बालशौरि रेड्डी

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डॉ॰ बालशौरि रेड्डी हिन्दी और तेलुगू के यशस्वी साहित्यकार, 'चंदामामा' के पूर्व सम्पादक, प्रसिद्ध बालसाहित्य सर्जक, अनन्य हिन्दी साहित्य साधक हैं। बालशौरि रेड्डी की मातृभाषा तेलुगु है लेकिन उनका जीवन हिंदी लेखन के प्रति समर्पित रहा. बालशौरि ने 14 उपन्यास, करीब दर्जनभर नाटक, कहानी, संस्मरण, संस्कृति और साहित्य से संबंधित कई अन्य पुस्तके लिखी.

जीवनी[संपादित करें]

डॉ॰ बालशौरि रेड्डी का जन्म आन्ध्र प्रदेश में हुआ। मातृभाषा तेलुगू है। 1946 में हिंदी प्रचारिणी सभा की रजत जयंती के मौके पर इनकी मुलाकात गांधी जी से हुई. गांधीजी के राष्ट्रीय आंदोलन के 14 सूत्रीय रचनात्मक कार्यक्रमों में हरिजन उद्धार, नारी शिक्षा, कुटीर उद्योग के साथ हिंदी सीखना भी शामिल था। गांधीजी के कहने पर बालशौरि ने हिंदी सीखना शुरू किया। आगे चलकर उन्होंने विशारद, साहित्यरत्न और साहित्यालंकार की परीक्षाएं उत्तीर्ण की. हिंदी सीखने के लिए काशी और प्रयाग गए जहां उनका परिचय निराला, महादेवी वर्मा, बच्चन जैसे बड़े साहित्यकारों से परिचय हुआ।

बाहरी कड़ियाँ[संपादित करें]