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बायोमिमिटिक्स

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बायोमिमिटिक्स

बायोमिमिटिक्स एक ऐसा कार्यक्षेत्र है जिसमें जानवरों और पेड़-पौधों से सीखकर नई चीज़ें बनाई जाती हैं। यह शब्द ग्रीक के दो शब्दों से बना है—बायो (जिंदगी) और मिमेसिस (नकल)। बायोमिमिटिक्स का आशय है कि प्रकृति का अवलोकन कर उसके सिद्धांतों का तकनीक और विज्ञान में अनुप्रयोग करना।

इस विषय पर प्राचीन काल से लेकर वर्तमान तक कई उदाहरण हैं, जिनमें लोगों ने प्रकृति की रचनाओं और तंत्रों से प्रेरणा लेकर नवाचार किए हैं।

शुरुआत कैसे हुई मनुष्य लंबे समय से प्रकृति का अनुगमन कर नए आविष्कार करता रहा है। पंछियों को देखकर उड़ने की कोशिश से लेकर मिस्र के प्राचीन प्रयोगों तक, बायोमिमिटिक्स के बीज बहुत पुराने हैं। आधुनिक अर्थों में 'बायोमिमेटिक्स' शब्द का उपयोग पहली बार 1950 के दशक में अमेरिकी वैज्ञानिक ओटो श्मिट द्वारा किया गया था। जेनाइन बेन्युस ने 1997 में अपनी पुस्तक Biomimicry: Innovation Inspired by Nature में इस अवधारणा को लोकप्रिय किया।

मुख्य उदाहरण चिपकने वाली पट्टी (वेल्क्रो): 1941 में स्विट्जरलैंड के इंजीनियर जॉर्ज डी मेस्त्राल ने देखा कि उनके कपड़ों और कुत्ते के बालों में बीज चिपक गए हैं। माइक्रोस्कोप से पाया गया कि इन बीजों में छोटे हुक होते हैं जो धागों में फंस जाते हैं। इसी से प्रेरित होकर वेल्क्रो बनाई गई, जो आज विभिन्न उत्पादों में प्रयुक्त होती है।

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बुलेट ट्रेन का डिजाइन: जापान की तेज़ चलने वाली ट्रेन के सामने सुरंग से निकलते समय आवाज़ की समस्या थी। इंजीनियर एजी नाकात्सु ने किंगफिशर पक्षी की चोंच का अध्ययन किया और उसी डिजाइन को ट्रेन के आगे के हिस्से में अपनाया, जिससे ध्वनि कम हुई और कार्यक्षमता बढ़ी।

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कमल के पत्ते का प्रभाव: कमल के पत्ते पर पानी की बूंदे नहीं टिकतीं। जर्मन वैज्ञानिक बार्थलॉट ने पता लगाया कि ऐसा सतह पर मौजूद नैनोस्ट्रक्चर की वजह से होता है। इसका प्रयोग आत्म-साफ सतहों और रंगों में किया जा रहा है।


गेको टेप: गेको छिपकली अपने पंजों में सूक्ष्म बालों की मदद से दीवारों पर चलती है। इसी सिद्धांत से बिना चिपकने वाली बार-बार प्रयुक्त की जा सकने वाली टेप बनाई गई।

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शार्क मछली की खाल: शार्क की खाल की सूक्ष्म संरचना से प्रेरित होकर तैराकी के सूट और जीवाणुरोधी सतहें बनायी गई हैं।


भारत में पुरानी बातें भारत में बायोमिमिक्री से संबंधित परंपराएँ प्राचीन वैदिक चिकित्सा, वास्तुकला और पारंपरिक कारीगरी में दिखती हैं। आधुनिक समय में, आईआईटी, आईआईएससी, सीएसआईआर और डीआरडीओ संस्थानों में भी इस दिशा में शोधकार्य हो रहे हैं।

आज के समय में उपयोग चिकित्सा: मच्छर की सुई से प्रेरित दर्द रहित इंजेक्शन, शार्क की खाल से प्रेरित संक्रमण-रोधी सतहें, गेको टेप पर आधारित पट्टियाँ आदि।

परिवहन: हवाई जहाज के डिज़ाइन में पक्षियों के पंखों की संरचना, कार की बॉडी में डॉल्फिन का आकार, जहाजों के पतवार में शार्क की खाल जैसी सतहें।

बिल्डिंग और निर्माण: दीमक के घरों से प्रेरित वातानुकूलन, कमल के पत्ते से प्रेरित स्वयं-साफ इमारतें, मधुमक्खी के छत्ते से प्रेरित संरचनाएँ आदि।

चुनौतियां प्राकृतिक तंत्रों की नकल करना कठिन है, क्योंकि वे अत्यंत जटिल और परिष्कृत होते हैं। इन तकनीकों के विकास में समय, लागत और विशेषज्ञता की आवश्यकता होती है।

आगे की संभावनाएँ आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और कम्प्यूटर सिमुलेशन से भविष्य में और अधिक परिष्कृत बायोमिमेटिक उत्पाद विकसित किए जा सकते हैं। इनमें स्व-सुधार करने वाली सामग्री, मौसम के अनुसार रूप बदलने वाली संरचनाएँ संभावित हैं।

पर्यावरणीय लाभ प्राकृतिक तंत्रों का अनुप्रयोग टिकाऊ विकास, कम ऊर्जा खपत, और पर्यावरण-हितैषी समाधानों को बढ़ावा देता है।

पढ़ाई में अब कई विश्वविद्यालयों में यह क्षेत्र पढ़ाया जा रहा है और युवाओं के लिए बायोमिमिक्री में अपार संभावनाएँ हैं।

निष्कर्ष बायोमिमिटिक्स तकनीकी नवाचार के साथ पर्यावरणीय संतुलन का बेहतर मार्ग दिखाता है। यह मानव जाति को प्रकृति की सर्वोत्तम शिक्षाओं से लाभान्वित करता है।

संदर्भ Benyus, Janine M. (1997). Biomimicry: Innovation Inspired by Nature. HarperCollins.

Friedlander, Amy (2012). "Velcro: Inspired by Nature." Science News, Society for Science & the Public.

Nakatsu, Eiji (2008). "A Study of Shinkansen Noise and Kingfisher Beak." JR West Technical Review, 28: 1–5.

Barthlott, W., Neinhuis, C. (1997). "Purity of the sacred lotus, or escape from contamination in biological surfaces." Planta, 202(1), 1–8.

Autumn, K. et al. (2002). "Evidence for van der Waals adhesion in gecko setae." Proceedings of the National Academy of Sciences, 99(19), 12252–12255.

Schumacher, J.F. et al. (2007). "Engineered antifouling microtopographies–effect of feature size, geometry, and roughness on settlement of zoospores of the green alga Ulva." Biofouling, 23(1), 55–62.

Council of Scientific and Industrial Research (CSIR), Government of India. (2018). "Biomimicry Research in India: An Overview."

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