर से कम है। बिलारी में, पुरुष साक्षरता 62.55% के पास है जबकि महिला साक्षरता दर 52.61% है।

बिलारी नगर पालिका परिषद के प्रशासन में 6,882 से अधिक मकान है| जिनमें न०पा०प० के द्वारा सड़क, सफाई, पानी जैसी बुनियादी सुविधाओं की आपूर्ति की जाती है। नगर पालिका परिषद को अपनी नगर सीमा के अंदर यह सभी आवश्यक जनसुविधाएँ दिये जाने के अधिकार प्राप्त हैं| यह न०पा०प० अपने अधिकार क्षेत्र के तहत आने वाली संपत्तियों पर कर अधिरोपित करने के लिए अधिकृत है।[5]

हिन्दू मुस्लमान ईसाई सिख बौद्ध जैन अन्य प्रमाणित नहीं
44.46% 54.25% 0.15% 0.37% 0.03% 0.17% 0.01% 0.57%

[5]

धरातलीय संरचना[संपादित करें]

इस नगरीय क्षेत्र के चारों ओर अर्धनगरीय व ग्रामीण क्षेत्र हैं| नगर के बाहरी क्षेत्र में और सीमाओं पर कुछ बन्द पडे व कुछ चालु हलत में ईंट-भट्टे लगे हैं तथा इंटें बनाने के लिए खेतों में मिट्टी कटान से यहाँ गडढे हो गये हैं| आबादी बढ़ने के साथ ही, खेती भूमि पर लगातार मकान बनाते रहने से, अनेक नई कालोनियों व बस्तियों का क्षेत्रफल बढता जा रहा है| परम्परागत पीपल, बट, नीम, वेल, शीशम, शहतूत, जामुन आदि के बृक्ष, नगर ही नहीं बल्कि क्षेत्र से ही लुप्त हो रहे हैं| इनके स्थान पर यूक्लैप्टिस, पौपुलर, बकान व सागौन आदि के बृक्ष लगाये जा रहे हैं| इससे धीरे-धीरे कृषि भूमि के पोषक तत्व खत्म होते जाने से, भूमि की उपजाऊ क्षमता क्षीण हो रही है|

जलवायु[संपादित करें]

बिलारी नगर की जलवायु मानसूनी है। यहाँ ग्रीष्म ऋतु में मानसूनी हवाओं द्वारा वर्षा होती है। कभी-कभी शीत ऋतु के मौसम में वर्षा हो जाती है। वर्षा का वार्षिक औसत लगभग 50-100 सेमी. रहता है। गर्मियों में अत्यधिक गर्मी तथा सर्दियों में अत्याधिक सर्दी पडती है। कभी-कभी गर्मियों में तापमान 45 डिग्री सेल्सियस तो सर्दियों में 06 डिग्री सेल्सियस से भी कम हो जाता है।

प्राकृतिक वनस्पति[संपादित करें]

बिलारी नगर के नगरवर्ती भागों में पतझड़ वाले वृक्ष पाऐ जाते हैं। यहाँ के मुख्य वृक्षों में आम, जामुन, बेल, शहतूत, अमरुद, गूलर, बरगद, बबूल, नीम, बकान, शीशम, पीपल, यूक्लिप्टिस, पौपुलर आदि हैं।

कृषि[संपादित करें]

बिलारी नगर के निकटवर्ती क्षेत्रों में तीन प्रकार की फसलें होती हैं। जिन्हें रवि, खरीफ व जायद की फसल कहते हैं। रवि के अंतर्गत गेहूं आदि, खरीफ काल में धान आदि फसलें आती हैं। नगदी फसलों में मुख्य ईख व पीपरमैन्ट की पैदावार ली जाती है|

पहले इस क्षेत्र के बडे भूूूूभाग में कपास पैदा होती थी| थीरे-धीरे कपास की जगह ईख(गन्ना) की खेती होने लगी|आज इस तहसील में चीनी मिल है|इससे ईख ने अपना स्थान प्रमुख नकदी फसलों में बना लिया है|किन्तु चीनी मिले प्रत्येक वर्ष क्षेत्र के गन्ना किसानों का करोड़ों रूपयों का भुगतान रोक लेती हैं| जिससे किसान सदैव दुकानदारों व वित्तीय संस्थाओं का कर्जदार बना ही रहता है!

