बालाघाट

मुक्त ज्ञानकोश विकिपीडिया से
यहाँ जाएँ: भ्रमण, खोज
बालाघाट
—  शहर  —
निर्देशांक: (निर्देशांक ढूँढें)
समय मंडल: आईएसटी (यूटीसी+५:३०)
देश Flag of India.svg भारत
राज्य मध्य प्रदेश
महापौर अनिल धुवारे
सांसद श्री बोध सिह भगत

बालाघाट दक्षिण मध्यप्रदेश का एक शान्त, सुन्दर शहर। सतपुडा पर्वतमाला के छोर पर मध्यप्रदेश्, महाराष्ट्र और छत्तीसगढ की सीमा पर बसा यह शहर शुद्ध हिन्दी भाषी है। यह एक नगरपालिका व बालाघाट जिले का प्रशासकीय मुख्यालय है। माना जाता है की इसे पहले "बूरा" या "बुरहा" के नाम से जाना जाता था और बाद मे इसका नाम बालाघाट पडा परन्तु इस बात का कोई प्रामाणिक स्रोत नही है। #अतुल राहंगडाले...

भौगोलिक स्थिति[संपादित करें]

बालाघाट 21.8° N 80.18° E[1] अक्षान्श पर स्थित है। इसकी समुद्र तल से औसत ऊचाई 288 मी (944 फीट) है।

कृषि और खनिज[संपादित करें]

धान, मोटा अनाज और दलहन वैनगंगा नदी घाटी के उपजाऊ क्षेत्र में उगने वाली प्रमुख फ़सलें हैं। बालाघाट कृषि व्यापार और भारत सरकार का उपक्रम मैग्नीज और इंडिया लिमिटेड़ मैंगनीज खदान हैं। भरवेली और उक्वा यहाँ की मुख्य खदानें हैं। भरवेली एशिया की सबसे बड़ी मैंगनीज खदान हैं। साथ ही भारत सरकार की एक और कंपनी हिंदुस्तान कॉपर लिमिटेड़ जो बालाघाट के मलाजखंड नगर पालिका के अंतरगत आता है।

जनसन्ख्या[संपादित करें]

वर्ष २००१ की जणगणना के अनुसार इस शहर की जनसन्ख्या ७५०६१ है जिसमे ५१% पुरुष और ४९ % महिलाये है। जिले का साक्षरता प्रातिशत ७९% है। वर्ष 2011 कि जनगणना के अनुसार जिले कि जनसंख्या 1701156 है | पुरुषो कि सा. 87.13 महिला कि सा. 69.87 है

यातायात[संपादित करें]

प्रमुख सड़क पर स्थित है व रेल जंक्शन भी है। यह मध्य प्रदेश के लगभग सभी बडे शहरो भोपाल, जबलपुर और इन्दौर से सड़क मार्ग द्वारा जुड़ा हुआ है। जबलपुर से ब्राडगेज के रेलमार्ग द्वारा यहाँ पहुँचा जा सकता है। यह महाराष्ट्र के नगर नागपुर से औ‍र छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर से भी सड़क मार्ग द्वारा जुड़ा है। रायपुर नागपुर से बडी रेल लाईन से मुम्बई हावडा रेल मार्ग पर गोन्दिया शहर पर उतरकर बालाघाट सड़क या रेल मार्ग द्वारा एक घन्टे में पहुँचा जा सकता है।

प्रसिद्ध स्थल[संपादित करें]

  • कान्हा राष्ट्रीय उद्यान
  • हट्टा की बावड़ी या बाहोली
  • लांजी का प्राचीन किला
  • गंगुल्पारा बाँध एवं जल प्रपात
  • धुती बाँध
  • किरनाई मन्दिर{किरनापुर}
  • रामपायली में स्थित प्राचीन मंदिर, जहां स्वयं श्री राम के चरण पड़े थे
  • माँ ज्वाला देवी मंदिर भरवेली नगर से 5 किमी में वीराजमान है।
  • बाहकल प्राचीन देवी मंदिर

यह मंदिर का निर्माण कब और कैसे हुआ किसीको पता नही है इस गांव के बुजुर्गों की माने तो उनका कहना है कि यह मंदिर अपने आप ही निर्मित हुआ है paras bisen

शिक्षण संस्थान[संपादित करें]

यहाँ रानी दुर्गावती विश्वविद्यालय से संबद्ध दो महाविद्यालय और अन्य कई प्रशिक्षण और पॉलीटेक्निक संस्थान हैं। शासकीय उत्कष्ट विद्यालय कटंगी के विद्यार्थीयो ने जिले का नाम रोशन किया है। यह एक मात्र विद्यायल जो २०,००० विद्यार्थियों की पसंद है,कृषि के क्षेत्र में उन्नति लाने हेतु वर्ष 2012 में जिले की वारासिवनी तहसील में कृषि महाविद्यालय की स्थापना की गई है जिससे जिले में कृषि की उन्नत तकनीक का प्रसार हो रहा है।[कृपया उद्धरण जोड़ें]

कैसे जाये बालाघाट[संपादित करें]

यह मध्य प्रदेश के बडे शहरो जैसे राजधानी भोपाल, सन्स्कारधानी जबलपुर और उपमहानगरी इन्दौर से सीधे सडकमार्ग से जुडा है। जबलपुर से ब्राडगेज के लौहमार्ग (रेलमार्ग्) से आप जगप्रसिद्ध सतपुडा एक्सप्रेस पकडकर यहा पहुच सकते है। यह महाराष्ट्र की उपराजधानी नागपुर् से औ‍र छतीसगढ की राजधानी रायपुर से भी सीधे सडक मार्ग से जुडा है। नागपुर से आप बडी रेललाईन से मुम्बई हावडा मार्ग पर दो घन्टे मे गोन्दिया शहर आ जाये जहा से बालाघाट सडक/रेल मार्ग से सिर्फ् एक घन्टे मे पहुच सकते है।

लेखक - अतुल रहांगडाले[संपादित करें]

इन्हें भी देखें[संपादित करें]