बाहा परब

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बाहा परब (बाहा पर्व) भारत के हो, सन्थाल, ओराँव, मुण्डा एवं अन्य जनजातियों का पर्व है। 'बाहा' का अर्थ है फूल। इस पर्व के अवसर पर बच्चे, पुरुष और स्त्रियाँ सभी परम्परागत वस्त्र धारण करते है तथा मदाल बजाया जाता है।

चैत्र माह आरम्भ होने से पहले बाहा पर्व मनाया जाता है। ग्राम के लोग बैठक कर सारे कार्यकर्म का निर्धारण करते हैं। उसके बाद अपने देवताओं (मृत पूर्वज ) के लिए पुवाल का घर बना कर जेहरा स्थान (जेहराथोन) में पूजा-अर्चना की जाती है जिसमे खासकर आम, महुआ के फूलों को चढ़ाया जाता है। गावं के लोग भोग ग्रहण करके जब गाँव वापस लौटते हैं तब उनके पैर धोकर उनका स्वागत किया जाता है। उसके बाद उत्सव मनाया जाता है। एक-दूसरे पर पानी डालकर खेलते है और संध्या के समय नाच और गाना करके परब मनाया जाता है।