उद्योग धंधे[संपादित करें]

औद्योगिक दृष्टि से बिलारी एक पिछड़ा हुआ नगर है। यहाँ के लोगों का लगभग 50% मुख्य व्यवसाय कृषि से ही जुडा है। इसके अतिरिक्त बुनकर, सूती कपड़ा, दरी, चादर, आदि परम्परागत खड्डियों व पावरलूम पर बुनने का कुटीर उद्योग-धन्धे के रूप में व इससे जुडे कार्य करते हैं| जो यहाँ नगर की मंगल व शुक्रवार की पैंठ बाजार से, सुवह 4 बजे से 8 बजे तक बिभिन्न प्रदेशों के व्यापारी यहाँ से करोडों रूपये का माल खरीदकर अपने प्रदेशों में ले जाते हैं| बिलारी के समीपवर्ती क्षेत्रों में ईंट व गुड उद्योग प्रचुर मात्रा में है। यहाँ पीपरमैंट के तेल का कारोवार भी अपनी जडे जमा रहा है| बिलारी के कारोवार पर मुख्यत: कुमारतनय वैश्यों (बनियों), अन्सारीयों का प्रभुत्व है| क्षेत्र की प्रमुख उपज गन्ने की है| पहले इस क्षेत्र के अधिकाँश भाग पर कपास पैदा की जाती थी| इसकी सारी खपत यहाँ से मात्र 19 किलोमीटर दूर स्थित नगर चन्दौसी की रूई मिल में होती थी| इस कपास उद्योग को, इस क्षेत्र में, चीनी मिल लगवाकर बर्वाद कर दिया गया| बिलारी में चीनी मिल लगने से कपास पैदा करने का क्षेत्र घटता चला गया और चँदौसी की रूई मिल अन्तत: बन्द हो गयी| नगर के निकटवर्ती ग्राम ढकिया नरू में स्थापित, इस एकमात्र अजुध्या शुगर मिल का स्वामित्व, जब से सेठ शादी लाल से अन्य लोगों के हाथों में गया है, तब ही से प्रति वर्ष इस क्षेत्र के गन्ना उत्पादक किसान, सँयुक्त संघर्ष समिति, किसान संघर्ष समिति, भारतीय किसान यूनियन, बिलारी व बाद में भारतीय किसान यूनियन (असली) के प्रतिनिधित्व में अपने करोडों रूपये के बकाया गन्ना मूल्य के लिए शान्तिपूर्ण व लोकतान्त्रिक तरीकों से अब तक की सभी राजनैतिक पार्टियों की सरकारों से संघर्ष करते चले आ रहे हैं| गन्ना उत्पादकों को अनेक दशकों से अपना गन्ना मूल्य प्रति वर्ष नहीं मिल पाने के कारण नगर बिलारी के स्थानीय कारोवार ठप्प होते जा रहे हैं| इसी कारण क्षेत्र के सैकडों किसान सूदखोर महाजनों के कुचक्र में फँसकर अपनी जमीनें उन महाजनों के हाथों कोडियों के भाव बेचने को विवश हैं|

नगर के प्रमुख स्थान[संपादित करें]

बिलारी नगर में, शाहबाद मार्ग पर, एक अति प्राचीन पौण्डा खेड़ा शिव मंदिर है। झँडा चौक पर भी एक अन्य प्राचीन शिव मन्दिर है।इससे सटा हुआ एक पुराना बन्द पडा कुँआ है| यह कुँआ नगर में सबसे ऊँचे स्थान पर स्थित है| जोकि इस बर्तमान नगर बिलारी के संस्थापक बहादुर सिंह द्वारा नगर में स्थापित किये गये पाँच कुँओं में से एक है| शेष चार कुँओं में दूसरा कुँआ मौहल्ला अब्दुल्ला के क्रान्ति चौक में पत्रकार योगी कुमार प्रदीप के निवास के सामने था| जिसमें, बहुत पहले, बताशे वाले बुलाकी के परिवार की एक बच्ची के गिरकर मृत्यु हो जाने पर बन्द कर दिया गया था| तीसरा कुँआ टेलर मास्टर चुनुआ के निवास के निकट वाले चौक में था| जिसे तब खारी कुँआ और अब खारी कुँआ चौक के नाम से जाना जाता है| चौथा कुँआ बर्तमान में हजरत अली शाह की दरगाह के पीछे पूर्व में स्थित सराय में होता था और पाँचवाँ कुँआ, प्राचीन शम्भूनाथ मन्दिर के बराबर में था| यहाँ झण्डे वाले ठाकुर परिवार के नाम से प्रसिद्ध परिवार को, लखनऊ रियासत के तत्कालीन नबाब द्वारा इन झण्डे वालों ठाकुरों के पूर्वजों को उपहार में दिया गया था| इस झण्डे को दशहरे पर सम्मानपूर्वक उतारकर, यह ठाकुर परिवार आज भी पूजा-अर्चना के बाद फिर से नये झण्डे को चढाने की अपनी बरसों पुरानी परम्परा निभाते चले आ रहे हैं| नगर के अन्य प्रमुख स्थलों में गमादेवत का प्राचीन मन्दिर, गाँधी पार्क, साम्प्रदायिक एकता का प्रतीक एक शिव मन्दिर जिसमें एक सँस्कृत महाविद्यालय भी है, इसकी भूमि को एक सच्चे भारतीय मुस्लिम भाई ने मन्दिर को दान में दिया था, नयी तहसील, उपनिबन्धक कार्यालय, महाराणा प्रताप चौक, नगर पालिका परिषद कार्यालय, गन्ना समिति व गन्ना परिषद कार्यालय, डाकघर, आर के पैलेस टाकीज, सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र, नेहरू चौक, रैली चौक, रायसक्ति मन्दिर, बाबा लक्ष्मण दास की मणि, राम रतन इण्टर कालेज, शंकर सहाय-हर सहाय इण्टर कालेज, हरि मंगल डिग्री कालेज, आयुर्वेदिक चिकित्सालय, प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्व विद्यालय, डव्ल्यु० आई० फाऊण्डेशन, काली मन्दिर, अनिल फार्म हाऊस, ग्रीन फार्म हाऊस आदि महत्वपूर्ण स्थल हैं। मौहम्मद अली जौहर एम० आई० इन्टर कॉलेज, बाई०आई०एस० एजुकेशनल आई०टी० इन्सटीटयूट स्टेशन रोड, आशू जनसेवा केंद्र एण्ड साइबर कैफ़े, मौहल्ला अब्दुल्ला पूर्वी वार्ड- २१, बिलारी के मुख्य हैं| मोहल्ला अंसारियान में आज़ाद कॉलेज काफी मशहूर है । जो बहुत प्रसिद्ध समाजसेवी व बिलारी की 'शिक्षा के देवता' माने जाने वाले इमाम सर संचालित करते हैं। इसी साइड में एक झील भी मौजूद है जो काफी बड़ी है।

सन्दर्भ[संपादित करें]

  1. India Post. "Pincode search - Bilari". अभिगमन तिथि 2010-08-10.
  2. Bharat Sanchar Nigam Ltd. "STD Codes for cities in Uttar Pradesh". अभिगमन तिथि 2010-08-10.
  3. vlist.in
  4. mapsofindia.com
  5. 2011 जनगणना